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कोरोना से मौतों को छुपाने में लगी योगी सरकार, श्मशान घाट के गिर्द घिरवाई टिन की दीवार

200,739, ये देश में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के नये संक्रमितों का आंकड़ा है। ये सिर्फ आंकड़ा ही नहीं है, ये लोगों को भयाक्रांत करती बदइंतजामी की भी संख्या है। महाराष्ट्र देश का सबसे प्रभावित राज्य है, जहां राज्य सरकार ने फिलहाल 15 दिन के लिए लॉकडाउन लगा दिया है। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 278 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। पिछले दिनों होशंगाबाद में सामूहिक दाह संस्कार का वीडियो वायरल हुआ था।

वहीं राजधानी दिल्ली में भी हाल बदतर है। परिजनों को लाश लेकर अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ रहा है। कोविड-19 गाइडलाइन के चलते अन्य लाशें मुक्ति धाम नहीं जा रही हैं। आस पास के क्षेत्रों में लोग नदियों के किनारे और सड़कों पर लाशें फूंक रहे हैं।

महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश के हालात सबसे बदतर हैं। लखनऊ राज्य की कोरोना राजधानी भी बनी हुई है। राज्य की योगी सरकार लगातार कोविड-19 से होने वाले मौत के आंकड़ों को छुपा रही है, लेकिन लखनऊ के तमाम श्मशानों और क़ब्रिस्तान में जाती लाशें सरकार के खिलाफ़ गवाही दे रही हैं। पिछले दिनों बैकुंठ धाम के कई वीडियो भी वायरल हुए हैं। नतीजा ये हुआ है कि योगी सरकार ने भैंसा घाट के बैकुण्ठ धाम श्मशान के चारों ओर चारदीवारी पर  बीस फुट तक ऊंची टिन से घेरवा दिया है, ताकि सच बाहर न जा सके।

वहीं लखनऊ में कब्रिस्तान में दफन होने के लिए आने वाली मैयतों की संख्या भी बढ़ गई है। शहर के सबसे बड़े ऐशबाग कब्रिस्तान में ही बीते 12 दिनों में 210 मैयतों को दफनाया गया है, जबकि रोज़ाना 25-30 शव आ रहे हैं। संक्रमित शव दफनाने के लिए कब्रिस्तान में अलग जगह बनाई गई है। साथ ही गड्ढा भी गहरा खुदवाया जा रहा है, जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 2-3 शव ही आते थे।

वहीं निशातगंज कब्रिस्तान में एक अप्रैल से अब तक 23 मैयत और डालीगंज कब्रिस्तान में बीते 12 दिनों में 41 मैयत दफनाई गईं। खदरा कब्रिस्तान में एक अप्रैल से अब तक 29 शव दफनाए गए हैं, जबकि सामान्य दिनों में इनकी संख्या एक महीने में 10 से 12 रहती है।

राजधानी लखनऊ के श्मशानों में कोरोना से मौत के बाद 12 घंटे बाद भी शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है। बैंकुंठ धाम भैंसाकुंड के विद्युत शवदाह गृह के बाहर एंबुलेंस में शव के साथ लोग पूरा दिन अपनी बारी का इंतजार करते रहे। बुधवार रात 11 बजे तक 27 शवों का अंतिम संस्कार कोविड नियमों का पालन करते हुए हो चुका था। यहां दाह संस्कार करने वाले स्टाफ के पास पीपीई किट भी नहीं है।

वहीं एक और भाजपा शासित राज्य गुजरात में जेसीबी से एडवांस क़ब्रें खुदाई जा रही हैं। गुजरात के सूरत में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। गुजरात के चार शहर सूरत, वड़ोदरा, अहमदाबाद और राजकोट में सबसे अधिक कोरोना के मामले दर्ज हो रहे हैं। लिहाजा रोजाना मौत का आंकड़ा 100 पार कर रहा है।

