धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत की जांच की सीबीआई ने संभाली कमान

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झारखंड सरकार की अनुशंसा और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच- 1 ने 4 जुलाई से धनबाद के एडीजे-8 उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत की जांच शुरू कर दी है। 

इस हाईप्रोफाइल केस की जांच के लिए एएसपी विजय कुमार शुक्ला को अनुसंधानकर्ता बनाया गया है।

बता दें कि जज उत्तम आनंद मौत केस के जांच अधिकारी (आईओ) एएसपी विजय कुमार शुक्ला की गिनती सीबीआई के तेजतर्रार अफसरों में होती है। 2016 में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित शुक्ला को ब्यूरो में मर्डर केस स्पेशलिस्ट के रूप में भी माना जाता है। 2014 में यूपी के बदायूं में जिन दो दलित चचेरी बहनों के शव पेड़ से लटकते मिले थे और जिस पर देशभर में हंगामा हुआ था, उस केस की जांच बतौर डीएसपी शुक्ला ने ही की थी।

शुक्ला की जांच में ही राज खुला कि दोनों बहनों में आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनका पहले गैंगरेप हुआ और फिर हत्या कर शवों को पेड़ से लटका कर खुदकुशी का रूप देने का प्रयास किया गया। शुक्ला ने ही इस केस के मुख्य किंगपिन गांव के ही दबंग पप्पू यादव, उनके भाई अवधेश यादव व उर्वेश यादव समेत सहयोगी रहे सिपाही छत्रपाल सिंह व सर्वेश यादव को गिरफ्तार किया था।

अब झारखंड सरकार की अनुशंसा और हाईकोर्ट के निर्देश पर दिल्ली सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच- 1 ने मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली। प्राथमिकी का आधार 28 जुलाई को एडीजे की पत्नी कृति सिन्हा के फर्दबयान पर धनबाद सदर थाने में दर्ज एफआईआर को बनाया गया है। पुलिस ने हत्या की धारा में ही अज्ञात ऑटो चालक को आरोपित किया था। लिहाजा सीबीआई ने भी अपनी प्राथमिकी में ऑटो चालकों को अज्ञात मानकर हत्या की धारा-302 में आरोपी बनाया।

शुक्ला की देखरेख में 20 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई गई है, जो धनबाद पहुंच गई है। वहीं टीम की मदद के लिए सीबीआई के दिल्ली के ब्लॉक-4 सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) की एक विशेष टीम भी धनबाद के लिए रवाना की गई है, जो गुरुवार को धनबाद पहुंचेगी। सीएफएसएल टीम में बायोलॉजी, डीएनए प्रोफाइलिंग, फिंगर प्रिंट्स, फॉरेंसिक साइकोलॉजी और सेरोलॉजी विंग के एक्सपर्ट शामिल किए गए हैं।  

सीबीआई धनबाद पहुंच कर जज मौत प्रकरण के आईओ धनबाद सदर इंस्पेक्टर विनय कुमार से अब तक की जांच की जानकारी लेगी। एफआईआर व केस डायरी की प्रतियां हासिल करेगी। फिर एडीजी (ऑपरेशन) संजय आनंद लाटकर के नेतृत्व में गठित एसआईटी से अब तक की जांच की जानकारी ले सकती है। इस दौरान पुलिस और एसआईटी द्वारा संकलित साक्ष्यों को भी सीबीआई हासिल कर सकती है। अभी तक 5 हजार से अधिक पन्नों में जांच रिपोर्ट तैयार हुई है, जो सीबीआई को सौंपी जा सकती है।

इधर, एडीजी (ऑपरेशन) संजय आनंद लाटकर की अगुवाई में गठित एसआईटी ने दोनों आरोपी, ऑटो मालिक, घटना के समय मौजूद व गुजरने वाले लोगों से पूछताछ की। सदर और सरायढेला थाना के पुलिस अधिकारियों से एसआईटी की टीम ने घटना के बारे में जानकारी ली और कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया। जैसे कि सदर थाना प्रभारी से पूछा गया कि घटना की जानकारी इतनी देर से कैसे मिली, घटना की जानकारी मिलने के बाद क्या-क्या कार्रवाई की? आरोपियों को पता लगाने से लेकर उनकी गिरफ्तारी को लेकर सवाल किए गए। वहीं सरायढेला थाना के पदाधिकारी और चौकीदार से भी पूछताछ हुई।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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