भूपेश बघेल ने केंद्र से मांगी मनरेगा बकाए की राशि

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रायपुर। दीया-मोमबत्ती हो गया हो तो छत्तीसगढ़ में मनरेगा मजदूरों को पिछले कुछ दिनों से मजदूरी नहीं मिली है…..केंद्र से पैसे नहीं आये हैं। अब सीएम भूपेश बघेल ने मोदी सरकार से मजदूरों के लंबित 484 करोड़ रुपए मांगे हैं। ग़ौरतलब है कि कोरोना में यह मजदूर वर्ग ही सबसे अधिक परेशान है। सीएम भूपेश बघेल ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मनरेगा मजदूरों को तीन महीने के लिए हर माह एक-एक हजार रुपये देने की मांग की है। इसी तरह जन धन खाता धारकों को हर माह 750 रुपए देने की मांग की है, जिससे लॉक डाउन के दौरान इन परिवारों को कोई दिक्कत न हो।

असल में ग्रामीण भारत के लोगों को रोजगार की गारंटी देने वाली योजना मनरेगा पहले से ही उधारी पर चल रही है। देश के कई राज्यों में मजदूरों को कई महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है, ऐसे में 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा से ये मजदूर और भी बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं।

अपने पत्र में सीएम बघेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई घोषणाओं की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि इन घोषणाओं से समाज के बड़े तबके को राहत मिली है। केंद्र सरकार द्वारा की गई सकारात्मक पहल को निरंतर जारी रखने की जरूरत है, क्योंकि अभी भी समाज का एक बड़ा वर्ग उन घोषणाओं से लाभ प्राप्त करने में अभी भी वंचित है। खासकर मनरेगा के तहत आने वाले भूमिहीन मजदूर व असंगठित क्षेत्र के कामगारों का वर्तमान परिस्थितियों में जीवन-यापन दूभर हो जाएगा।

इसी तरह संगठित क्षेत्र के कामगारों जिन्हें 15 हजार प्रति माह से कम राशि प्राप्त होती हो, उनकी भविष्य निधि की संपूर्ण राशि आगामी तीन माह तक केंद्र सरकार द्वारा वहन करने और उसमें किसी भी तरह की पूर्व शर्त नहीं रखने का अनुरोध किया है। सीएम बघेल ने लिखा है कि यदि इन सुझावों के अनुरूप स्वीकृति दी जाती है, तभी हम कोरोना के खिलाफ छेड़ी गई जंग जीतने में सफल हो सकते हैं। अन्यथा लाखों परिवारों के लिए जीवन का संकट उत्पन्न होना निश्चित है।

बता दें कि कल PM मोदी ने एक वीडियो सन्देश जारी करते हुए कहा कि 5 अप्रैल को 9 बजे 9 मिनट तक सभी देशवासी लाइट बंद कर अपने बालकनी से मोबाइल की फ़्लैश लाइट या दिए मोमबत्ती जलायें।

विदित हो कि देश बंगला या अपार्टमेंट में नही रहता है। बालकनी सभी के पास नहीं है, एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती मुंबई के धारावी में है जहां धीरे-धीरे कोरोना वायरस फ़ैल रहा है। देश की 40 करोड़ आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत करने को मजबूर है।

कई बड़े आदिवासी इलाकों में आज भी बिजली नहीं है, फिर टीवी कैसे चलेगा? वे आपकी बात कैसे सुने होंगे? बिना बिजली के लाइट कैसे बंद होगी? बीमार सरकारी स्वास्थ्य सेवा पर से ध्यान हटाना चाहते हो ताकि इस पर बहस ना हो ! कोरोना वायरस को इवेंट बना दिया गया है। 35 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका ने सात दिनों में 11 लाख से अधिक टेस्ट किए और 135 करोड़ आबादी वाले भारत देश में आप अभी तक 15 दिनों में सिर्फ 45 हज़ार टेस्ट करा पाए हैं।

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