Saturday, October 1, 2022

प्रयागराज: जब एक पिता को कंधे पर बेटे की लाश को लेकर तय करना पड़ा 35 किमी का सफर

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प्रयागराज। एक भूमिहीन कृषि मज़दूर के दस वर्षीय बेटे (जिसके परिवार का राशन कार्ड भी नहीं बना) शुभम ने जब सुना कि गांव के मंदिर में सावन का भंडारा है तो वो बहुत खुश हुआ कि आज भर पेट भोजन मिलेगा। पूड़ी, सब्जी, हलवा खाकर उसके नन्हें से पेट की अतृप्त क्षुधा को तृप्ति मिलेगी। सोमवार 1 अगस्त को शुभम स्कूल से लौटा तो बस्ता रखकर सीधे गांव स्थित मंदिर चला गया भंडारा खाने, उसे इस बात का तनिक भी एहसास नहीं था कि वो खुद भंडारा खाने नहीं बल्कि मौत का ग्रास बनने जा रहा है। सोमरहा उपरहार गांव के जिस मंदिर में भंडारा चल रहा था उस मंदिर के ठीक बग़ल में एक बिजली का खम्भा खड़ा था। और उसके बग़ल में ही कुछ दूरी पर उसके सपोर्ट में लगा तार गड़ा था।

जिसमें करंट उतर रहा था। अंजाने में शुभम का पांव उस तार पर पड़ गया और करंट की चपेट में आकर वो बहुत बुरी तरह से झुलस गया। लोग आनन-फानन में उसे नजदीक के अस्पताल ले गये जहां डॉक्टर ने बताया कि शुभम की मौत हो चुकी है। इतना सुनते ही पिता बजंरगी यादव बेसुध होकर सड़क पर गिर गए। माथे में गिट्टी धँस गई। घटना 1 अगस्त सोमवार की है। ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर बिजली विभाग की जानलेवा लापरवाही का विरोध किया। और थाने में लाइनमैन और जेई के ख़िलाफ़ जानलेवा लापरवाही की तहरीर दी।

मंदिर जहां भंडारा खाने गया था शुभम।

एक परिवार ने अपना बेटा खो दिया। माता पिता सब अथाह पीड़ा में डूब गये। लेकिन उनके साथ सरकार और प्रशासन की अमानवीय हद तो अभी बाक़ी थी। घटना के अगले दिन यानि मंगलवार को शुभम के शव का इलाहाबाद के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के मोर्चरी में पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम के बाद बेटे का शव पिता को सौंपकर यूपी पुलिस का सिपाही भी चलता बना। स्वरूप रानी अस्पताल से पीड़ित परिवार का गाँव सोमरहा उपरहार की दूरी 30-35 किलोमीटर है। और माता पिता के पास उस वक्त फूटी कौड़ी नहीं थी। निजी एंबुलेंस शव गांव तक पहुंचाने के 2200 रुपये मांग रहे थे। बेबस पिता ने बेटे का शव कंधे पर लादा और पैदल ही अपने गांव की ओर चल पड़ा।

इस अमानवीय पीड़ादायी सफ़र में पीछे-पीछे मां सविता यादव भी चल रही थी। इस ग़म और पीड़ा से भरे सफ़र के दौरान वो एसआरएन अस्पताल से मेडिकल चौराहा, बैरहना चौराहा, नया यमुना पुल, नैनी के लेप्रोसी चौराहे से गुज़रा जहां लाल बत्ती पार करने वाले वाहनों के नंबर प्लेट पर दर्ज़ नंबर पढ़ने के लिये कैमरे लगे हैं। लेकिन अफ़सोस कि इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के कैमरे से भी सरकार और प्रशासन पीड़ित पिता और उसके कंधे पर लदे बेटे की लाश नहीं देख पाये। गांव के ही एक बुजुर्ग कहते हैं सरकार के लिये ये शर्म की बात होनी चाहिये कि वो एक पिता को उसके बेटे की लाश घर तक छोड़ने के लिये एक अदद वाहन तक नहीं मुहैया करवा सकी। मोर्चरी से शव को पीड़ित परिवार के घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार को निभानी चाहिये और इसके लिये व्यवस्था करना चाहिये।

पिता बजरंगी यादव और मां सविता।

पीड़ित परिवार के प्रति सिर्फ़ सरकार के स्तर पर असंवेदनशीलता दिखाई गई हो ऐसा नहीं है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी बेहद असंवेदनशील और क्रूर व्यवहार दिखाया गया। पीड़ित परिवार से मिलने उसके गांव पहुंचे एक दूसरे गांव के रोज़गार सेवक बी एन मिश्रा बताते हैं कि ग्राम पंचायत की ओर से ग्राम प्रधान द्वारा ग़रीब परिवारों को अंत्येष्टि के लिये कुछ आर्थिक मदद दी जाती है। जो कि पीड़ित परिवार को नहीं दी गई। निर्मला देवी विश्वकर्मा पत्नी शीतला प्रसाद सोमरहा उपरहार ग्रामसभा की ग्राम प्रधान हैं। बजरंगी यादव ने भी इस बात की पुष्टि कि उन्हें बेटे की अंत्येष्टि के लिये ग्रामसभा द्वारा कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई।  

