संजय राय ‘शेरपुरिया’ की केंद्र सरकार से ‘नजदीकी’ और गिरफ्तारी का सच क्या है?

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा गिरफ्तार किए गए संजय राय ‘शेरपुरिया’ के ‘रसूख’ और ‘पहुंच’ की कथा धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है। एसटीएफ ने शेरपुरिया पर व्यक्तिगत लाभ के लिए पीएम के नाम का “दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया है। पुलिस की नजर में वह शातिर ‘ठग’ है जो प्रधानमंत्री, पीएमओ, केद्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से अपनी ‘नजदीकी’ बताकर लोगों को नौकरी दिलाने और टेंडर पास कराने का झांसा देकर पैसे ऐंठता है।

जिन विशिष्ट लोगों का वह नजदीकी होने का दावा करता रहा है, अभी वे मौन हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट तस्वीरें उसके संबंधों की कहानी बयां करते हैं। सोशल मीडिया पर आज भी आप संजय राय ‘शेरपुरिया’ की केंद्रीय मंत्रियों, उत्तर प्रदेश के कई मंत्री, उप-मुख्यमंत्री, भाजपा पदाधिकारियों, संघ-भाजपा से संबद्ध वरिष्ठ पत्रकारों समेत संघ प्रमुख मोहन भागवत तक के साथ मंच शेयर करते हुए तस्वीरें देख सकते हैं।

यह केवल किसी बहाने या किसी तरह बड़े लोगों के पास पहुंच कर फोटो खिंचा लेने और उनके नाम का दुरुपयोग कर पैसा कमाने का ‘खेल’ नहीं है। बल्कि यह घटना हमारे देश के हुक्मरानों के चाल-चरित्र को तार-तार कर देता है। एक संदिग्ध व्यक्ति वर्षों से सत्ता के शीर्ष केंद्र पर मूंग दल रहा है, और देश की सुरक्षा एजेंसियों को खबर तक नहीं है? इस तथाकथित ‘ठग’ के तार कहीं न कहीं सत्ता के शीर्ष से जुड़े होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा बुधवार को गिरफ्तार किए गए संजय राय ‘शेरपुरिया’ ने अपना निवास “1, रेस कोर्स के पास, सफदरजंग रोड” बताया है। यह लोकेशन कोई मामूली नहीं है। ये लुटियंस की दिल्ली का सबसे पॉश और अति वीपीआई एरिया है, जहां देश के प्रधानमंत्री का आवास है, वहां पर एक ‘ठग’ का सालों-साल से ‘आवास और कार्यालय’ होना सत्ता के किले बड़े सुराख का संकेत है।

सूत्रों के अनुसार वह “1, रेस कोर्स के पास, सफदरजंग रोड” पर ‘नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र’ चलाने का दावा करता था, और इस बैनर तले कई कार्यक्रम भी आयोजित कर चुका है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि वह अपनी निजी बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रिसर्च करने का दावा भी करता था। शेरपुरिया की पैठ सिर्फ देश की सरकारों और स्थानों में ही नहीं थी बल्कि वह अपने को संयुक्त राष्ट्र-एसडीजी (UNO- SDG) का राजदूत भी लिखता रहा है।

संजय राय का वर्तमान निवास/ कार्यालय ही प्रधानमंत्री आवास के पास नहीं था बल्कि देश के नीति-निर्धारकों और सत्ता संचालन के शीर्ष पर बैठे लोगों से उसके घनिष्ठ रिश्ते थे। इस नजदीकी में उसका ‘गुजरात कनेक्शन’ काम कर रहा था। तभी तो कई उद्योगपति उसके ट्रस्ट को करोड़ों का दान देते थे, और वह गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ‘समाजसेवा’ कर रहा था।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

सूत्रों के मुताबिक वह गुजरात के जामनगर से भाजपा सांसद पूनम बेन माडम का भी करीबी है। पूनम बेन माडम गुजरात की तेजतर्रार नेता हैं। पहले वह कांग्रेस में थीं लेकिन 2012 में टिकट न मिलने के कारण कांग्रेस छोड़कर वह भाजपा में शामिल हो गईं। पहले विधायक और 2014 और 2019 में सांसद की चुनाव जीतीं।

