Tuesday, December 7, 2021

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पिछ़ड़ों ने रैली कर छत्तीसगढ़ में दिखायी ताकत, संसद से लेकर सड़क तक अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प

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छत्तीसगढ़ (कांकेर)। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के बाद अब पिछड़ा वर्ग ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है विभिन्न मांगों को लेकर 10 हजार से ज्यादा की संख्या में छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर में पिछड़ा वर्ग के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपनी 6 सूत्रीय मांगें रखी।

इस दौरान एक सभा का आयोजन हुआ जिसमें जिले भर से बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग के लोग शामिल हुए। भीड़ इतनी थी कि पंडाल में बैठने की जगह कम पड़ गयी। नतीजतन लोग भानुप्रतापपुर से कांकेर स्टेट को जाने वाले हाइवे पर ही चटाई बिछाकर बैठ गए। इस रैली में लगभग 20 से 25 हजार लोग एकत्रित हुए। नेताओं ने सभा को संबोधित कर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की। इस तरह से बाबा शतराम शाह चौक में लगभग एक घंटे तक प्रदर्शन, संबोधन जारी रहा। अपनी सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्य चौक में ही एसडीएम जितेंद यादव को सौंपा गया और इसके साथ ही रैली का समापन कर दिया गया। नगर के मुख्य चौक पर मुस्लिम समाज और बस स्टैंड के पास प्रभाकर सोनी ने पेयजल की व्यवस्था कर रखी थी।

पिछड़ा वर्ग के जगन्नाथ साहू ने कहा कि यह हमारा संगठन गैर राजनीतिक है, हमारी पूरी आबादी 52 प्रतिशत है इस हिसाब से हमें अधिकार नहीं मिल रहा है। हम सब इसी एकता के साथ आगे भी रहना है तो निश्चित रूप से सरपंच, विधायक, सांसद हमारे समाज से होंगे। हरेश चक्रधारी ने कहा कि ओबीसी को सरकारों ने उपेक्षित किया है। हमें अपने अधिकार के लिए हमेशा आगे आना होगा। मनीष टेम्पा योगी ने कहा कि हम 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग रखे हैं, हमारे बच्चों को छात्रावासों में भी इतना ही आरक्षण मिले। हमारे लिए अलग से पिछड़ा वर्ग मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए। इसके लिए सड़क से लेकर संसद तक की लड़ाई जारी रहेगी। अरविंद जैन ने कहा कि आज की इस अधिकार रैली में कोई नेता नहीं है इस बार संगठन ग्राम पंचायत स्तर से बनाया गया है, हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसी एकता बनी रहे, हम अपना अधिकार लेकर रहेंगे। युवराज पटेल ने कहा कि आज जो एकता आप सब ने दिखाई है यह भविष्य में भी बनी रहनी चाहिए। जिससे अपने अधिकारों की लड़ाई को एकताबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

रेस्ट हाऊस के सामने सभा आयोजित होने के बाद रैली रेस्ट हाउस सामुदायिक भवन से अस्पताल रोड़ होते हुए अंतागढ़ रोड पहुँची। इसके बाद वापस मुख्य चौक से होते बस बस स्टैण्ड पहुच गयी। साप्ताहिक बाजार स्थल पहुचकर वनोपज नाका दल्ली रोड से फिर मुख्य चौक में अपने 6 सूत्रीय अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की। इस अधिकार रैली में भानुप्रतापपुर, दुर्गुकोंदल, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, पखांजूर, आमाबेड़ा, चारामा, काँकेर, नरहरपुर के आलावा कोंडागांव से भी ओबीसी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

ओबीसी की 6 सूत्रीय अधिकार मांगें

-छतीसगढ़ राज्य में पिछड़ा वर्ग के 52 प्रतिशत आबादी के आधार पर उसे 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये।
-छतीसगढ़ राज्य में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना की जाये।
-पिछड़ा वर्ग के परंपरागत वनवासी होने के नाते उसे पांचवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
-राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में भारत सरकार के जनसंख्या गणना के आधार पर जिन ग्राम पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की बहुलता है ऐसी ग्राम पंचायत में पिछड़ा वर्ग के सरपंच का पद आरक्षित किया जाए।
-छत्तीसगढ़ सरकार एवं भारत सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा से लेकर कालेज की पढ़ाई के लिए संचालित सभी आश्रम छात्रावास में पिछड़ा वर्ग छात्र-छात्राओं के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
-पिछड़ा वर्ग परंपरागत वनवासियों को वन अधिकार मान्यता पत्र जो वर्तमान में लंबित है उसे तत्काल प्रदान किया जाए।

रैली को देखते प्रशासन की तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था

ओबीसी रैली को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की तगड़ी व्यवस्था रखी थी, जिसके चलते प्रातः10:00 बजे से ही नगर में सभी तरह का आवागमन रोक दिया गया था। नगर के अंतागढ़ रोड, दल्ली रोड, काँकेर रोड, संबलपुर रोड़ में आवागमन रोक दिया गया। पत्थलगांव में हुई घटना को मद्देनजर इस तरह की व्यवस्था की गई थी। भानुप्रतापपुर में विशाल जनसमुदाय के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
इस आयोजन में प्रमुख रूप से मनीष टेम्पा योगी, राजकुमार ठाकुर, गजानन्द डड़सेना, विजय पटेल, अशोक जैन, शैलेन्द्र पुनिया, योगेंद्र यादव, ज्वाला जैन, प्रभाकर सोनी, रितेश मानिकपुरी, शालिक जैन, प्रताप जैन, सहात्रीन चक्रधारी, मधेश्वर जैन, विजय साहू, गजानन्द जैन, राकेश गुप्ता, अशोक यादव, मुन्ना सिन्हा, दयालु यादव, जितेंद्र साहू, गौरीशंकर साहू, परमानंद साहू, वेदप्रकाश सिन्हा, रामेश्वर जैन, दुर्गाप्रसाद जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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