सरकार की बेशर्मी, बेदर्दी, उदासीनता की पर्देदारी के लिये जांच कमेटी

बेटे की लाश कंधे पर लादे पैदल गांव जाते बजरंगी यादव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो सरकार को थोड़ी शर्म आई या जाने 5 साल बाद चुनाव में जाने की सुध आई। सो खानापूर्ति के लिये एक जांच कमेटी गठित की गई। मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। डीएम द्वारा मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, तथा एसडीएम करछना की कमेटी ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी। जांच रिपोर्ट में पहले से निलंबित इंस्पेक्टर व सिपाही पर कार्रवाई की संस्तुति की है। डीएम संजय खत्री ने कहा है कि मामले में इंस्पेक्टर टीकाराम वर्मा और सिपाही विजय भारद्वाज की लापरवाही सामने आई है। बच्चे की मौत के बाद ही ग्रामीणों ने और परिजनों ने विरोध दर्ज कराया था लेकिन इंस्पेक्टर ने ठीक से पर्यवेक्षण नहीं किया। वहीं सिपाही पोस्टमार्टम के बाद शव छोड़कर चला गया।

वहीं पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक विद्याभूषण ने लापरवाही का दोषी पाते हुये मुख्य अभियंता विनोद कुमार गंगवार और अधीक्षण अभियंता प्रशांत सिंह को चार्जशीट ज़ारी की है। जबकि अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार, एसडीओ अमित गुप्ता, और अवर अभियंता आशीष को निलंबित करने का आदेश दिया है।

करंट से बेटे की मौत के बाद भी अब तक पुलिस ने पीड़ित परिवार की एफआईआर नहीं दर्ज़ की। गौरतलब है कि बजरंगी यादव ने जेई व लाइनमैन के ख़िलाफ़ लापरवाही बरतने के लिये एफआईआर दर्ज़ करवाने के लिये तहरीर दिया था।   

भूमिहीन मजदूर लेकिन न राशन कार्ड, न शौचालय और न उज्ज्वला गैस

तब से एक सप्ताह बीत गये पिता बजंरगी यादव व मां सविता यादव के आंसू रुकने के नाम नहीं ले रहे। बजरंगी छाती पीटते हुये बिलखते हैं- हाय मेरा सहारा चला गया। सोचा था दो साल में बेटा भी हाथ बँटाने लायक हो जाएगा। तो घर में दो मजदूरी आएगी, सबको पेट भर खाना मिलेगा। पर मेरी फूटी क़िस्मत ने दगा दे दिया। बजंरगी यादव बिलखते हुये आगे अपनी ग़रीबी और सरकार व प्रशासन की अकर्मण्यता का रोना रोते हुये बताते हैं कि पूरे 3 साल दौड़ा की राशन कार्ड बन जाये नहीं, बना।

शौचालय के लिये आवेदन किया, नहीं मिला। उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिये आवेदन किया, नहीं मिला, आधार कार्ड न होने से बड़ी बेटी रेखा का गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय सोमरहा उपरहार में दाखिला नहीं मिला। अब सब लिये दौड़े आ रहे हैं। कल स्कूल की शिक्षिका आई बोली बच्ची को स्कूल भेजिये। अब खुद राशन कार्ड बना रहे हैं। ये बयान है हाल ही में अपने जिगर का टुकड़ा खोने वाले बजरंगी यादव का।

बता दें कि इलाहाबाद के करछना तहसील के सोमरहा उपरहार गांव के एक कृषि मजदूर बजरंगी यादव और सविता यादव ने पिछले 3 साल में राशन कार्ड के लिए 3 बार आवेदन किया लेकिन उनका राशन कॉर्ड नहीं बना। जिसके चलते कृषि मजदूर दम्पति समेत 5 बच्चों के परिवार में खाने पीने की बहुत दिक्कत रहती है। बजरंगी यादव के परिवार में जीवन संगिनी सविता यादव के अलावा चार बच्चे रेखा (12 वर्ष), ऋतु (8 वर्ष) प्रीति (6वर्ष) और विपिन (3.5 वर्ष) हैं। जबकि एक बेटे शुभम (10 वर्ष) की करंट लगने से मौत हो चुकी है। बजरंगी भूमिहीन कृषि मज़दूर हैं।

और उनके पास सम्पत्ति के नाम पर 4 कमरों का एक पक्का मकान है। जो कि उनकी दिवंगत मां चिरौंजी देवी को मिली कॉलोनी के पैसे और कुछ पैसे मिलाकर बनवाया गया था। इसके अलावा उनके पास एक एक भैंस और एक पंड़िया है। बजरंगी दूसरे के खेतों में काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। बेहद ग़रीब होने के बावजूद परिवार को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है।  

मरहूम शुभम की मां सविता यादव बेटे के ग़म में बिलखते हुये कहती हैं कितना महंगा सौदा है। बेटे की जान की क़ीमत पर हमें राशन कार्ड, उज्ज्वला गैस सिलेंडर, शौचालय दिया जा रहा है। बेटी का स्कूल में दाख़िला दिलाने की बात हो रही है। पीड़ित बजरंगी यादव बताते हैं कि पिछले 3 साल में 3 बार राशन कार्ड के लिये आवेदन कर चुका हूं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। दो साल पहले गांव में ही कैम्प लगाकर ऑनलाइन फॉर्म भरवाया गया था। लेकिन नहीं बना।

इसके बाद उन्होंने डीहा गांव स्थित एक सहज जन सेवा केंद्र से दोबारा आवेदन किया था फिर भी राशन कार्ड नहीं बना। अभी हाल ही में पिछले महीने तीसरी बार उन्होंने राशन कार्ड के लिये ऑनलाइन आवेदन किया है। यही हाल उज्ज्वला गैस योजना में हुआ। 2 साल पहले बजरंगी यादव की मां चिरौजी देवी का नाम उज्ज्वला गैस योजना में आया था लेकिन आधार कार्ड और सूची में नाम में अंतर होने के चलते वापस लौट गया। बजरंगी ने दोबारा आवेदन किया लेकिन फिर नहीं मिला। इसी तरह शौचालय के लिये कई बार आवेदन किया लेकिन नहीं मिला।

(प्रयागराज से जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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