Friday, January 27, 2023

पीएम का यह कैसा डिजिटल इंडिया? जहां पढ़ाई के लिए भी मयस्सर नहीं है 4 जी

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क्या विडंबना है कि एक ओर देश का मुखिया देश को ‘डिजिटल इंडिया’ बनाने की घोषणा करता है और दूसरी ओर देश के ही एक राज्य जम्मू-कश्मीर में एक साल से 4जी इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगा कर रखता है।

एक ऐसे समय में जब हाई स्पीड इंटरनेट के बिना सभी जरूरी कामकाज ठप हो जाते हों। एक ऐसे समय में जब कोविड-19 वैश्विक महामारी के चलते छात्रों की ऑनलाइन क्लासेज चल रही हों, व्यापार, कारोबार, काम धंधा सब वर्क फ्रॉम होम के दायरे में सिमट गया हो। एक राज्य की पूरी आबादी को 4G सेवा से वंचित करना आवाम के प्रति बर्बरता और अपराध है।

जम्मू कश्मीर में हाई स्पीड 4जी इंटरनेट सेवा पर पाबंदी के एक साल पूरे होने पर 4 अगस्त 2020 को एनएसयूआई ने तवी नदी के घाट पर “4G दी बरखी” आयोजित की। बरखी का आयोजन विकास बधोरिया स्टेट जनरल सेक्रेटरी एनएसयूआई जम्मू एंड कश्मीर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले एनएसयूआई के सदस्यों ने जनचौक के संवाददाता से बात करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।

भदोरिया ने मौके पर कहा, “जब पूरी दुनिया ख़तरनाक कोविड-19 महामारी से लड़ रही है, जम्मू कश्मीर के लोग डिजिटल महामारी के खिलाफ़ भी संघर्ष कर रहे हैं।” पिछले एक साल से जम्मू कश्मीर के लोगों को हाई स्पीड 4जी इंटरनेट सुविधा से वंचित रखा जा रहा है।

आज जब भारत भर के छात्र ऑनलाइन क्लासेज अंटेड कर रहे हैं। इंटरनेट पर पढ़ाई कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर के छात्र ‘2जी’ नेटवर्क पर संघर्ष कर रहे हैं। जब समूचा व्यापारी वर्ग अपने घर बैठ कर इंटरनेट पर काम कर रहे हैं, जम्मू कश्मीर के व्यापारी अपना माल भेजने के लिए ‘2जी’ पर संघर्ष कर रहे हैं। जब भारत का समूचा आईटी सेक्टर अपने घर से हाईस्पीड 4जी पर काम कर रहा है, जम्मू कश्मीर के कर्मचारी ‘2जी इंटरनेट’ पर ईमेल तक नहीं भेज पा रहे हैं।

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एक ही देश में दो डेटा स्पीड क्यों है? जब​​कि खुद उपराज्यपाल ने भी कहा कि उन्हें ‘4जी इंटरनेट’ से कोई समस्या नहीं दिखती है। जब सब कुछ सामान्य है, फिर भी जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ भेदभाव क्यों हो रहा है। सरकार का अड़ियल रुख स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार को ‘जम्मू और कश्मीर के लोगों को निराशा की स्थिति में धकेलना नहीं चाहिए।

एनएसयूआई एक्टिविस्ट अजय लखोत्रा कहते हैं, “एक छात्र होने के नाते, मैं बहुत ही विशेषाधिकार रहित हूं, क्योंकि मेरे साथी जिनके साथ मुझे भविष्य में प्रतिस्पर्धा करनी है, वे सभी अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में अध्ययन कर रहे हैं और लाभ उठा रहे हैं जितना कि वे मेट्रो शहरों में कर सकते हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर निवासी होने के नाते, मैं पढ़ाई के बजाय अभी भी ‘4G इंटरनेट’ के लिए प्रशासन से लड़ रहा हूं। हम कहां टिक पाएंगे?” 

उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हम भारत की अल्पाधिकार प्राप्त युवा हैं और दूसरी तरफ वे सभी विशेष रियायतें जो पहले हमें दी गई थीं, हमसे छीन ली गई हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि हम नेताओं के निहित स्वार्थों के कारण पीड़ित हैं। मेरी सारी उम्मीदें अब शीर्ष अदालत पर टिकी हैं। केवल वही हैं जो अब जम्मू-कश्मीर के भविष्य को बर्बाद होने से बचा सकती है।

4जी सेवा मिल ही नहीं रही और पैसे चुका रहे
बॉबिन चड्डा 4G सेवा पर पाबंदी के बावजूद 4G के पैसे वसूलने को घोटाला करार देते हुए कहते हैं, “4G इंटरनेट आजकल खाने में नमक की तरह है और 4G के बिना जीवन अधूरा है। 4G इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध भारत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। यहां लोग किसी ऐसी चीज के लिए भुगतान कर रहे हैं जो उन्हें मिल ही नहीं रही है। एक छात्र होने के नाते, मैं केंद्र शासित प्रशासन से आग्रह करता हूं कि वो जल्द से जल्द 4G इंटरनेट सेवा बहाल करे।”

दिव्यांशु शर्मा एक छात्र के तौर पर 4G सेवा पर पाबंदी से हुए नुकसान का आकलन करते हुए बताते हैं, “एक छात्र के तौर पर लॉकडाउन के दौरान हमें इंटरनेट की कमी का बहुत नुकसान हुआ है। इंटरनेट की कमी के कारण हम पढ़ाई नहीं कर पाए। मैं कानून का विद्यार्थी हूं और मैं बर्बाद महसूस कर रहा हूं, क्योंकि इस दौरान बहुत से वेबिनार और अन्य कार्यक्रम आयोजित हुए लेकिन 4G की कमी के कारण मैं इसमें शामिल नहीं हो पाया।”

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प्रदर्शन में शामिल छात्र शील कुमार कहते हैं, “हम इक्कीसवीं सदी में हैं, और यदि हम इसे डिजिटल युग कहें तो यह कहना गलत नहीं होगा, लेकिन एक जम्मू-कश्मीर निवासी होने के नाते मुझे 4G सुविधा नहीं मिलती तो हमे पिछड़ापन महसूस कर रहे हैं। इंटरनेट इस समय की बुनियादी जरूरत है लेकिन दुर्भाग्य से हम राजनीति का शिकार हो गए हैं।”

जानू कहती हैं, “सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ हो रहे अन्याय का जवाब देना होगा। जम्मू-कश्मीर के युवा पहले से ही बेरोजगारी के कारण अवसाद में हैं और हाईस्पीड इंटरनेट की पाबंदी ने उन्हें हताशा की स्थिति में पहुंचा दिया है। सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जम्मू कश्मीर के लोगों को तेज़ गति इंटरनेट सेवा से निषिद्ध कर दिया गया है, जो अब भी अतिशयोक्ति पूर्ण लगती है। इसलिए माननीय उपराज्यपाल से अनुरोध है कि जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द ‘4जी इंटरनेट’ सेवा बहाल किया जाए।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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