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Monday, September 20, 2021

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योगी सरकार के चार साल, प्रदेश की महिलाएं बेहाल: वर्कर्स फ्रंट

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लखनऊ: सरकार के चार साल पूरा होने पर मनाएं जा रहे आज महिला सशक्तिकरण दिवस के अवसर पर वर्कर्स फ्रंट ने अपर श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। 181 वूमेन हेल्पलाइन (Women Helpline) और महिला समाख्या जैसी महिलाओं के सुरक्षा, सम्मान व स्वावलम्बन के लिए हितकारी कार्यक्रमों को पूरी क्षमता से चलाने, 181 वूमेन हेल्पलाइन कर्मचारियों के बकाए वेतन का अविलम्ब भुगतान कराने, चुनावी वायदे के अनुरूप आगंनबाड़ी, आशा व मिड डे मील रसोइया को न्यूनतम मजदूरी देने और 62 साल पर नौकरी से निकाली गई आगंनबाडियों को पेंशन, ग्रेच्युटी, सवैतनिक अवकाश आदि सेवानिवृत्ति लाभ देने, प्रदेश में महिला फास्ट ट्रैक कोर्ट व हर विभाग में जमीनीस्तर तक विशाखा कमेटी का निर्माण और महिलाओं पर यौनिक हमले व हिंसा के लिए डीएम और एसपी को जबाबदेह बनाने की मांगों पर मुख्यमंत्री को सम्बोधित मांग पत्र अपर श्रमायुक्त बी. के. राय को सौंपा। इस मांग पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव श्रम और महिला एवं बाल विकास व निदेशक महिला कल्याण को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है। इस अवसर पर 181 वूमेनहेल्प लाइन, महिला समाख्या और आंगनबाडियां अच्छी संख्या में मौजूद रही।

  
प्रदर्शन में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि योगी सरकार का चाल सालों में प्रदेश में महिलाएं बेहाल है। सरकार द्वारा चलाया जा रहा मिशन शक्ति फ्लाप शो बनकर रह गया है। राष्ट्रीयस्तर पर प्रदेश महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा के मामलों में अव्वल नम्बर पर है। जिसका हाथरस कांड़, गोरखपुर के गोला इलाके में अव्यस्क लड़की के शरीर को सिगरेट से दागकर इंसानियत को दहला देने वाले सामूहिक दुष्कर्म, लखीमपुर खीरी में 13 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसकी जबान तक काट डालने, हापुड़ में 06 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और देश की प्रतिभा अमेरिका के कैलिफोनिर्या में पढ़ने वाली 20 वर्षीय सुदीक्षा की दादरी, ग्रेटर नोएडा में छेड़खानी के कारण सड़क दुर्घटना में मृत्यु की जैसी राष्ट्रीयस्तर पर चर्चित तमाम घटनाएं उदाहरण है। इतनी बुरी हालत में भी महिलाओं को जमीनी स्तर पर लाभ देने वाली 181 वूमेन हेल्पलाइन को बंदकर सामान्य पुलिस लाइन में समाहित कर दिया गया। 32 साल से जमीनीस्तर पर घरेलू हिंसा पर काम कर रही महिला समाख्या को बंद कर दिया गया। हजारों आगंनबाडियों को बिना रिटायरमेंट लाभ दिए नौकरी से निकाल दिया गया। आशा, आंगनबाड़ी, मिड डे मील रसोइयों को सम्मानजनक वेतन देने का वायदाकर सत्ता में आई भाजपा सरकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी न्यूनतम मजदूरी देने को तैयार नहीं है। प्रदेश में महिलाओं को वास्तविक लाभ देने की जगह महज प्रचार पर करोड़ों रूप्या बहाया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगों को हल नहीं किया गया तो व्यापक संवाद अभियान चलाकर महिलाओं के बड़े आंदोलन को शुरू किया जायेगा।
कार्यक्रम में वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर, कर्मचारी संघ महिला समाख्या प्रीती श्रीवास्तव, आगंनबाड़ी कर्मचारी यूनियन सीटू की प्रदेश कोषाध्यक्ष बबिता, 181 वूमेन हेल्पलाइन की नेता पूजा पांडेय, आइपीएफ के प्रदेश उपाध्यक्ष उमाकांत श्रीवास्तव, महिला समाख्या की शुगुफ्ता यासमीन, अनिता, निधि खरे, नेहा अरूण, गीता सैनी, अर्चना पाल, रीता राज, रेनूलता, सरिता जायसवाल आदि दर्जनों लोग शामिल रहे।  

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