Friday, April 19, 2024

वीएचपी ने 2002 के दंगों में मुसलमानों के सफाए की योजना बनायी थी: ब्रिटिश सरकार की जांच रिपोर्ट

‘द कारवां’ ने 2002 की गुजरात हिंसा में यूनाइटेड किंगडम की सरकार द्वारा की गई जांच की एक प्रति प्राप्त की है, जिसे हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बीबीसी की एक डॉक्यूमेंटरी में उद्धृत किया गया था। इस डॉक्यूमेंटरी का शीर्षक है ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’। ब्रिटिश सरकार की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व हिंदू परिषद नाम के एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन ने “संभवत: महीनों पहले से इस हिंसा की योजना बनायी थी।”

रिपोर्ट में कहा गया है: “27 फरवरी को गोधरा में ट्रेन पर हुए हमले से एक बहाना मिल गया। अगर ऐसा न हुआ होता तो कोई और बहाना खोज लिया जाता।”

रिपोर्ट में हिंसा को पूर्व नियोजित बताते हुए सबूतों का हवाला दिया गया है: “पुलिस संपर्कों ने पुष्टि की कि दंगाइयों ने मुस्लिम घरों और व्यवसायों को निशाना बनाने के लिए कम्प्यूटरीकृत सूचियों का उपयोग किया। इन सूचियों में जिस तरह से यहां तक कि किन व्यवसायों में मुसलमानों की छोटी हिस्सेदारी है इसका भी सटीक विवरण था, इससे पता चलता है कि ये सूचियां काफी पहले से तैयार की गयी थीं।”

यह रिपोर्ट गुजरात की राज्य सरकार को भी सीधे इंगित करती है कि “मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।”

रिपोर्ट में लिखा है:

“विहिप और उसके सहयोगियों ने राज्य सरकार के समर्थन से यह काम किया। वे राज्य सरकार द्वारा निर्भय होकर काम करने की खुली छूट के माहौल के बिना इतना नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। इसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। उनके कार्यकलाप केवल राजनीतिक लाभ लेने के सनकपूर्ण आकलन द्वारा निर्देशित नहीं रहे हैं। 1995 में सत्ता में आने के बाद से भाजपा अपने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे पर काम कर रही है और इसके एक वास्तुकार के रूप में वे विहिप की वैचारिक प्रेरणा में विश्वास करते हैं।”

रिपोर्ट हिंसा के भीषणता पर भी टिप्पणी करती है और मुस्लिम महिलाओं के बलात्कार में पुलिस की संलिप्तता की ओर इशारा करती है। “विश्वसनीय मानवाधिकार संपर्कों से मिली जानकारी के आधार पर मौतों की संख्या का बहुत कम करके लगाया गया अनुमान भी 2000 है … ये हत्याएं कई क्षेत्रों में मुस्लिम महिलाओं के व्यापक और व्यवस्था जनित बलात्कार के साथ-साथ की गयी थीं, जिनमें कभी-कभी पुलिस वाले भी शामिल थे।”

रिपोर्ट कहती है कि “पुलिसिया सूत्र स्वीकार करते हैं कि राज्य सरकार के अंतर्निहित दबाव ने उनकी प्रतिक्रिया को बाधित किया।”

रिपोर्ट का पाठ यहां पूर्ण रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है। स्रोतों की सुरक्षा के लिए कुछ नामों को संपादित किया गया है।

 सारांश

1. हिंसा बताई गई मात्रा की तुलना में बहुत अधिक, कम से कम 2000 हत्याएं, मुस्लिम महिलाओं का व्यापक और व्यवस्था निर्दिष्ट बलात्कार, आंतरिक शरणार्थियों की संख्या 138,000, हिंदू और हिंदू/मुस्लिम मिश्रित क्षेत्रों में सभी मुस्लिम व्यवसायों का निशाना बनाकर विनाश।

