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1984 नहीं दोहराने देंगे, अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के विरुद्ध क्यों नहीं दर्ज हुई एफआईआरः दिल्ली हाई कोर्ट

देश की राजधानी में पिछले तीन दिनों से जारी हिंसा पर दिल्‍ली हाईकोर्ट ने बेहद तल्‍ख टिप्‍पणी की है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि दिल्‍ली हाईकोर्ट के रहते हुए 1984 के दंगे की घटना को दोहराने नहीं दिया जाएगा। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर भड़काऊ भाषण देने पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी तो ऐसे भाषण बढ़ते ही जाएंगे। हाई कोर्ट ने पूछा, 15 दिसंबर से 26 फरवरी आ गई और अभी तक अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के विरुद्ध कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? हाई कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वो दिल्ली पुलिस कमिशनर को हमारी नाराजगी के बारे में बता दें।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि पुलिस को आखिर कितनी मौतों और नुकसान का इंतजार है। जनता की सुरक्षा पुलिस की ड्यूटी है। हाईकोर्ट में इस मामले पर पांच घंटे के अंदर तीन बार सुनवाई हुई। दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए भड़काऊ बयान देने वाले बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वह भड़काऊ भाषण देने के आरोप में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्‍य के उच्‍च पदस्‍थ पदाधिकारियों को हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाकात करनी चाहिए। जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि अब समय आ गया है जब आम नागरिकों को भी ‘Z श्रेणी’ जैसी सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने आईबी के अधिकारी की मौत की बात पर चिंता जताते हुए कहा कि हमने सुना है कि आईबी के ऑफिसर पर भी हमला हुआ है, इसे तुरंत देखने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि यह समय सबको यह बताने का है कि सरकार सभी को जेड प्लस सुरक्षा देने के लिए भी तत्पर है। जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि बहुत, बहुत ज़्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सरकार को विश्वास बहाली के कदम उठाने चाहिए। ये डर कि लोग अपने घर नहीं लौट सकते, खत्म होना चाहिए। सरकारी और प्रशासनिक मशीनरी को हर पीड़ित से संपर्क करना चाहिए।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कोर्ट में भरोसा जताया कि हमारी तरफ से हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। दिल्ली सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि हमें भरोसा है कि कोई स्कीम होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि हिंसा को लेकर एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जा सकता है, जिससे पीड़तों को तुरंत सुविधा मुहैया कराई जा सके।  

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या हेल्प लाइन से हम मुसीबत में फंसे लोगों की मदद कर सकते हैं? क्या इसके लिए 112 हेल्पलाइन को इस्तेमाल कर सकते है, जहां पर लोग फ़ोन कर सकें? इससे पहले, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्‍तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के विरोधियों और समर्थकों के बीच हुई हिंसा के मामले पर कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली पुलिस के अफसर के बयान पर तल्ख टिप्पणी की।

कोर्ट ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के विवादित बयान का वीडियो क्लिप भी चलवाया। साथ ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि आप भी वीडियो देखिए और दिल्‍ली के पुलिस कमिश्‍नर से पूछिए कि इस मामले में एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए या नहीं।

पुलिस ने कहा था कि उन्होंने कपिल मिश्रा का वीडियो नहीं देखा। इस पर कोर्ट ने विडियो में पुलिस वालों के बगल में खड़े होने पर भी सवाल उठाए और फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के वायरल विडियो में उनके साथ दिखाई दे रहे ऑफिसर का नाम भी पूछा है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के अफसर से पूछा कि हम यह कैसे माने लें कि आपने ये वीडियो नहीं देखा है।

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस आयुक्त का प्रतिनिधित्व करने के मुद्दे पर सॉलिसीटर जनरल और दिल्ली सरकार के अधिवक्ता के बीच तीखी बहस हुई। हाईकोर्ट में इस मामले पर पांच घंटे के अंदर तीन बार सुनवाई हुई। इस मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी।

तीसरी सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य दोनों की इकाइयों को पीड़ितों और उनके परिवार से निजी रूप से मिलने के लिए कहा। हाईकोर्ट ने कहा कि समय आ गया है कि लोगों में विश्वास पैदा किया जाए। जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा कि समय आ गया है कि हम लोगों को बताएं कि जेड सिक्योरिटी सबके लिए है। जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा कि हम अपनी आंख के सामने शहर में दूसरा 1984 नहीं होने दे सकते।

