Sunday, October 17, 2021

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एस बैंक भी डूब के कगार पर, आरबीआई ने लगायी 50 हजार से ऊपर की राशि निकालने पर पाबंदी

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मुंबई। एक और बैंक डूबने के कगार पर पहुंच गया है। कल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एस बैंक के खाताधारकों पर 50 हजार रुपये से ऊपर की राशि निकालने पर पाबंदी लगा दी। बैंक का कहना है कि यह पाबंदी एक महीने तक लागू रहेगी। आरबीआई का कहना है कि उसने एस बैंक के लिए एक रिस्ट्रक्चरिंग प्लान तैयार किया है।

साथ ही उसने बैंक के ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनके हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे जाएंगे और उन्हें कोई संकट नहीं आने जा रहा है। यह पहला मौका है जब जुलाई 2004 के बाद आरबीआई ने इस तरह के किसी बड़े बैंक में सीधा हस्तक्षेप किया है। इसके साथ ही आरबीआई ने बैंक के प्रबंधन में भी फेरबदल की है। उसने स्टेट बैंक आफ इंडिया के पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत कुमार को एस बैंक का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है।

जमाकर्ता अब बैंक से केवल 50 हजार रुपये ही निकाल सकेंगे। यहां तक कि अगर बैंक में उनके कई खाते हैं तब भी यही राशि होगी। हालांकि मेडिकल इमरजेंसी, उच्च शिक्षा या फिर शादी जैसी इस तरह की दूसरी आपातकालीन परिस्थितियों के लिए छूट दी गयी है। लेकिन उसकी भी राशि की सीमा 5 लाख रुपये ही है। 

बताया जा रहा है कि एस बैंक की वित्तीय स्थिति में लगातार गिरावट जारी थी। ऐसा बाजार से पूंजी न जुटा पाने, लोन संबंधी समस्याओें को हल न कर पाने और प्रशासनिक अक्षमताओं के चलते हो रहा था। गवर्नेंस की तमाम समस्याओं ने उसे घेर लिया था।

बैंक प्रबंधन ने रिजर्व बैंक को इस बात का संकेत दिया था कि बैंक में पूंजी ले आने के लिए कुछ निजी कंपनियों से बात चल रही है। लकेिन यह सब कुछ बीच में ही अचानक रुक गया। और विभिन्न कारणों से बैंक में पूंजी नहीं ले आयी जा सकी।

इस बीच बताया जा रहा है कि जगह-जगह एस बैंक के एटीएम पर ग्राहकों की लाइन लगनी शुरू हो गयी है। एक चैनल का संवाददाता मुंबई में बैंक के चार एटीएमों का दौरा किया। एटीएम कहीं भी काम नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सभी एटीएम की स्क्रीन पर सर्वर के डाउन होने का नोटिस आ रहा है।

हर अच्छे बुरे मौके पर सरकार का समर्थन करने वाली अभिनेत्री पायल रोहतगी ने पहली बार सरकार के विरोध में ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है कि उनके पिता का पैसा इस बैंक में जमा है जो अब जाम हो गया है। यह देश की अर्थव्यवस्था के फलने-फूलने का संकेत नहीं है।

(इकोनामिक टाइम्स से इनपुट लिए गए हैं।)

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