सारांश

2. हिंसा योजनाबद्ध थी, संभवतः काफी पहले से, और राजनीति से प्रेरित थी। उद्देश्य हिंदू क्षेत्रों को मुसलमानों से खाली कराना था। चरमपंथी हिंदू संगठन विहिप के नेतृत्व में, राज्य सरकार के संरक्षण में यह सब हुआ। मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए हिंदू-मुसलमानों में समन्वय असंभव।

विवरण

3. #### ने चल रही हिंसा के प्रभाव का आकलन करने के लिए 8-10 अप्रैल को अहमदाबाद, गुजरात का दौरा किया। उन्होंने बड़ी संख्या में मानवाधिकार संपर्कों, दोनों समुदायों के नेताओं, महानिदेशक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, राजनेताओं, पत्रकारों और व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की। वे राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से नहीं मिले।

वर्तमान स्थिति

 4. अहमदाबाद अब शांत है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में छिटपुट हिंसा जारी है। 27 फरवरी को शुरू हुई हिंसा का डर हमारे द्वारा अब तक बताई गई मात्रा की तुलना में कहीं अधिक था। आधिकारिक आंकड़े (वर्तमान में 840 मौतें) मरने वालों की संख्या को काफी कम आंकते हैं। वे गुमशुदा व्यक्तियों की संख्या को नहीं जोड़ते हैं (जिन्हें दस वर्षों तक मृत्यु के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जा सकता)। ग्रामीण क्षेत्रों से रिपोर्टिंग खराब रही है। विश्वसनीय मानवाधिकार संपर्कों से मिली जानकारी के आधार पर एक रूढ़िवादी अनुमान मृत्यु की संख्या को 2000 बताता है। कुछ मानवाधिकार संपर्कों, समुदाय के नेताओं, और अन्य चैनलों की रिपोर्टिंग के अनुसार यह आंकड़ा काफी अधिक हो सकता है।

5. हत्या के साथ-साथ कई क्षेत्रों में मुस्लिम महिलाओं का व्यापक और व्यवस्थित बलात्कार किया गया, कभी-कभी पुलिस द्वारा भी। 138,000 लोग विस्थापित हुए हैं और 70 शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। इनमें 100,000 से अधिक मुस्लिम हैं।

6. मुस्लिम व्यवसायों को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाया गया। अलग-अलग मुस्लिम दुकानों के जले हुए मलबे साफ-साफ छोड़ दी गयी हिंदू दुकानों की पंक्तियों में दिखाई दे रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, अहमदाबाद ने हमें बताया कि अहमदाबाद के हिंदू और हिंदू/मुस्लिम मिश्रित क्षेत्रों में हर मुस्लिम व्यवसाय नष्ट हो गया।

हिंसा का पैटर्न

7. गुजरात ने हाल ही में 1992 में सांप्रदायिक हिंसा के कई उभार देखे हैं। लेकिन पुलिस सहित हमारे अधिकांश वार्ताकारों ने कहा कि इस बार हिंसा का पैटर्न अलग था। हिंसा का नेतृत्व वीएचपी ने अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों के साथ किया था। यह संभवतः महीनों पहले पूर्व नियोजित था। पुलिस संपर्कों ने पुष्टि की कि दंगाइयों ने मुस्लिम घरों और व्यवसायों को लक्षित करने के लिए कम्प्यूटरीकृत सूचियों का उपयोग किया। इन सूचियों में जिस तरह से यहां तक कि किन व्यवसायों में मुसलमानों की छोटी हिस्सेदारी है इसका भी सटीक विवरण था, इससे पता चलता है कि ये सूचियां काफी पहले से तैयार की गयी थीं।

राज्य सरकार की मिलीभगत

8. हम पहले ही राज्य सरकार (पहली टीयूआर) की निष्क्रियता पर रिपोर्ट कर चुके हैं। इसके अलावा, चश्मदीदों की रिपोर्ट है कि पांच राज्य मंत्रियों ने पहले दिन दंगों में भाग लिया। विश्वसनीय पत्रकार और मानवाधिकार संपर्कों ने भी हमें बताया है कि भाजपा (प्रधानमंत्री वाजपेयी की पार्टी) के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी की शाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें दंगे में हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया। पुलिस संपर्क इस बैठक से इनकार करते हैं।

