Friday, October 22, 2021

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कोरोना योद्धाओं को नौकरी और वेतन के लाले, फूल बरसवाने वाले लापता

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नई दिल्ली। कोरोना संकट के दौरान बहादुरी से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, गैरकानूनी रूप से वेतन में कटौती, काम से निकालने और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराने आदि जैसी कई बातें सामने आ रही हैं। ऐक्टू दिल्ली के सचिव सूर्य प्रकाश ने कहा कि मोदी सरकार ने कर्मचारियों के ऊपर फूल ज़रूर बरसाए पर उनके वेतन, सुरक्षा, नौकरी की गारंटी इत्यादि जैसी बातों के लिए कुछ भी नहीं किया। सच तो ये है कि श्रम कानूनों पर लगातार जारी हमलों से कर्मचारियों की स्थिति और बदतर हुई है।

लेडी हार्डिंग अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने काम से निकाले जाने के खिलाफ अस्पताल गेट पर प्रदर्शन किया। आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू ) के दिल्ली राज्य सचिव, सूर्य प्रकाश ने प्रदर्शन की अगुवाई की। इसमें कई कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इससे पहले केंद्र सरकार के अधीन आने वाले राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी ठेका कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।

सूर्य प्रकाश ने कहा कि तमाम दावों के बावजूद सरकार कोरोना से लड़ने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। न तो कोरोना संक्रमण की रोकथाम हो पाई है और न ही स्वास्थ्य कर्मचारियों को उनके अधिकार मिल रहे हैं। लेडी हार्डिंग अस्पताल और मेडिकल कॉलेज केंद्र सरकार के अधीन हैं। बावजूद इसके इन कर्मचारियों की समस्याओं पर केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि देश भर में स्वास्थ्य कर्मचारियों को ‘पीपीई’ और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भारी किल्लत के बीच काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कर्मचारियों, विशेषकर कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को ठीक से वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। दिल्ली और आसपास के कुछ अस्पतालों में तो चिकित्सकों को भी वेतन का भुगतान समय से नहीं हो पा रहा है।

लेडी हार्डिंग अस्पताल के ठेका कर्मचारी, वहीं कार्यरत परमानेंट कर्मचारियों के जितना ही काम करते हैं। इसके बावजूद उनका वेतन पक्के कर्मचारियों के मुकाबले में काफी कम है। हर बार कॉन्ट्रैक्ट बदलने के वक़्त इन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से नौकरी पर रखने के नाम पर अवैध वसूली भी की जाती है।

इस तरह का भ्रष्टाचार ठेकेदार और सरकारी अफसरों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। पीड़ित कर्मचारियों में से कुछ से 15,000 रुपये तक की अवैध वसूली की गई है। पिछले दिनों कई कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार ने नौकरी से निकालने की बात कही है। इससे कोरोना के खिलाफ ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ कहे जाने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी काफी परेशान हैं। यूनियन के माध्यम से इन कर्मचारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाया है।

ऐक्टू के दिल्ली राज्य सचिव सूर्य प्रकाश ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन और केंद्र सरकार को कर्मचारियों की स्थिति से अवगत कराने के बावजूद दोनों ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। अस्पताल प्रबंधन ने जिन कर्मचारियों से कोरोना संकट के दौर में काम करवाया उनको सरासर गैर कानूनी तरीके से निकाल रही है।

आसमान से फूल बरसाने की सच्चाई आज सबके सामने है। मोदी सरकार लगातार श्रम कानूनों को कमजोर कर रही है। साथ ही वह ठेकेदारी को बढ़ावा दे रही है। इसकी वजह से आज देश की राजधानी में कर्मचारियों की बहुत बुरी स्थिति है। स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव सरकार के मजदूर विरोधी रवैये को साफ़ तौर पर प्रकट करता है।

सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रति उदासीनता बहुत ही चिंताजनक हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों का नुकसान है बल्कि कोरोना से परेशान आम जनता को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐक्टू आने वाले दिनों में इन कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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