हाईकोर्ट ने जुबेदा बेगम को एमिकस नियुक्त किया है। उन्हें दिल्ली सरकार एक नंबर मुहैया कराएगी जिससे लोगों को मदद मिल सके। जुबेदा बेगम अदालत की नोडल अफसर होंगी। वो पीड़ितों के साथ समन्वय करेंगी और सुनिश्चित करेंगी कि अदालत के आदेशों का पालन हो। उन्हें गृहमंत्रालय से भी जरूरी सहायता मिलेगी।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि यह दिखाता है कि अगर प्रशासन कार्रवाई करना चाहे तो बहुत कुछ हो सकता है। यह वास्तविक प्रदर्शन है कि कैसे पुलिस अधिकारी एक्शन लेने के लिए ऑर्डर आने का इंतजार करते हैं। वो विचार कर रही है कि कैसे जब शख्स जो परेशानी में है पुलिस को कॉल करता है तो उसे तुरंत रिस्पॉन्स मिले और मदद उस तक पहुंचे। इस पर राहुल मेहरा ने सरकारी अस्पतालों में हेल्प डेस्क बनाने के लिए कहा।

हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें लगातार लोगों को उसी तरह जवाब देना होगा जैसा उन्होंने इस अदालत के आधी रात के आदेश के बाद किया। इसके साथ ही पुलिस को लोगों को हर सुविधा मुहैया कराने को कहा जिससे उन्हें परिजनों के शव मिलने में आसानी हो और अंतिम संस्कार के वक्त सुरक्षा भी दी जाए। हाईकोर्ट ने सभी जिलों के कानूनी सेवा केंद्रों पर 24 गुणा 7 की हेल्प डेस्क बनाने के भी निर्देश दिए। हाईकोर्ट इस मामले पर एक रात्रि मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का सोच रही है ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।

बेघर लोगों को उचित शेल्टर मिले इसे भी दिल्ली सरकार ही सुनिश्चित करेगी। उन्हें जरूरी चीजें, कंबल, साफ पानी और शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी। वक्त की मांग है कि लोगों का भरोसा जीता जाए। हेल्प लाइन नंबरों का भी अच्छे से प्रचार करने को कहा गया है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को करेगा।

तीसरी सुनवाई में सॉलिसीटर जनरल (एसजी) ने अदालत को बताया कि जहां तक दूसरी और तीसरी क्लिप की बात है तो उनका अब भी परीक्षण चल रहा है। हमें सभी तरफ से सबूत मिले हैं। एसजी ने कहा कि जहां तक कपिल मिश्रा की क्लिप की बात है तो इसमें जो सामग्री है उसका हिंसा की घटनाओं से सीधा कोई संबंध नहीं है। जहां तक बात एफआईआर की है तो यह गंभीर मामला है और हमें इसके लिए समय चाहिए ताकि सभी सामग्रियों को देखा जा सके। हमें समझना होगा कि यह संवेदनशील मामला है।

इस पर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि कानून के अनुसार पुलिस अधिकारियों को मुझे रिपोर्ट करना चाहिए। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। राहुल मेहरा ने कहा कि मैंने कई बार पुलिस कमिश्नर को कोर्ट रूम में कहा है कि मैं अदालत के एक अधिकारी की तरह बर्ताव करूंगा। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को तभी रिकॉर्ड में रखा जा सकता है, जब यह मेरे दफ्तर से भेजा जाए। मुझे कोई कारण नहीं दिखाई देता एफआईआर रजिस्टर न होने का। यह हर किसी के खिलाफ दायर हो सकता है। अगर वह गलत साबित हों तो उसे रद्द भी किया जा सकता है। एसजी ने हाईकोर्ट में एक आवेदन डाला कि भारत सरकार को भी इस याचिका में अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

इसके पहले दूसरी सुनवाई में जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि परिस्थिति बहुत ही खराब है। हम सब ने वो वीडियो देखे हैं जिसमें कई नेता घृणास्पद भाषण दे रहे हैं। यह सभी न्यूज चैनलों पर देखा गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सभी वकीलों और डीसीपी देव और सॉलिसिटर तुषार मेहता की उपस्थिति में भाजपा नेता कपिल मिश्रा का वो वीडियो चलाया। इसके बाद जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि हम पुलिस के रवैये से हैरान हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने एसजी को भी निर्देश दिया कि वो दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सलाह दें कि भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।

इसके पहले पहली सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को हिंसा के मामलों में अदालत के निर्देश की जरूरत नहीं होती है और उसे स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यह बेहद जरूरी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 26, 2020 6:46 pm

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