संजय राय ‘शेरपुरिया’ को जानने के लिए पूर्वांचल के गाजीपुर की चर्चा किए बिना बात अधूरी रह जायेगी, जहां का वह मूल निवासी है। गाजीपुर के मोहम्मदाबाद तहसील का शेरपुर चर्चित गांव है। 1942 में इस गांव के आठ क्रांतिकारी शहीद हुए थे। संजय राय की वेबसाइट पर उसके जीवन और कार्यों से संबंधित कुछ अंश है। जिसे पढ़कर उसके जीवन के उतार-चढ़ाव और सफलता को समझा जा सकता है।

संजय राय का जन्म असम में हुआ था। लेकिन वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद तहसील के गांव शेरपुर का रहने वाला है। गरीब किसान परिवार में जन्म लेने वाले शेरपुरिया का पूरा नाम संजय प्रकाश राय है। उनके पिता का बालेश्वर राय है। अपने नाम में अपने गांव का नाम “शेरपुरिया” लिखने वाले संजय राय ‘शेरपुरिया’ ने गुजरात के कच्छ जिले के गांधी धाम में एक सुरक्षा गार्ड की नौकरी के साथ जीवन शुरू किया। और कड़ी मेहनत से अपने व्यापार को उच्चतम शिखर तक पहुंचाया। उन्होंने अपने जीवन में किसी भी विकट परिस्थिति में हार नहीं मानी। ईश्वर और अपने कर्मों पर भरोसा रखते हुए अथक परिश्रम किया। ऐसा उनके वेबसाइट पर लिखा गया है।

शेरपुरिया की वेबसाइट के अनुसार “ पहले नौकरी फिर व्यापार में लगातार सफलता और समृद्धि के नए प्रतिमान तय करता गया। बेरोजगारी के कारण एक दूसरे राज्य में गया नवयुवक समृद्धि पाने पर वहां खो जाने की बजाए अपने गांव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए फिर से संघर्ष कर रहा है, वह भी कम समय में। सिर्फ 50 साल की उम्र।”

एसटीएफ के अनुसार संजय राय ‘शेरपुरिया’ प्रधानमंत्री आवास के करीब रहने का दावा करता है और लोगों को ठगने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ खींची गई तस्वीरों का इस्तेमाल करता है। उस पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से फर्जी नजदीकी दर्शाकर उद्योगपतियों से दान के रूप में पैसा ऐंठने का भी आरोप है। लखनऊ के विभूति खंड पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी के अनुसार उसने एक ट्रस्ट के लिए दान के रूप में दिल्ली के एक प्रमुख उद्योगपति से 6 करोड़ रुपये अपने ट्रस्ट में लिए।

प्राथमिकी इंस्पेक्टर सचिन कुमार की शिकायत पर दर्ज की गयी थी। राय पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (बहुमूल्य सुरक्षा, वसीयत आदि की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

प्राथमिकी के अनुसार, राय ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फाउंडेशन, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रचारित किया, उसके बैंक खाते में 5 करोड़ रुपये (21 जनवरी, 2023) और 1 करोड़ रुपये (23 जनवरी, 2023) आए। बताया जाता है कि यह पैसा उद्योगपति गौरव डालमिया के फैमिली ऑफिस डालमिया फैमिली ट्रस्ट ऑफिस से मिला था। ट्रस्ट ने बताया कि डालमिया समूह ने पिछले 6-7 वर्षों में चैरिटी संगठनों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया है। जब राय ने उन्हें यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फाउंडेशन से मिलवाया था, तो उन्होंने दावा किया था कि वह औपचारिक रूप से इससे जुड़े नहीं थे।

यह कहना भी गलता होगा कि संजय राय ‘शेरपुरिया’ आम लोगों और उद्योगपतियों को अपना रसूख दिखाने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं के साथ फोटो खींचा कर फेसबुक पर डाल देता है। ऐसा नहीं है उसके कई नेताओं के साथ न सिर्फ नजदीकी संबंध हैं बल्कि पैसों का लेनदेन भी शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान संजय राय ‘शेरपुरिया’ से 25 लाख रुपये उधार लिया था। यह कोई और नहीं कह रहा है बल्कि मनोज सिन्हा ने अपने चुनावी हलफनामे में इसका जिक्र किया है।

मनोज सिन्हा 1996 और 1999 में गाजीपुर से सांसद चुने गए थे, 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी इस क्षेत्र में राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय थे। लेकिन जम्मू-कश्मीर के एलजी के रूप में नियुक्ति के बाद वह पार्टी की गतिविधियों से दूर हो गए। गौरतलब है कि मनोज सिन्हा शेरपुरिया के स्वजातीय हैं।

