Wednesday, December 8, 2021

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प्रधानमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए किसान मोर्चा ने एमएसपी और बिजली संशोधन बिल की मांग दोहराई

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“संयुक्त किसान मोर्चा इस निर्णय का स्वागत करता है और उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत में एक साल के किसान संघर्ष की ऐतिहासिक जीत होगी। हालांकि इस संघर्ष में क़रीब 700 किसान शहीद हुए हैं। लखीमपुर खीरी हत्याकांड समेत इन टाली जा सकने वाली मौतों के लिए केंद्र सरकार की जिद जिम्मेदार है”। 

उपरोक्त बातें संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि क़ानून रद्द करने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कही है। 

आज सुबह 9 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों को निरस्त करने की घोषणा पर संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी करके प्रतिक्रिया दी है। 

प्रेस विज्ञप्ति में संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे कहा है कि  “भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जून 2020 में पहली बार अध्यादेश के रूप में लाए गए सभी तीन किसान विरोधी, कॉर्पोरेट समर्थक काले कानूनों को निरस्त करने के भारत सरकार के फैसले की घोषणा की। उन्होंने गुरु नानक जयंती पर इसकी घोषणा करना चुना”।

संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाया है कि किसानों का आंदोलन न केवल तीन काले कानूनों को निरस्त करने के लिए है, बल्कि सभी कृषि उत्पादों और सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य की वैधानिक गारंटी के लिए भी है। किसानों की यह अहम मांग अभी बाकी है। इसी तरह बिजली संशोधन विधेयक को भी वापस लिया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा सभी घटनाक्रमों पर ध्यान देगा, जल्द ही अपनी बैठक करेगा और आगे के फैसलों की घोषणा करेगा।

वहीं अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा महासचिव डॉ आशीष मित्तल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके इसे भारत के किसानों और देशभक्त लोगों की एतिहासिक जीत बताया है। और

भारत के किसानों को इस वास्तविक ऐतिहासिक आंदोलन के लिए बधाई दिया है जिसने मोदी के नेतृत्व वाली आरएसएस भाजपा सरकार को यह घोषणा करने के लिए मजबूर किया है कि 3 कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाएंगे। 

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने कहा है कि हम इस बात से निराश हैं कि सरकार ने अन्य मुद्दों पर कोई घोषणा नहीं की है, यानी, खरीद के लिए कानूनी गारंटी और सभी फसलों के लिए C2 + 50% पर MSP, नया बिजली बिल और संबंधित मुद्दे। सरकार को इन मांगों को भी मान लेना चाहिए। 

वहीं स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने इसे देश के किसानों की जीत बताया है। साथ ही एमएसपी समेत अन्य मुद्दों पर कमेटी गठित करने के नरेंद्र मोदी के बयान पर उन्होंने कहा है कि – “गांव में एक कहावत है कि कमेटी बनाना यानि काम पर मिट्टी डालना। जब सरकार को कोई काम नहीं करना होता है तो वो कमेटी बना देती है।” 

किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने तीन किसान-विरोधी, कॉर्पोरेट-समर्थक काले कानूनों की वापसी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को किसानों और लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि मैं बार-बार कह रहा था कि किसी एक दिन प्रधानमंत्री तीनों कृषि कानूनों की वापसी का राष्ट्र के नाम  संदेश जारी करने को मजबूर हो जाएंगे। वह दिन आज आ गया, लेकिन इसकी बड़ी कीमत संयुक्त किसान मोर्चा ने 700 किसानों की शहादत देकर चुकायी है।

डॉ सुनीलम ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है तथा जिन किसानों के लिए सरकार ने कानून बनाने का दावा किया था, वे किसान 357 दिन से विरोध कर रहे थे। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।

डॉ सुनीलम ने कहा कि अडानी – अंबानी को यह समझ लेना चाहिए कि देश उनकी बपौती नहीं है तथा कोई भी सरकार देश को पूंजीपतियों को सौंपने की हैसियत नहीं रखी है।

मजदूर संगठन AICCTU ने कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान को किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा है कि 800 किसानों का बलिदान याद रखेगा हिंदुस्तान! इसके अलावा AICCTU ने 4 श्रम कोड, बिजली बिल- 2020/MSP/CAA और UAPA को रिपील करने की बात कही है। साथ ही लखीमपुर खीरी में किसानों के हत्यारे केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी को बर्खास्त करने की मांग दोहराई है। ऐक्टू ने कहा है कि माफी का नाटक बन्द करो, निजीकरण-मुद्रीकरण व  अडानी-अम्बानी का राज खत्म करो। 

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा है कि  देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया। अन्याय के ख़िलाफ़ ये जीत मुबारक हो! जय हिंद, जय हिंद का किसान!

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि 700 से ज़्यादा किसानों की मौत के बाद अगर ये सरकार कृषि क़ानून वापस लेती है तो इससे पता चलता है कि यह सरकार किसानों के बारे में कितना सोचती है। साल भर से जो किसान और आम जनता का नुकसान हुआ है इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुये कहा है कि “अमीरों की भाजपा ने भूमि अधिग्रहण व काले क़ानूनों से ग़रीबों-किसानों को ठगना चाहा। कील लगाई, बाल खींचते कार्टून बनाए, जीप चढ़ाई लेकिन सपा की पूर्वांचल की विजय यात्रा के जन समर्थन से डरकर काले-क़ानून वापस ले ही लिए। भाजपा बताए सैंकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सज़ा कब मिलेगी।”

 AIMIM  चीफ ओवैसी ने कहा है कि आगामी चुनावों में हार के डर से मोदी जी ने कृषि कानूनों को वापस लिया  है। ओवैसी ने आगे कहा- ये सरकार डरती है जब जनता सड़क पर उतरती है, ये किसान आंदोलन और किसानों की सफलता है, वो दिन भी दूर नहीं है, जब मोदी सरकार CAA का क़ानून भी वापस लेगी।

वहीं बसपा अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार से किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवार को नौकरी की मांग करते हुये कहा कि किसानों का बलिदान आखिरकार रंग लाया है। उन्होंने कहा कि सर्दी, गर्मी में बरसात की मार झेलते हुए आंदोलन पर डटे किसानों की यह जीत हुई है। मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन विवादित कानूनों को अति देर से वापस लेने की घोषणा की जबकि यही फैसला बहुत पहले ले लेना चाहिए था। केंद्र सरकार यदि ये फैसला काफी पहले ले लेती तो देश अनेकों प्रकार के झगड़ों, झंझट आदि से बच जाता। लेकिन अभी भी किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य देने संबंधी राष्ट्रीय कानून बनाने की खास मांग भी इनकी अधूरी पड़ी है। जिसके लिए बीएसपी की मांग है कि केंद्र सरकार आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कानून बनाकर किसानों की इस मांग को भी ज़रूर स्वीकार करें।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर कहा कि आज सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े हैं, राजनीति की वजह से यह वापस लिए गए हैं लेकिन मैं इसका स्वागत करता हूं। पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनाव में हार के डर की वजह से यह कानून वापस लिए हैं। सरकार के ऊपर दबाव था आखिर में किसानों की जीत हुई। 

 राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि किसान की जीत, देश की जीत, पूंजीपतियों, उनके रखवालों और सरकार की हार।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के ऐलान पर कहा कि आज प्रकाश दिवस के दिन कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी मिली। तीनों क़ानून रद्द। 700 से ज़्यादा किसान शहीद हो गए। उनकी शहादत अमर रहेगी। आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी कि किस तरह इस देश के किसानों ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर किसानी और किसानों को बचाया था। मेरे देश के किसानों को मेरा नमन।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

  

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