Saturday, February 4, 2023

ठहर गया भारत! मजदूरों की हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त, जगह-जगह प्रदर्शन और गिरफ्तारियां

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नई दिल्ली। मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल बेहद सफल मानी जा रही है। औद्योगिक मजदूरों, किसानों, ग्रामीण कामगारों और बैंककर्मियों से लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर इसमें हिस्सेदारी की। खास कर पब्लिक सेक्टर में हडताल पूरी तरह से कामयाब रही। इसमें स्टील, कोयला, खदान, रक्षा उत्पादन, बंदरगाह से लेकर प्राकृतिक गैस, टेलीकाम और बिजली क्षेत्र से जुड़े मजदूरों और कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही।

इसके साथ ही निजी क्षेत्र में भी इसका अच्छा खासा असर देखा गया। इंजीनियरिंग, आटोमोबाइल, टेलीकाम, टेक्सटाइल औऱ गारमेंट समेत तमाम ऐसे क्षेत्र थे जिसमें काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में हड़ताल बेहद कामयाब रही। बताया जा रहा है कि तकरीबन 480 जिलों में जगह-जगह सड़कों पर जाम लगाए जाने की रिपोर्टें आयी हैं। इसमें लाखों की तादाद में किसानों और ग्रामीण मजूदरों ने शिरकत की है। आप को बता दें कि हड़ताल में किसानों के 175 से ज्यादा संगठनों ने हिस्सा लिया। एआईकेएससीसी के बैनर तले जुटे इन संगठनों के नेताओं का दावा है कि ग्रामीण इलाकों में हड़ताल पूरी तरह से सफल रही है।

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इसके अलावा तकरीबन 60 विश्वविद्यालयों के छात्रों ने इसमें सीधे हिस्सेदारी की। दिल्ली विश्वविद्यालय में हजारों की संख्या में छात्रों ने परिसर में इकट्ठा होकर जेएनयू के पक्ष में खड़ा होने के साथ ही इस हड़ताल का भी समर्थन किया।

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डीयू में छात्रों का जमावड़ा।

हड़ताल में यातायात सेवा सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। जगह-जगह ट्रेनों के रोके जाने की रिपोर्ट आय़ी हैं। इसके अलावा सड़क यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

दिलचस्प बात यह है कि हड़ताली ट्रेड यूनियनों ने सीएए और एनआरसी को भी इससे जोड़ दिया था। जिसके चलते हड़ताल का दायरा बढ़ गया था। नतीजतन समाज के तमाम दूसरे हिस्सों की भी इसमें भागीदारी हो गयी थी।

महाराष्ट्र में भी हड़ताल बेहद सफल रही। सुबह ही आशा वर्कर और बैंक यूनियनों के लोग मुंबई के आजाद मैदान में जुट गए थे। यूनियन के नेता एमए पाटिल ने कहा कि हम यहां अपने अधिकारों को लेने के लिए आए हैं। आशा और आंगनवाड़ी की वर्कर देश के पैमाने पर मजदूरों के आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।

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बताया जा रहा है कि यहां निजी बैंकों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में हिस्सेदारी की। बैंकर और यूनियन के नेता विश्वास उटागी ने कहा कि पिछले चार सालों के दौरान बैंक के कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान हुए हैं। यही वजह है कि देश के पैमाने पर बैंककर्मियों में गुस्सा है। इस मौके पर रेलवे कर्मचारी भी अच्छी खासी तादाद में जुटे थे।

बिहार के पटना में सुबह से वामपंथी दलों के मजदूर संगठनों से लेकर उनके छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया। इसमें आशा वर्करों की भागीदारी बेहद उल्लेखनीय थी। हड़तालियों ने कई ट्रेनों और बसों को रोकने की कोशिश की। इसके चलते सड़क और रेल यातायात बुरी तरीके से प्रभावित हुई।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दरभंगा, पटना, गया, जहानाबाद, मुजफ्फरपुर और आरा के रास्ते से गुजरने वाली ढेर सारी ट्रेनें बुरी तरीके से प्रभावित हुई हैं। हजारों की संख्या में लोगों ने नारा लगाते हुए डाक बंगला चौराहे को जाम कर दिया। हालांकि बाद में उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। और तकरीबन एक दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया गया।

इसके अलावा ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने एनएच 107, एनएच 31 और एनएच 57 तथा एनएच 104 पर जगह-जगह जाम लगा दिया था। इसके चलते नवादा, अरवल, औरंगाबाद जिले का सड़क यातायात बुरी तरह से प्रभावित रहा।

दिल्ली एनसीआर में भी हड़ताल का अच्छा खासा असर देखा गया। खासकर नोएडा और साहिबाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में छोटे और मध्यम दर्जे की इकाइयां हड़ताल से बुरी तरह प्रभावित रहीं। इसके अलावा वजीरपुर, नरेला,बवाना जहांगीरपुरी, दिल्ली के पटपड़गंज औऱ शाहदरा में भी मजदूरों ने मार्च निकालकर हड़ताल के पक्ष में अपना समर्थन जाहिर किया।

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गुरुग्राम-मानेसर और बावल इंडस्ट्रियल इलाके में सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने जुलूस निकाला और मोदी सरकार की जनविरोधी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इन कार्यक्रमों में ठेके पर काम करने वाले मजदूरों की सबसे ज्यादा भागीदारी रही।

