Tuesday, January 31, 2023

डूब गया पत्रकारिता का नक्षत्र

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ का निधन हो गया है। विनोद दुआ 67 साल के थे और पिछले काफी समय से बीमार होने के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था । 

विनोद दुआ की बेटी मल्लिका दुआ ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए उनके निधन की जानकारी साझा की है। मल्लिका दुआ ने बताया कि विनोद दुआ का अंतिम संस्कार कल लोधी श्मशान घाट में कराया जाएगा। मल्लिका दुआ ने इंस्टाग्राम पर लिखा, हमारे निर्भीक और असाधारण पिता विनोद दुआ का निधन हो गया है। उन्होंने शानदार जिंदगी को जिया, दिल्ली की एक शरणार्थी कॉलोनी में पले-बढ़े और 42 साल तक पत्रकारिता की दुनिया में नाम कमाया, वह हमेशा सच की आवाज उठाते रहे। अब वह हमारी मां के साथ हैं, उनकी पत्नी चिन्ना स्वर्ग में हैं जहां वे गाएंगे, खाना बनाएंगे और एक साथ यात्रा करेंगे। उनका अंतिम संस्कार कल (15.12.21) लोधी श्मशान घाट में होगा। 

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार  विनोद दुआ और उनकी पत्नी कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित हो गए थे। दोनों की तबीयत काफी बिगड़ गई थी। इसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विनोद दुआ 7 जून को घर लौट आए थे। हालांकि, उनकी पत्नी का 12 जून को निधन हो गया था। 

विनोद दुआ का जन्म नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दूरदर्शन और एनडीटीवी में काम किया। साल 1996 में वे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार थे, उन्हें रामनाथ गोयनका अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें 2008 में पत्रकारिता के लिए पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। जून 2017 में, पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी जीवन भर की उपलब्धि के लिए, मुंबई प्रेस क्लब ने उन्हें रेडइंक पुरस्कार से सम्मानित किया था। दो साल पहले ‘मीटू मूवमेंट’ में भी उनका नाम आया था। 

विनोद दुआ सच के लिए साहस के साथ लड़ने के लिए जाने जाएंगे। उन्होंने सत्ता के सामने कभी झुकना मंजूर नहीं किया और हमेशा सत्य के साथ खड़े रहे। शायद यही वजह है कि मौजूदा मोदी सरकार ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाया। लेकिन दुआ ने उसका भी डटकर मुकाबला किया और अंत में सुप्रीम कोर्ट से विजय हासिल की। और इस तरह से पत्रकारिता की आने वाली पीढ़ी के सामने कलम से लेकर कोर्ट तक लड़ने की मिसाल पेश की। दुआ ने पत्रकारिता की एक पूरी विरासत छोड़ रखी है। इलेक्ट्रानिक मीडिया के वह उन चंद पत्रकारों में शामिल थे जिन्होंने भारत में उसे एक पहचान दी। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 

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