सिर्फ डालमिया फैमिली ट्रस्ट ऑफिस और कुछ अन्य कंपनियों ने ही यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फाउंडेशन (YREF) को पैसा दान नहीं किया बल्कि पिछले साल दिसंबर में, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से 2 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी थी। क्योंकि शेरपुरिया गाजीपुर में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत नस्ल गुणन फार्म (BMF) स्थापित कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार YREF को लिखे पत्र में, पशुपालन और डेयरी विभाग ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत 5.85 करोड़ रुपये के नस्ल गुणन फार्म (BMF) स्थापित करने के यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फाउंडेशन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसमें विभाग ने एनडीडीबी के माध्यम से अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता के रूप में 2 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति दे दी थी।

बीएमएफ पहल का उद्देश्य किसानों को गाय की उच्च आनुवंशिक योग्यता वाली बछिया उपलब्ध कराना है। योजना के तहत, केंद्र उद्यमी को मवेशी शेड के निर्माण, उपकरण, कुलीन बैल माताओं की खरीद आदि के लिए 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान (2 करोड़ रुपये तक सीमित) प्रदान करता है।

शिकायत में कहा गया है कि राय कई कंपनियों का निदेशक है, जिन्होंने बैंक भुगतानों में धोखाधड़ी की है। उसने अलग-अलग नामों के साथ-साथ डमी कंपनियों के तहत कई फर्जी आईडी बनाई और अपने भरोसेमंद लोगों को इन कंपनियों में निदेशक के रूप में रखा।

शिकायत में कहा गया है कि “उनका प्राथमिक काम उन्हें (उनके कथित पीड़ितों) को यह बताकर पैसा इकट्ठा करना है कि वह सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों का नजदीकी है।” शिकायत में कहा गया है, “वह मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला और टैक्स चोरी में भी शामिल है।”

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राय प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करते थे और इन पोस्ट का इस्तेमाल कर भौतिक लाभ कमाते थे।

संजय राय के कथित सहयोगी काशिफ अहमद को एक सप्ताह पहले गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ के एक अधिकारी ने कहा कि दोनों व्यक्ति एक-दूसरे को जानते थे और कथित तौर पर सरकारी नौकरी और टेंडर पास कराने का वादा कर लोगों से ठगी की।

यूपी एसटीएफ ने काशिफ के खिलाफ यह कहते हुए प्राथमिकी दर्ज की कि वह दो साल से अधिक समय से भ्रामक सामग्री पोस्ट कर रहा था और “प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा खराब हो रही है।”

इस बीच, अहमदाबाद में, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने गुरुवार को समाचार पत्रों में एक नोटिस छपवाया जिसमें “संजयप्रकाश बालेश्वर राय” को “विलफुल डिफॉल्टर” घोषित किया गया। इसने अहमदाबाद में स्थित “कांडला एनर्जी एंड केमिकल्स लिमिटेड” के “प्रबंध निदेशक” के रूप में राय की पहचान की। इसने कंपनी के दो अन्य अधिकारियों को सूचीबद्ध किया, जिनका कुल बकाया 349.12 करोड़ रुपये से अधिक था। इसने गुड़गांव में राय के पते को “कैट्रिओना एंबियंस आइलैंड, एंबियंस मॉल के पास” के रूप में सूचीबद्ध किया।

संजय राय ‘शेरपुरिया’ के गिरफ्तार होने के बाद गाजीपुर भाजपा के अध्यक्ष शेरपुरिया को पहचानने से इंकार कर रहे हैं। लेकिन जब भी वह बनारस और गाजीपुर जाता था तो भाजपा के बड़े-बड़े नेता उसके पास मंडराते थे। बनारस के भाजपा नेता उसे केंद्रीय सत्ता का नजदीकी समझते थे। यह कहा जा रहा है कि शेरपुरिया का केंद्र सरकार के कुछ शीर्ष लोगों से बहुत नजदीकी थी। उसकी गिरफ्तारी से सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा और यूपी सरकार के शीर्ष लोग जानते हैं कि शेरपुरिया का संबंध किससे है। और उसकी गिरफ्तारी से सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में कौन होगा?

प्रदीप सिंह https://www.janchowk.com

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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