Friday, July 1, 2022

मीना खलखो हत्या मामले में सभी पुलिसकर्मी बरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर की मीना खलखो हत्याकांड मामले में न्यायालय ने सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया रायपुर की अदालत ने पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करार दिया है। इस आदेश की कॉपी एक माह बाद जारी की गई है। वकीलों की मानें तो अदालत में अभियोजन ने साक्ष्य पेश नहीं किया, जिसके कारण तीनों आरोपियों को कोर्ट ने बरी करने का फैसला सुनाया है। मीना खलखो केस में 11 साल बाद फैसला आया है।

इस मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा दी थी। घटना को लेकर बने राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन सरकार ने जांच के आदेश दिए। जांच के आधार पर तीन पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया। खबर ये है कि इन तीनों आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया है।

सबूत के अभाव में पुलिसकर्मी हुए बरी

पुलिसकर्मी धर्मदत्त धानिया, जीवनलाल रत्नाकर और निकोदिम खेस इस हत्याकांड में आरोपी बनाए गए थे। जिसके बाद अपराध अनुसंधान विभाग ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। न्यायिक जांच आयोग ने पुलिसकर्मियों को अपनी जांच में दोषी माना लेकिन किसी तरह के सबूत न होने के कारण पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया है। मामले में दोषमुक्त करार दिए गये हरियाणा के रहने वाले धर्मदत्त धानिया इन दिनों एनएसजी, गुड़गांव में कार्यरत हैं। जबकि दूसरे आरोपी जीवनलाल रत्नाकर, प्रधान आरक्षक रामानुजगंज में पोस्टेड हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी निकोदिम खेस की मौत हो चुकी है। सबूत की कमी के बिना पर कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार नहीं दिया है।

पुलिसकर्मियों ने मीना को मारी थी गोली

6 जुलाई 2011 में चांदो थाना क्षेत्र के करचा गांव के पास मीना को मार गिराने का दावा किया गया था। CID ने अपनी जांच में माना था कि मीना खलखो की हत्या आरक्षक धर्मदत्त धानिया और आरक्षक जीवनलाल रत्नाकर ने की थी। CID ने यह भी माना था कि हत्यारों को बचाने के लिए थाना प्रभारी ने झूठे साक्ष्य गढ़े, जिसका खुलासा होने के बाद कार्रवाई की गई थी।

मामले में विशेषज्ञ जांच में भी मीना की मौत एसएलआर की गोलियों से हुई है। इसका खुलासा हुआ था।

परिजनों ने लगाए थे गंभीर आरोप

घटना के बाद मीना खलको के परिजनों सहित अन्य ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मीना को मार गिराया है। वहीं उन्होंने मीना खलको के नक्सली या उससे संबंध होने से भी इनकार कर दिया था। आयोग ने यह भी कहा था कि मीना की मौत पुलिस की गोली से हुई है। इसके बाद में सीआईडी ने मीना की हत्या का मामला दर्ज किया। सीआईडी ने मीना खलको हत्या मामले में खेस समेत 25 पुलिस कर्मियों के शामिल होने की बात कही थी। तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप

बलरामपुर के लोंगरटोला में 16 साल की आदिवासी किशोरी मीना खलखो की गोली लगने से मौत हुई थी। पुलिस ने मीना को नक्सली बताया था। पुलिस वालों ने दावा किया किया था कि झारखंड से आए नक्सलियों के साथ दो घंटे तक चली मुठभेड़ के दौरान मीना को गोली लगी थी। वह नक्सलियों की वर्दी में थी। उसने भी पुलिस पर फायरिंग की थी। इस केस में कई एनजीओ ने पुलिस वालों पर मीना के साथ रेप का आरोप भी लगाया था।

(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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