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मुजफ्फरनगर दंगे: योगी सरकार ने शुरू की बीजेपी के 3 विधायकों के मुकदमों की वापसी की कार्यवाही

नई दिल्ली। यूपी की योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर में दंगा भड़काने के आरोपी बीजेपी के तीन विधायकों के खिलाफ चल रहे मुकदमों को वापस लेने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इन सभी पर सितंबर, 2013 में मुजफ्फरनगर के नगला मंडोर गांव में आयोजित महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। गौरतलब है कि इसी पंचायत के बाद इलाके में दंगा भड़क गया था जिसमें तकरीबन 65 लोगों की मौत हो गयी थी।

सिखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज केसों में सरधना से विधायक संगीत सोम, थाना भवन से सुरेश राणा और मुजफ्फरनगर सदर का प्रतिनिधित्व करने वाले कपिल देव का नाम शामिल है। इसके अलावा हिंदुत्व का चेहरा रहीं साध्वी प्राची का भी नाम इसमें दर्ज है।

बीजेपी नेताओं पर कानून का उल्लंघन कर सरकारी मशीनरी से उलझने और खुलेआम दंगें में शामिल होने का भी आरोप है।

मुजफ्फरनगर में सरकारी वकील राजीव शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि “संबंधित कोर्ट में वापसी आवेदन (केस में) डाल दिया गया है। और मामला अभी लंबित है।”

आपको बता दें कि 7 सितंबर, 2013 को जाट समुदाय ने नगला मंडोर गांव में स्थित एक इंटरमीडिएट कालेज में महापंचायत बुलायी थी। इस पंचायत में 27 अगस्त, 2013 को कवाल गांव में मरे दो युवकों के मामले में अगली कार्रवाई पर फैसला लिया जाना था।

सचिन और गौरव की मुस्लिम भीड़ ने उस समय हत्या कर दी थी जब उन्होंने शाहनवाज कुरेशी नाम के एक मुस्लिम युवक को मार डाला था।

बताया जाता है कि उस समय दंगा शुरू हो गया जब पंचायत से लौट रहे लोगों पर अचानक हमला हो गया। हिंसा मुजफ्फरनगर के दूसरे इलाकों और पास के जिलों में भी फैल गयी। इसमें 65 लोगों की मौत हुई थी और तकरीबन 40000 लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए थे। कुल 510 अपराध के मामले दर्ज हुए थे और 175 में चार्जशीट दाखिल हुई थी। बाकी में पुलिस ने या तो क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी या फिर केस को ही खत्म कर दिया था।

महापंचायत से जुड़े मुकदमे को 7 सितंबर, 2013 को तब के सिखेड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज चरण सिंह यादव द्वारा दर्ज किया गया था। केस में सोम, राणा, कपिल देव, प्राची और पूर्व सांसद हरेंद्र सिंह मलिक पर एक समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा निषेधाज्ञा का उल्लंघन, जिला प्रशासन से बगैर अनुमति मांगे महापंचायत आयोजित करना और सरकारी अफसरों के काम में बाधा जैसे आरोपों के तहत मुकदमे दर्ज हुए थे।

इन सभी आरोपियों को धारा 188 (घातक हथियारों के साथ गैरकानूनी सभा में शामिल होना), 353 (सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने के लिए उन पर हमले), 153 ए (धर्म के आधार पर लोगों में घृणा फैलाना), 341, 435 जैसी गंभीर धाराओं के तहत मकुदमा दर्ज किया गया था।

मामले में गठित एसआईटी ने सोम, राणा, कपिल देव, प्राची और मलिक समेत 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

फरवरी, 2018 में बीजेपी सांसद संजीव बलियान के नेतृत्व में खाप चौधरियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर हिंदुओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की गुजारिश की थी।

उसके बाद मुजफ्फरनगर प्रशासन ने मामलों का विवरण लेकर मुजफ्फरनगर और शामली जिलों से जुड़े इस तरह के मामलों में मुकदमों के वापसी की कार्यवाही शुरू कर दी थी। इस सिलसिले में सरकार ने जिला अधिकारी, एसपी और वरिष्ठ सरकारी वकीलों से भी राय मांगी थी।

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This post was last modified on December 24, 2020 11:18 am

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