बहुजनों का पानीपत बना सोशल मीडिया का प्लेटफार्म ट्विटर

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प्रतीकात्मक फोटो।

नई दिल्ली। क्या ट्विटर जातिवादी है? क्या ट्विटर पर सवर्णों का वर्चस्व है? अभिजात हिस्से का मंच माना जाने वाला सोशल मीडिया का यह प्लेटफार्म क्या दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों समेत सभी बहुजनों के साथ भेदभाव करता है? पिछले तकरीबन पांच दिनों से सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर इन सवालों को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसमें न केवल जाति विरोधी और सामाजिक न्याय के पक्षधर बल्कि अकादमिक हिस्से से जुड़े ढेर सारे लोग हिस्सा ले रहे हैं। और इन सभी का कहना है कि ट्विटर भारत में हिंदुत्व की राजनीति का समर्थक है। इसके विरोध में बहुजन समर्थकों और सामाजिक न्याय के झंडाबरदारों ने पिछले पांच दिनों से इनसे जुड़े विषयों पर ट्वीट कर सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर उन्हें ट्रेंड होने के लिए मजबूर कर दिया।

मंगलवार को #TwitterHatesSCSTOBCMuslims का हैशटैग ट्रेंडिंग में टॉप पर था। तो सोमवार को #JaiBheemJaiMandalJaiBirsa ट्रेंड कर रहा था। इस हैशटैग को दलित, ओबीसी और आदिवासियों के गठजोड़ के तौर पर पेश किया गया था। जिसमें बहुजन नायकों में शुमार बीआर आंबेडकर, बीपी मंडल और बिरसा मुंडा की तकड़ी शामिल थी। इसके अलावा इस बीच #CasteistTwitter, #JaiBhimTwitter और #SackManishMaheswari समेत ढेर दूसरे हैशटैगों को शनिवार के बाद अलग-अलग मौकों पर ट्रेंड कराया गया।

मामले की शुरुआत कुछ इस तरह से हुई जब 2 नवंबर को पत्रकार और सामाजिक न्याय के अगुआ और एकेडमीशियन दिलीप मंडल के एकाउंट को ट्विटर ने एकाएक बंद कर दिया। उसका कहना था कि मंडल ने ट्विटर के मानकों का उल्लंघन किया है। इसके बारे में पूछे जाने पर मंडल ने ‘दि हिंदू’ को बताया कि “इस साल के मार्च महीने में मैंने ‘बहुजन एजेंडा’ नाम की एक बुकलेट के बारे में ट्वीट किया था। जिसमें लेखक के संपर्क का भी पूरा विवरण था। लेकिन ट्विटर ने इसे अपने नियमों का उल्लंघन करार दिया। और उसी के साथ मेरे एकाउंट पर पाबंदी लगा दी।” इसके साथ ही सामाजिक न्याय के कार्यकर्ताओं ने #restoreDilipMandal के हैशटैग के साथ ट्विटर पर अभियान शुरू कर दिया। और जब यह ट्रेंड करने लगा तो ट्विटर ने मंडल के एकाउंट को फिर से बहाल कर दिया। इतना ही नहीं उसने उनका एकाउंट वेरीफाई भी कर दिया। यानी उनके एकाउंट को ब्लू टिक दे दी।

इसी तरह का विरोध सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट संजय हेगड़े के एकाउंट पर भी पाबंदी के बाद सामने आया था। जिनका एकाउंट पिछले हफ्ते दो दिनों के भीतर दो बार बंद किया गया था। और वह भी एक ऐसी पोस्ट के लिए जिसे सामान्य तौर पर गलत नहीं माना जा सकता है।

