Sat. Aug 17th, 2019

गोरखपुर विवि में छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज, कई गिरफ़्तार

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गोरखपुर। छात्र संघ चुनाव के लिए सरकार की अनुमति को जरूरी बताने के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के बयान के बाद चुनाव निरस्त करने के विरोध मेंगोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस-पीएसी ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। छात्राओं को भी नहीं बख़्शा गया। पुलिस ने छात्रावासों में घुसकर भी छात्रों की पिटाई की।  पुलिस की इस पिटाई में बीस से भी ज़्यादा छात्र घायल हुए हैं। पुलिस ने इस सिलसिले में  27 छात्रों के खिलाफ नामज़द और 100 अन्य अज्ञात छात्रों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया है। इनमें से कई छात्रों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया है। इससे छात्रों में और गुस्सा फैल गया है।  

उधर छात्रों के आक्रोष को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव की अनुमति के लिए सरकार के पास पत्र भेजा है।

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आख़िर हुआ क्या?

पूरा घटनाक्रम कुछ इस तरह है, दरअसल उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा 8 सितंबर को गोरखपुर आए थे। उन्होंनेछात्र संघ चुनाव कराने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेने को जरूरी बताया जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन 18 सितम्बर को छात्र संघ चुनाव कराने की अपनी ही घोषणा से पीछे हट गया और चुनाव की घोषणा को निरस्त कर दिया। इसकी जानकारी होने पर छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय के  प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन कर रहे थे जिसपर पुलिस व पीएसी ने उनके ऊपर जमकर लाठीचार्ज किया। छात्र-छात्राओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। छात्राएं भी पिटाई का शिकार हुईं। भागकर छात्रावास पहुंचे छात्रों को उनके कमरों में घुसकर पीटा गया। बीस से ज़्यादा छात्र पिटाई से घायल हुए हैं। महिला छात्र नेता अन्नू प्रसाद सहित कई घायल छात्रों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उनके कमरों में तोड़फोड़ की। कुर्सियां, कमरों के दरवाजे, साइकिलें क्षतिग्रस्त कर दी गयी। एक छात्र का आरोप है कि पुलिस ने उसका लैपटाप भी तोड़ डाला। इस घटना के बाद छात्रावास खाली हो गए। दहशतजदा छात्र अपने कमरे छोड़कर भाग गए। छात्रावास परिसर और विवि के प्रशासनिक भवन पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

डिप्टी सीएम के इशारे पर चुनाव रद्द?

उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षामंत्री डॉ. दिनेश शर्मा शुक्रवार, 8 सितंबर को गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में एक कार्यक्रम में शरीक हुए। उनके आने के पहले विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र संघ चुनाव करने की घोषणा की जा चुकी थी और प्रो. संजय बैजल को चुनाव अधिकारी बनाया जा चुका था। चर्चा थी कि 18 सितम्बर को चुनाव होगा। लेकिन विश्वविद्यालय कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से लिंगदोह कमेटी के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद निर्धारित अवधि में चुनाव करा लेने को कहा था। लेकिन विभिन्न कारणों से ऐसा नहीं हो सका। अब बेहद कम समय बचा है। निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन को लेना है। यदि इतने कम समय में लिंगदोह कमेटी के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विवि प्रशासन चुनाव करा सकता है, साथ ही विवि परिसर और शहर की शांति व्यवस्था को सुनिश्चित करने की गारंटी ले सकता है तो चुनाव कराया जा सकता है लेकिन उसे सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी। विवि प्रशासन अपना प्रस्ताव भेजेगा तो सरकार इस पर निर्णय लेगी। डिप्टी सीएम के इतना कहने के बाद पहले से अनिर्णय की स्थिति में चल रहे विवि प्रशासन में छात्र संघ चुनाव को निरस्त कर दिया।

छात्रों में गुस्सा

छात्र संघ चुनाव निरस्त किए जाने की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में छात्र नेता प्रशासनिक भवन पर जुट गए और प्रदर्शन करने लगे। छात्र नेताओं ने दोनों ओर से प्रशासनिक भवन में ताला जड़ दिया। अंदर कुछ छात्र-छात्रायें भी फंसे हुये थे। उन्होंने बाहर निकलने का निवेदन किया तो दरवाजा खोल दिया गया। मना करने के बावजूद छात्रों के साथ कुछ कर्मचारी भी बाहर आ गये। इससे नाराज छात्रों ने उनके साथ हाथापाई की। इसके बाद वहां मौजूद पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज का आदेश मिलते ही पुलिस व पीएसी के जवानों ने बर्बरता पूर्वक छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया।  महिला छात्र नेता अन्नू प्रसाद पर ताबड़तोड़ लाठी चलाई गई।

छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिल देव त्रिपाठी व शिवशंकर गौड़ और बीए तृतीय वर्ष के छात्र शाहरूख खान को भी चोटें आयीं। छात्र भागकर छात्रावास पहुंचे और प्रदर्शन करते हुये मुख्य सड़क जाम कर दिया। जाम के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की फ्लीट को रास्ता बदलना पड़ा।

कुछ देर बाद प्रशासन ने रास्ता खाली कराया। प्रॉक्टर, कैंट इन्स्पेक्टर के साथ बातचीत चल रही थी। इसी बीच पुलिस ने फिर से छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। सैकड़ों की संख्या में पीएसी व पुलिस के जवान छात्रावास में घुस गये छात्रों को पीटने लगे। विरोध में छात्रों ने भी ईंट-पत्थर चलाये। पुलिस ने नाथ चन्द्रावत व विवेकानन्द छात्रावास के अंदर जाकर छात्रों की पिटाई की। छात्रों ने आरोप लगाया कि कमरे से एक-एक छात्र को निकाल कर उनकी पिटाई की गयी।  इसके लिये कमरों के ताले व दरवाजे भी तोड़ दिये गये, कमरे में रखा लैपटाप,  मेज, कुर्सी भी तोड़ दिया गया। खाने पीने का सामान बिखेर दिया गया। इतना ही नहीं छात्रावासों में लगे सीसीटीवी कैमरे व कम्प्यूटर को भी तोड़ दिया गया। पुलिस ने यह सब  छात्रावास के अधीक्षक की जानकारी बिना किया।

पूर्व छात्र नेता विश्वविजय सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में घायल छात्र नेता अन्नू प्रसाद सहित कई छात्र भर्ती हैं। अन्नू प्रसाद को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस कार्रवाई की डर से तमाम घायल छात्र बिना इलाज कराए जिला अस्पताल से भाग गए। विश्वविजय ने बताया कि कैंट थाने में 16 छात्राओं को हिरासत में रखा गया जो लाठीचार्ज में घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव घोषित हो जाने के बाद उप मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव टालने का निर्देश दिया जाना विश्वविद्यालय की स्वायत्ता पर हमला है। यही नहीं छात्रावास अधीक्षक की अनुमति के बिना पुलिस हास्टल में घुसी और छात्रों की बर्बर पिटाई की।

“एबीवीपी की हार के डर से चुनाव रद्द” 

छात्र नेता पवन कुमार ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विश्वविद्यालय परिसर में कमजोर स्थिति के कारण चुनाव को निरस्त किया गया। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन हर हालत में अभाविप को छात्र संघ चुनाव में जिताना चाहता है। यही कारण है कि उसने छात्र संघ चुनाव को टाल दिया। 

पूर्वांचल सेना के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि उप मुख्यमंत्री के तानाशाही फरमान का प्रशाशनिक भवन पर विरोध कर रहे छात्रो को घेरकर बेरहमी से मारा गया। उसके बाद फोर्स को छात्रावास भेजा गया। पुलिस ने छात्रावास का गेट तोड़ डाला। 30 कमरों में घुसकर रूम में रह कर पढ़ रहे छात्रों को पीटा।

छात्रों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा

देर रात कैंट पुलिस ने घटना में 27 नामजद और 100 अज्ञात छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। नामज़द छात्रों में तीन छात्राएं भी हैं। इन सभी छात्रों पर हत्या के प्रयास तक का मुकदमा दर्ज किया गया है। जिससे छात्रों में रोष है। पुलिस ने प्राक्टर गोपाल प्रसाद, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रितेश सिंह  और चौकी इंचार्ज भीखू राय की तहरीर पर धारा 147, 148, 323, 504, 506, 307, 323, 353, 342, 427, 186, 332 और 7 सीएलए में तीन मुकदमे दर्ज किए हैं।

पुलिस ने नामजद शिवेंद्र पांडेय, कपिल त्रिपाठी, मनोज पांडेय, सिद्धार्थ रॉय, पुष्पेंद्र पांडेय, सर्वेश कुशवाहा, अखिलेश पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार छात्रों द्वारा किये गए पथराव में सहजनवां और कैंट इंस्पेक्टर समेत करीब 6 पुलिस कर्मी चोटिल हुए। इंस्पेक्टर कैंट मनोज पाठक के हाथ के अंगूठे में चोट आयी, जबकि इंस्पेक्टर सहजनवां अरुण शुक्ला का पैर चोटिल हुआ। इंस्पेक्टर कैंट का मोबाइल भी इस दौरान क्षतिग्रस्त हुआ। इस मामले में इंस्पेक्टर कैंट ने बताया कि 27 छात्रों को चिह्नित करते हुए 100 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 7 छात्रों को विभिन्न धाराओं में जेल भेजा जायेगा जबकि 11 छात्रों को निजी मुचलके पर मजिस्ट्रेट ने छोड़ दिया। 

(मनोज कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और गोरखपुर न्यूज़ लाइन वेबसाइट के संपादक हैं।)

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