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गौरी लंकेश के बहाने केजरीवाल और योगेंद्र यादव में एकता

नई दिल्ली। अगर राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं और सब कुछ संभव है तो इसकी संभावना प्रबल दिख रही है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव एक होकर राजनीति करते दिखेंगे और हरियाणा की राजनीति को बदल देंगे। मालुम हो कि पिछले कुछ महीनो में हरियाणा की राजनीति में योगेंद्र यादव की पैठ काफी मजबूत हुयी है और आगामी चुनाव में योगेंद्र यादव की वजह से वहां से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। स्वराज अभियान से जुड़े नेताओं का मानना है कि अगर योगेंद्र यादव की राजनीति के साथ अरविन्द केजरीवाल का साथ मिल जाय तो हरियाणा की राजनीति बदल सकती है। योगेंद्र यादव लंबे समय से हरियाणा में सक्रिय है। वे किसानों से लेकर राज्य में कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते रहे हैं। योगेंद्र और अरविंद्र के बीच आई दूरियों के कारण में एक कारण हरियाणा की राजनीति भी थी। दरअसल, हरियाणा दोनों नेताओं का गृहराज्य है। ऐसे में जब दोनों लोग अलग रहकर राज्य में अपनी जमीन पुख्ता नहीं कर पाये तो अब एक होना ही फायदेमंद नजर आ रहा है। योगेंद्र गुट के कुछ लोग केजरीवाल गुट के कुछ नेताओं के संपर्क में हैं जो दोनों दलों की एकता को लेकर उत्साहित हैं।

केजरीवाल गलतियों से ले रहे हैं सबक

बदली राजनीतिक परिस्थितियों में केजरीवाल अपनी गलतियों से सीखना चाह रहे हैं। केजरीवाल को भी अपनी गलतियों का खामियाजा नगर निगम चुनाव में मिल गया है। आप के ही कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर योगेंद्र यादव आप के साथ रहते तो निगम चुनाव में आप को काफी मजबूती मिलती और पार्टी को जीत भी मिल सकती थी। केजरीवाल को भी लग रहा है कि अगर पार्टी को राजनितिक मजबूती देनी है तो योगेंद्र यादव गुट को मिलाना जरुरी है। यही वजह है कि दोनों पार्टी की तरफ से बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उधर आप से हटाए गए नेता भी पिछले दो साल में अपना अलग मोर्चा और पार्टी बना कर देख चुके हैं कि उन्हें सफलता नहीं मिलने वाली है। सो, वे भी इंतजार कर रहे हैं कि अगर प्रस्ताव मिले तो फिर एकजुट हुआ जाए।

5 अक्टूबर को दोनों दल करेंगे विरोध प्रदर्शन

दोनों दलों में एकता होगी या नहीं इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी हो सकती है लेकिन 5 अक्टूबर को दोनों दलों के नेता पत्रकार गौरी लंकेश की मौत को लेकर साथ साथ बड़ा प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि इस प्रदर्शन में कई और दल भी शामिल हो रहे हैं लेकिन केजरीवाल और योगेंद्र के एक मंच पर आने से एकता की संभावना को बल मिलता दिख रहा है। राजनितिक हलकों में भी इस बात की चर्चा चल रही है कि जिस तरह से केजरीवाल चुप्पी मारे आगे की राजनीति पर नजर गराये हुए हैं और स्वराज अभियान के नेताओं पर कोई टिप्पणी नहीं करते उससे एकता की संभावना बढ़ गयी है।

एकता की संभावना पर अभी है चुप्पी

आप से जुड़े कुछ लोग बता रहे हैं कि अगले साल जनवरी में दिल्ली से राज्य सभा के तीन सदस्य चुने जाने हैं। अगर योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को आप राज्य सभा में भेज दे तो संभव है कि एकता की संभावना बढ़ जायेगी। ऐसा हो भी सकता है लेकिन इस पर अंतिम फैसला तो केजरीवाल को ही लेना है। सूत्रों के मुताविक इस बावत अभी तक केजरीवाल कुछ बोलते नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन पार्टी के कुछ नेता भी केजरीवाल पर दबाब बना रहे हैं कि पार्टी से निकले लोगों को पार्टी में लाया जाय।

माना जा रहा है कि आगामी लोक सभा चुनाव में योगेंद्र यादव की पार्टी हरियाणा में काफी उलटफेर कर सकती है। उधर गुजरात विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी उतरना चाहती है। ऐसे में केजरीवाल और योगेंद्र की राजनीति एक हो जाती है तो दोनों को लाभ होता दिखता है। ऐसे में केजरीवाल भी अब योगेंद्र के प्रति सॉफ्ट होते दिख रहे हैं और योगेंद्र भी राजनीति को समझते हुए एकता की संभावना को तलाश रहे हैं। देखना होगा कि गौरी लंकेश की मौत के बहाने ही दोनों दलों की राजनीति एक हो सकती है ताकि आगामी चुनाव में एक बड़े बदलाव को लेकर राजनितिक जंग शुरू कर सके।

This post was last modified on May 9, 2019 6:34 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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