कुछ यही कहानी दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतन लाल के साथ भी दोहरायी गयी। जिसमें ट्विटर ने उनके एकाउंट को भी नियमों का उल्लंघन बता कर बंद कर दिया। प्रोफेसर रतन लाल का कहना था कि उन्हें किसी ने जान से मारने की धमकी दी थी। और जिस फोन नंबर से वह धमकी आयी थी उसके खिलाफ एफआईआर लिखाने के बाद उसके नंबर को उन्होंने ट्विटर की एक पोस्ट के साथ शेयर कर दिया था। ट्विटर को यही बात नागवार लगी। और उसने रतन लाल के हैंडल पर पाबंदी लगी दी। फिर क्या? फिर तो #RestoreProfRatanlal के हैशटैग के साथ ट्विटर पर ट्वीट्स की बाढ़ आ गयी। और नतीजा यह हुआ कि यह भी ट्रेंड करने लगा। आखिर में ट्विटर को उनके हैंडल को भी बहाल करना पड़ा। हालांकि ट्विटर ने अभी रतन लाल को ब्लू टिक नहीं दिया है।

इसी बीच बहुजन कार्यकर्ताओं ने ट्विटर के इंडिया हेड मनीष माहेश्वरी के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। दिलीप मंडल ने अपने एक ट्वीट में साफ-साफ लिखा कि “मनीष माहेश्वरी, एमडी, ट्विटर इंडिया. जिस पोस्ट पर आपको एतराज था, वो तो नहीं हटेगा. लेकिन मैं वचन देता हूं कि आपको हटाने के लिए और आपको अंबानी की नौकरी में वापस भेजने के लिए मैं पूरी ईमानदारी से कोशिश करूंगा. एकाउंट वापस करने के लिए शुक्रिया। @manishm345 आपका, प्रोफेसर मंडल”। और इसी के बाद #SackManishMaheshwari के हैशटैग से ट्वीट शुरू हो गए। अभी यह प्लेटफार्म की ट्रेंडिंग में नंबर तीन पर ही पहुंचा था कि अचानक यह हैशटैग की ट्रेंडिंग सूची से गायब हो गया।

‘दि वायर’ के साथ बातचीत में ट्विटर के प्रवक्ता ने हैशटैग के ट्रेंडिंग सूची से गायब होने के मसले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि उसका कहना था कि ऐसा कोई हैशटैग जो लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाता हो या फिर किसी तरह का विभाजन पैदा करता हो तो उसे हटा दिया जाता है। इस सिलसिले में उसने मुसलमानों के बायकाट वाले हैशटैग का उदाहरण दिया।

बहुजन समर्थकों का कहना है कि ब्लू टिक देने के मामले में ट्विटर भेदभाव करता है। उनका आरोप है कि यह बिल्कुल जातिवादी नजरिये से किया जाता है। दिलीप मंडल ने इस सिलसिले में कई उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद (हालांकि इस विवाद के बाद उन्हें ट्विटर ने ब्लू टिक दे दिया है), प्रकाश आंबेडकर, हंसराज मीना समेत ढेर सारे ऐसे लोग हैं जिनकी फालोइंग लाखों में है। लेकिन ट्विटर ने उनको ब्लू टिक नहीं दिया है। जबकि दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह के ट्विटर पर फालोवरों की संख्या महज 27 है लेकिन उन्हें ब्लू टिक मिला हुआ है। मंडल ने इस पूरे प्रकरण को ‘नीला जनेऊ’ करार दिया है।

मंडल ने ट्विटर से अपनी पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है। और उनका कहना है कि ब्लू टिक देने के मामले में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उसके लिए ट्विटर को अपने मानदंड तय करने चाहिए और उनको जो भी पूरा करता हो उसे ब्लू टिक दे देनी चाहिए। उन्होंने पूरे ब्लू टिक को ही रद्द कर देने का न केवल सुझाव दिया बल्कि उसको खत्म करने का भी अभियान छेड़ दिया। उसका नतीजा यह था कि छह नवंबर को #CancelAllBlueTicksInIndia ट्रेंड करने लगा था।

बहुजन समर्थकों का ट्विटर का यह अभियान अभी रुका नहीं है। #JaiBhimJaiPeriyar आज भी ट्रेंड कर रहा है। बहुजनवादियों का यह अभियान केवल वर्चुअल दुनिया तक ही सीमित नहीं रहा। 4 नवंबर को भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने ट्विटर के मुंबई स्थित दफ्तर में धावा बोल दिया। और उसने पूरे दफ्तर को ही बंद कर दिया। बाद में भीम आर्मी के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर ट्विटर इंडिया के अधिकारियों ने मामले को हल किया।  

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