आखिर ये तस्वीरें क्या कहती हैं? क्या माना जाए कि देश में शुरू हो गया है हिटलर के गेस्टापो का दौर

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नई दिल्ली। नागरिकता अधिनियम के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली में हुए जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर घूम रही हैं जिन्हें देखकर कोई भी भौचक रह सकता है। एक तस्वीर में पुलिस कुछ छात्राओं को घेर कर उनकी पिटाई कर रही है उसी में एक और शख्स मौजूद है जिसने कोई खाकी वर्दी नहीं पहनी हुई है। और उसने अपने सिर में हेलमेट लगा रखा है साथ ही वह एक कपड़े से अपने पूरे चेहरे को ढंका हुआ है। यह शख्स कौन है? भला यह कैसे पुलिस के साथ छात्र-छात्राओं की पिटाई कर सकता है? और सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पुलिस किसी गैर खाकीधारी को इसकी कैसे इजाजत दे सकती है?

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क्या यह कोई आरएसएस का सदस्य है? या फिर इसका विद्यार्थी परिषद से कोई रिश्ता है? या फिर मान लिया जाए कि देश में हिटलर के गेस्टापो का दौर शुरू हो गया है? और अगर ऐसा कुछ है तो फिर देश में सिर्फ नागरिकता लोगों से नहीं छीनी जा रही है बल्कि संविधान, अदालत और पूरी व्यवस्था की कब्र पर एक ऐसे अराजक और फासीवादी निजाम को खड़ा किया जा रहा है जिसकी भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलेगी।

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इसी तरह की एक दूसरी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर आयी है। जिसमें एक बस खड़ी है जिसके टूटे शीशे सड़क पर बिखरे हुए हैं। और उसी के पास दो पुलिसकर्मी मौजूद हैं। एक पुलिसकर्मी गैलन में कुछ लेकर जा रहा है। जबकि एक दूसरा पुलिस कर्मी एक शख्स द्वारा गैलन के जरिये बस के भीतर कुछ डालने में उसकी मदद कर रहा है। और उसी के पास से दो युवा इस हरकत को देखते हुए जा रहे हैं। आज दिल्ली में बताया जा रहा है कि तीन बसें आग के हवाले कर दी गयीं। हालांकि उसका दोष आंदोलनकारियों के मत्थे ही मढ़ा जा रहा है। लेकिन सामने आय़ी यह तस्वीर बहुत कुछ कहती है। यह बताती है कि किस तरह से एक शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस-प्रशासन हिंसक बनाने पर तुला हुआ है। साथ ही इसके जरिये पूरे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है।

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दिल्ली के डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया ने भी बीजेपी पर पुलिस के जरिये बसों में आग लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग भी की है। उन्होंने इससे संबंधित फोटो पर ट्विटर पर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि “इस बात की तुरंत निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए कि बसों में आग लगने से पहले ये वर्दी वाले लोग बसों में पीले और सफ़ेद रंग वाली केन से क्या डाल रहे है.. ? और ये किसके इशारे पर किया गया? फ़ोटो में साफ़ दिख रहा है कि बीजेपी ने घटिया राजनीति करते हुए पुलिस से ये आग लगवाई है।”

दरअसल नागरिकता कानून के खिलाफ खड़े हुए राष्ट्रव्यापी विरोध से सरकार बेहद परेशान हो गयी है। असम में भड़की आग ने उसे राजनीतिक तौर पर बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। और देश के बाकी हिस्सों में भी अब उसके बढ़ने की शुरुआत हो गयी है। ऐसे में बताया जा रहा है कि सरकार की कोशिश इस आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की है। उसकी कोशिश है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम तबके के लोगों को इसमें आगे रखा जाए जिससे हिंदू जनमत का ध्रुवीकरण कराया जा सके।

सूत्रों की मानें तो केंद्रीय गृहमंत्रालय ने अपने नेटवर्क के जरिये मुस्लिम तबके के बीच के असामाजिक तत्वों को सक्रिय कर दिया है। और उनसे कहा जा रहा है कि वह ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम लोगों को इसमें उतारें।

आज पीएम का झारखंड में दिया गया भाषण भी कुछ इसी तरफ इशारा करता है। जिसमें वह कांग्रेस और एक खास तबके की ओर बार-बार इशारा करते दिखे।

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