Sun. Aug 18th, 2019

जनाब, विश्वबैंक नहीं अपने कारोबारियों की रिपोर्ट देखिए

1 min read
रवीश कुमार

बिजनेस स्टैंडर्ड में टी ई नरसिम्हन की रिपोर्ट छपी है, तिरुपुर की। यह जगह कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां नोटबंदी के पहले 1200 यूनिट और दूसरे अन्य काम मिलकर 15,000 करोड़ से अधिक का कारोबार कर रहे थे। आज 40 प्रतिशत भी नहीं रहा। साउथ इंडिया कॉलर शर्ट एंड इनर वीयर स्मॉल स्केल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के महासचिव के एस बाबूजी का कहना है कि उनके संगठन के तहत 2000 से अधिक यूनिट थे, 30-40 फीसदी बंद हो गई हैं। इनमें 60,000 से 80,000 लोगों को काम मिल रहा था। 2016 की दिवाली की तुलना में इस दिवाली मार्केट 30 प्रतिशत कम आर्डर मिले हैं। नरसिम्हन ने लिखा है कि कोई भी नोटबंदी या जीएसटी के विरोध में नहीं है। सबका कहना है कि इसे ठीक से लागू नहीं किया गया।

खेल सामानों के व्यापार संघ ने एक सर्वे किया है। पाया है कि जीएसटी के कारण खेल-कूद के सामानों और उपकरणों की बिक्री में 50-60 फीसदी की कमी आई है। खेल के सामानों पर 12-28 फीसदी जीएसटी है। खेल सामानों के कारोबारी चाहते हैं कि जीएसटी का रेट 12 प्रतिशत होना चाहिए। शुभनयन चक्रवर्ती ने बिजनेस स्टैंडर्ड में रिपोर्ट फाइल की है कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण इस सेक्टर को दोहरा धक्का पहुंचा है। देश भर से चमड़े के सामानों के उत्पादन में गिरावट आई है। कानपुर में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। सरकार इस सेक्टर के लिए 2600 करोड़ के पैकेज पर विचार कर रही है।

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर Janchowk Android App

नैसकॉम ने अनुमान लगाया था कि आई टी सेक्टर में ग्रोथ रेट कम होने के बाद भी इस साल 1,30,000 से 1,50,000 नौकरियां दी जाएंगी मगर कई बड़ी कंपनियों ने उल्टा छंटनी कर दी है और तेज़ी से आटोमेशन की तरफ़ बढ़ रहे हैं। दो तीन कंपनियों ने मिलकर 10,000 से अधिक की छंटनी कर दी है। इस सेक्टर में नौकरियां सृजित करने की रफ्तार धीमी होती जा रही है।

  • टेलिकाम सेक्टर में बड़े स्तर पर छंटनी
  • रोजगार विहीन विकास हुआ है

टेलिकाम सेक्टर में अगले 12 महीने में 20-30,000 लोगों की छंटनी होने वाली है। इकोनोमिक टाइम्स ने लिखा है कि भारत की दस बड़ी भीमकाय कंपनियों ने 2008 के बाद से 8.6 प्रतिशत की दर से प्रगति की है मगर इनके यहां काम करने वाले लोगों की संख्या में मात्र 0.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सरकार सड़क निर्माण में तेज़ी से ख़र्च कर रही है, काम भी तेज़ी से हो रहा है मगर मशीनीकरण के कारण अब सड़क निर्माण के काम में 20 प्रतिशत लेबर की ज़रूर कम पड़ती है।

(रवीश कुमार के फेसबुक पेज से साभार)

Donate to Janchowk
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people start contributing towards the same. Please consider donating towards this endeavour to fight fake news and misinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

3 thoughts on “जनाब, विश्वबैंक नहीं अपने कारोबारियों की रिपोर्ट देखिए

  1. This blog is definitely rather handy since I’m at the moment creating an internet floral website – although I am only starting out therefore it’s really fairly small, nothing like this site. Can link to a few of the posts here as they are quite. Thanks much. Zoey Olsen”;you can visit my link to see how the big boys and gals make quick cash without selling anything, using scrapebox combined with payper view sites.

Leave a Reply