एक ओर जहां श्मशानों में मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए कतार लगी है, वहीं, कब्रिस्तानों की भी ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसे देख लोग दहशत में हैं। कब्रिस्तानों में एडवांस में कब्रों की खुदाई की जा रही है। कब्रों की खुदाई करने के लिए मजदूरों की कमी पड़ने पर जेसीबी मशीन लगाई गई है। सूरत का आलम यह है कि यहां के अस्पतालों में बेड-वैंटिलेटर की भारी कमी है। आलम ये है कि सूरत के रामपुरा में स्थित कब्रिस्तान में जहां सामान्य तौर पर दो से तीन शव आते थे, आजकल वहां 10 से 12 शव रोज आ रहे हैं।

सूरत जिले के बारडोली स्थित मोक्ष धाम में अमूमन एक दिन में बीस के आसपास शवों का अंतिम संस्कार होता है, लेकिन कोरोना का प्रकोप ऐसा बढ़ा है कि एक दिन करीब 80 से ज्यादा शवों का अग्निदाह किया जा रहा है। नतीजा यह है कि 14 अप्रैल को भट्ठी पर लोड बढ़ने से उसमें लगी लोहे की ग्रिल पिघल जा रही है। सूरत के उमरा गांव स्थित रामनाथ घेला श्मशान गृह में लगातार शवों का अंतिम संस्कार करने से भट्ठियां जवाब देने लगी हैं, उमरा की गैस से चलने वाली छह भट्ठियां हैं, जिनमें से दो बंद पड़ गई हैं, जबकि लकड़ी आधारित 20 भट्ठियां चालू हैं।

रांदेर के दो और रामपुरा कब्रिस्तान में कोरोना से मरने वालों को दफनाया जा रहा है। तीनों कब्रिस्तान में सामान्य दिनों में दो से तीन मैयत आती थीं, अब रोजाना आठ से 10 शव आ रहे हैं। मोरा भागल के कब्रिस्तान में 25 कब्र एडवांस में खोदी जा रही हैं। इसके पूरे होते ही दूसरी 25 कब्र तैयार रखेंगे। मजदूर कब्र खोदते-खोदते थक गए तो अब जेसीबी से खोदाई की जा रही है।

वहीं, झारखंड में कोरोना से मौत का सिलसिला जारी है। राजधानी रांची में पिछले 10 दिन में श्मशान और कब्रिस्तान में शवों के आने की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। रविवार को रिकॉर्ड 60 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें 14 शव कोरोना संक्रमितों के थे, जिनका दाह संस्कार घाघरा में सामूहिक चिता सजाकर किया गया। इसके अलावा 35 शव पांच श्मशान घाटों पर जलाए गए। 13 शवों को रातू रोड और कांटाटोली कब्रिस्तान में दफनाया गया।  कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ा तो हरमू मोक्षधाम में शव जलाने वाली दोनों मशीनें भी ठप हो गईं। गैस से चलने वाली ये मशीनें जरूरत के हिसाब से गर्म नहीं हो पा रही थीं। इसके बाद मारवाड़ी सहायक समिति प्रबंधन ने साफ कर दिया कि जब तक मशीनें ठीक नहीं होंगी, तब तक यहां दाह-संस्कार नहीं हो सकता। यह शहर का एकमात्र मोक्षधाम है, जहां कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार होता है।

हरमू मुक्तिधाम में तकनीकी खराबी की वजह से घाघरा श्मशान घाट में वैकल्पिक व्यवस्था की गई और यहां देर रात 14 लाशों को जलाया गया। ये सभी कोविड-19 मरीज थे। रांची और नामकुम के बीच घाघरा नदी के किनारे श्मशान घाट पर लाशें जलाई जा रही हैं। मृतकों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि मुक्तिधाम में चिता जलाने की जगह कम पड़ गई। घंटों इंतजार के बाद भी जगह नहीं मिली तो लोग खुले में ही शव जलाने लगे। श्मशान में जगह नहीं रहने की वजह से मुक्तिधाम के सामने की सड़क पर वाहनों की पार्किंग में ही शव रखकर अंतिम क्रिया करने लगे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 15, 2021 8:31 pm

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