इसके साथ ही आईटीओ पर हजारों की तादाद में मजदूरों और कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर जुलूस निकाला और बाद में यही जुलूस शहीदी पार्क में जाकर सभा में तब्दील हो गया। जिसमें मोदी सरकार को अपनी इन जन विरोधी नीतियों से बाज आने की चेतावनी दी गयी।

गुजरात में भी आज हड़ताल रही। खासकर विभिन्न बैंकों से जुड़े 40 हजार बैंक कर्मियों ने इसमें सीधे भागीदारी की। इसके अलावा रेलवे और इनकम टैक्स के कर्मचारियों ने भी इसमें हिस्सा लिया। गुजरात मजदूर संघ, गुजरात फेडरेशन आफ ट्रेड यूनियन, मजदूर अधिकार अभियान ने मिलकर जगह-जगह प्रदर्शन किया और उसके कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाले।

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हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और केरल में रहा। पश्चिम बंगाल में कुछ जगहों पर झड़पें भी हुई हैं। और यहां तकरीबन 56 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

इसके अलावा केरल में भी हड़ताल पूरी तरह से कामयाब रही। यहां सरकार का समर्थन हासिल होने के चलते पूरी बंदी जैसी दिखी।

छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, भूमि और वन अधिकार आंदोलन तथा जन एकता जन अधिकार आंदोलन सहित अनेक साझे मंचों से जुड़े देश के सैकड़ों  संगठनों ने मिलकर जगह-जगह प्रदर्शन किए और जुलूस निकाले। धमतरी में लगभग 1000 मजदूरों और आदिवासी किसानों ने अपनी गिरफ्तारियां दर्ज कराई। किसान संगठनों ने दावा किया कि उनके आह्वान पर जहां 1000 से ज्यादा गांवों के किसान सड़कों पर उतरे हैं, वहीं गांवबंदी से 2000 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं। अधिकांश स्थानों पर किसानों ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के साथ मिलकर प्रदर्शन किए हैं।

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छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष संजय पराते और किसान संगठनों के साझे मोर्चे से जुड़े विजय भाई ने  जानकारी दी कि आज की हड़ताल में प्रदेश में सबसे बड़ी कार्रवाई धमतरी में हुई, जहां असंगठित क्षेत्र से जुड़े मजदूरों के साथ सैकड़ों आदिवासियों और किसानों ने अपनी गिरफ्तारियां दी।

इसके अलावा राजनांदगांव, अभनपुर, अम्बिकापुर, रायगढ़ में भी विशाल मजदूर-किसान रैलियां निकाली गईं और उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन दिया। दुर्ग में सैकड़ों किसानों ने गांधी प्रतिमा पर छग प्रगतिशील किसान संगठन के आईके वर्मा और राजकुमार गुप्ता के नेतृत्व में धरना दिया। रायपुर जिले के अभनपुर में  क्रांतिकारी किसान सभा के तेजराम विद्रोही और सौरा यादव के नेतृत्व में धरना दिया गया। रायपुर के तिल्दा ब्लॉक में बंगोली धान खरीदी केंद्र पर, सरगुजा जिले के सखौली और लुण्ड्रा जनपद कार्यालय पर, सूरजपुर जिले के कल्याणपुर और पलमा में, कोरबा में कलेक्टरेट पर, चांपा में एसडीएम कार्यालय पर, महासमुंद में, रायगढ़ के सरिया में  भी विशाल किसान धरने आयोजित किये गए। इसके अलावा आरंग सहित दसियों जगहों पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए हैं।

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हिमाचल में प्रदर्शन।

यूपी में भी जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने जुलूस निकाल कर हड़ताल में हिस्सेदारी की। सोनभद्र में मजदूर किसान मंच, ठेका मजदूर यूनियन व पटरी दुकानदार एसोसिएशन ने अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन पूरे जिले में कार्यक्रम हुआ। इसके अलावा ओबरा स्थित नगर पंचायत के सामने मजदूरों ने प्रदर्शन किया।

इस मौके पर संगठन के नेता दिनकर कपूर ने कहा कि हिन्दुत्व और कारपोरेट गठजोड़ की तानाशाही को लोकतंत्र परास्त करेगा। इसी तानाशाही को स्थापित करने में लगी आरएसएस-भाजपा की सरकार विश्व ख्याति प्राप्त जेएनयू पर हमले करा रही है। सच्चे अम्बेडकरवादी पूर्व आईजी एसआर दारापुरी की गिफ्तारी करवा रही है और चैतरफा दमन और आतंक का राज कायम कर रही है।

यूपी के बदायूं में भी अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में संविधान रक्षक सभा के बदायूं बंद के ऐलान को व्यापक समर्थन मिला। बदायूं बंद का मिला जुला असर रहा।  ककराला कस्बा पूरी तरह बंद रहा।  सहसवान में सफल बंद रहा। बदायूँ शहर व अन्य कस्बों में भी बंद का असर देखा गया। संविधान रक्षक सभा के अध्यक्ष हाजी मुमताज मियां सकलैनी व उपाध्यक्ष अजीत सिंह यादव ने बदायूँ बंद की अपील की थी।

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