9. लेकिन पुलिस संपर्क स्वीकार करते हैं कि राज्य सरकार के अंतर्निहित दबाव ने उनकी प्रतिक्रिया को बाधित किया। पुलिस महानिदेशक चक्रवती भी स्वीकार करते हैं कि कुछ पुलिस वालों ने दंगों में भाग लिया हो सकता है, जो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ नहीं, बल्कि बहुत व्यापक था। पुलिस द्वारा मारे गए 130 लोगों में से आधे मुस्लिम थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने हिंसा से जुड़े 8,000 लोगों को गिरफ्तार किया है। वे गिरफ्तार लोगों का हिंदू/मुसलमान के रूप में विवरण नहीं दे रहे हैं।

10. सरकार राहत प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में धीमी रही है। शरणार्थी शिविरों में स्थितियाँ खराब हैं, आश्रय बहुत कम हैं और स्वच्छता नहीं है। सरकार ने पिछले सप्ताह प्रधान मंत्री वाजपेयी की यात्रा के बाद ही शिविरों को भोजन और आश्रय प्रदान करना शुरू किया। गैर सरकारी संगठन इस कमी को भर रहे थे। राज्य सरकार का प्रारंभिक मुआवजे का प्रस्ताव भेदभावपूर्ण था: गोधरा में ट्रेन पर हमले के पीड़ितों (हिंदुओं) को 200,000 रुपये; अन्य सभी (मुख्य रूप से मुस्लिम) पीड़ितों को 100,000 रुपये। उन्होंने अब सभी पीड़ितों को बराबर 50,000 रुपये देने की पेशकश की है। लेकिन दिवालिया होने के कारण राज्य सरकार ज्यादा मुआवजा नहीं देगी।

मीडिया की भूमिका

11. गुजराती भाषा के अधिकांश प्रेस ने हिंसा भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने ज़हरीली अफ़वाहों और दुष्प्रचार को प्रकाशित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा है, जिसने मुस्लिम विरोधी भावनाओं को हवा दी है।

टिप्पणी

12. हिंसा के अपराधियों, वीएचपी और अन्य हिंदू चरमपंथी समूहों का उद्देश्य हिंदू और मिश्रित इलाकों को मुस्लिमों से खाली कराना था ताकि उन्हें घेट्टो जैसे इलाक़ों में अलग किया जा सके। हिंसा के उनके व्यवस्थित अभियान में जातीय सफाये की भी योजनाएं हैं। 27 फरवरी को गोधरा में ट्रेन पर हुए हमले ने इसका बहाना बना दिया। अगर ऐसा न हुआ होता तो भी कोई और बहाना मिल जाता।

13. विहिप और उसके सहयोगियों ने राज्य सरकार के समर्थन से काम किया। वे राज्य सरकार द्वारा दिये गये दंडित होने के भय से मुक्ति के माहौल के बिना इतना नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। इसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। उनके कार्यकलाप केवल राजनीतिक लाभ लेने के सनकपूर्ण आकलन द्वारा निर्देशित नहीं रहे हैं। 1995 में सत्ता में आने के बाद से भाजपा अपने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे पर काम कर रही है और इसके एक वास्तुकार के रूप में वे विहिप की वैचारिक प्रेरणा में विश्वास करते हैं।

14. विहिप अपने अभियान में सफल हो सकती है। कानून व्यवस्था फेल हो गई है। पुलिस या न्यायपालिका पर कोई भरोसा नहीं है। जब तक मोदी सत्ता में रहेंगे, मुसलमान और कई अन्य तबके भयभीत और असुरक्षित रहेंगे; हिंसा से विस्थापित हुए लोग अपने घर लौटने से हिचकेंगे; मेलजोल असंभव होगी; और बदले की कार्रवाई से इंकार नहीं किया जा सकता है। बहरहाल, आज ताजा खबर यह है कि 12-14 मार्च को भाजपा की बैठक के बाद वाजपेयी मोदी को हटा सकते हैं।

(द वायर से साभार लेकर रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद किया गया है।)

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