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गुजरात में थम नहीं रहा दलितों का उत्पीड़न, मूंछ रखने पर हमले, गरबा देखने पर हत्या

गांधीनगर/अहमदाबाद। गुजरात में दलितों पर हमले की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। कल भी एक छात्र को चाकू मारकर घायल कर दिया गया। इससे पहले भी मूंछ रखने और गरबा देखने को लेकर दलितों पर हमला किया गया। इन घटनाओं को लेकर राज्य के दलितों में बेहद गुस्सा है। आज इसे लेकर राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने विधानसभा का घेराव भी किया और प्रदेश के गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की।

छात्र पर चाकू से हमला

मंगलवार, 3 अक्टूबर को राजधानी गांधीनगर में 17 साल के दलित छात्र दिगंत महेरिया पर जानलेवा हमला किया गया। दिगंत परीक्षा देकर अपने मित्र से मिलकर अपने गाँव लिम्बोद्रा लौट रहा था कि पतेल्वास के नज़दीक बाइक से आये लड़कों ने जो अपने मुंह पर रुमाल बांधे हुए थे, उसपर चाक़ू से हमला कर दिया। इन लोगों ने दिगंत की पीठ पर चाकू मारा और भाग गए। दिगंत को गांधीनगर सिविल हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया। बताया जाता है कि हमलावरों की बाइक पर नंबर की जगह BANNE लिखा था।

मूंछ रखने पर भी आपत्ति

लिम्बोद्रा गांव, गांधीनगर जिले में आता है। 25 सितम्बर को इसी गांव में उच्च जाति के लोगों ने दिगंत महेरिया के चचेरे भाई को इसलिए पीटा था क्योंकि वह दलित समाज से होने के बावजूद ताव वाली मूंछ रखे हुए था। आंखों पर स्टाइलिश चश्मा था। 29 सितंबर को मूंछों के कारण लिम्बोद्रा गाँव के कृणाल महेरिया को भी उच्च जाति के लोगों ने मारा था। इन दोनों घटना को लेकर दलितों में सरकार और तन्त्र के खिलाफ गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था कि दिगंत महेरिया पर हमला हो गया।

“यह घृणा कब बंद होगी?”

दिगंत की माँ चन्द्रिका बेन महेरिया ने बताया कि “मेरे बेटे का मित्र उसे घर तक लाया वह खून से लथपथ था। हम लोग तुरंत उसे सिविल हॉस्पिटल ले गए। 13 टांके आये हैं। उनका कहना है दलितों के प्रति यह घृणा बंद होना चाहिए मैं नहीं जानती कब यह घृणा बंद होगी।” आपको याद होगा कि गुजरात के ऊना में ही दलितों की निर्मम पिटाई की बड़ी घटना सामने आई थी, जिसका गुजरात में नहीं देशभर में कड़ा विरोध हुआ था, लेकिन उसके बाद भी हालात नहीं बदले हैं।

“हमें जान का ख़तरा”

घायल छात्र दिगंत की बहन काजल का कहना है जिन 3 दरबारों (दरबार जाति के लोग) को 25 सितंबर की घटना के लिए गिरफ्तार किया था उन्हें कलोल कोर्ट से जमानत मिल गई है। मेरे भाई पर हमले के बाद हमें डर लग रहा है। हमारी जान को भी खतरा है। इनकी ज़मानत रद्द होनी चाहिए।

गरबा देखने पर जान ली

राज्य में दलित विरोधी घटनाएँ रुक नहीं रही हैं। शनिवार को पाटन के गंगेट गाँव में खेमा परमार और उसके परिवार को नवरात्रि की अंतिम रात को जातिगत कारणों से कुछ उच्च जाति के लोगों ने पिटाई की थी जिसकी पुलिस में शिकायत भी की गई। रविवार को आनन्द के भदरानिय गाँव में गरबा देखने आये 21 वर्षीय जयेश सोलंकी (दलित) को पीट पीट कर मार डाला गया। आरोप है कि पीटने वाले पटेल समाज के थे।

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच का घेराव-प्रदर्शन

दलितों पर बढ़ रहे हमलों के खिलाफ राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने आज गांधीनगर में राज्य विधानसभा का घेराव कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मंच के नेता सुबोध परमार के साथ करीब 100 से अधिक दलितों को विधानसभा गेट नंबर 1 से डिटेन कर लिया है। पुलिस ने इस प्रदर्शन-घेराव को रोकने की पहले ही काफी कोशिश की। मंच के संयोजक जिग्नेश मेवनी को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सुबह सूरज उगने से पहले ही उनके घर से हिरासत में ले लिया गया था। जिग्नेश का कहना था कि 15 दिन के भीतर एक ही गाँव में दलितों के खिलाफ तीन जातिगत घटनाएँ हुई हैं। पुलिस और सरकार से क़ानून व्यवस्था संभाल नहीं रही है। राज्य के गृहमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के सह संयोजक राकेश महेरिया ने बताया कि छुरीबाज़ी की घटना के बाद पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। यदि पुलिस हमलावरों को नहीं पकड़ती है जल्द ही बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।

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This post was last modified on May 12, 2019 11:02 pm

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