Saturday, October 16, 2021

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गांधी के शराब मुक्त सूबे में पुलिस के संरक्षण और माफियाओं की अगुवाई में बह रही है शराब की समानांतर गंगा

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ओवैस मलिक

अहमदाबाद। अक्टूबर, 2017 की बात है अहमदाबाद के बापूनगर में स्थित मणिलाल माथुर की चाल में रहने वाले बाबूभाई खचेर मोहम्मद कुरैशी से उसी चाल में रहने वाली महिला बुट्लेगर सितारा ने कहा, तुम्हारा घर दो कमरों वाला है एक कमरा हमें किराये पर दे दो, हम उसमें दारू की पेटियां रखेंगे। कुरैशी ने कमरा देने से मना कर दिया तो उसने टॉयलेट जिसका दरवाज़ा बाहर की तरफ था को किराए पर मांगा। सितारा का सुझाव था आप मस्जिद के टॉयलेट को अपने उपयोग में ले लेना। इस अजीब सी मांग को कुरैशी ने हिम्मत से मना कर टॉयलेट में ताला मार दिया। इस पर सितारा ने कुरैशी को धमकी देते हुए कहा कि-

“अब तूं और तेरा परिवार इस चाल में नहीं रह पायेगा।” इस धमकी के बाद अचानक बापूनगर पुलिस स्टेशन से कुरैशी के पास नरेश नाम के पुलिस वाले का फ़ोन आया। फोन पर बताया गया कि तेरे खिलाफ सड़क पर भंगार रखने का केस दर्ज हुआ है पुलिस स्टेशन आ कर मेरे से मिल।”

कुरैशी को बताया गया कि सितारा ने शिकायत दर्ज कराई है। सितारा चाहे तो अर्जी वापस ले सकती है। कुरैशी बिना डरे झिझके कहा सितारा मेरा घर दारू रखने के लिए लेना चाहती है, मैं कभी भी उसे घर नहीं दूंगा। इस पर नरेश ने डराया धमकाया कहा ज़मानत लेना पड़ेगा तो कुरैशी मोहल्ले के मुन्ना भाई पीओपी वाले को ज़मानत के लिए बुला लिया। कुछ देर बिठाए रखने के बाद नरेश ने कहा “अभी जाओ जब बुलाएंगे तो आना कोर्ट से ज़मानत लेनी पड़ेगी।” कुरैशी को दो दिन बाद फिर से बुलाया गया। पुलिस किसी अपराधी को कोर्ट ले जा रही थी, नरेश इन्हें भी कोर्ट ले गया। कुरैशी को दो अन्य अपराधियों के साथ कोर्ट ले जाया गया लेकिन वहां कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं की गई। वास्तव में कुरैशी पर पुलिस द्वारा बुट्लेगर महिला सितारा की बात मानने का दबाव बनाया जा रहा था। सच्चाई यह थी कि झूठमूठ का केस दर्ज किया गया था ।

पुलिस अधिकारी जडेजा

पुलिस कमिश्नर का भी आदेश नहीं माना इंस्पेक्टर जाडेजा ने 

पुलिसिया दबाव काम न आने पर सितारा और उसके भाइयों ने एक दिन कुरैशी के घर पर तलवार और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। कुरैशी डर के मारे दरवाज़ा बंद कर घर में दुबक गए। लेकिन हमला इतना खतरनाक था कि लोहे के दरवाजे पर कुल्हाड़ियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। कुरैशी परिवार सहित जुहापुरा रहने चले गए।

अगले दिन बापूनगर पुलिस इंस्पेक्टर वीजे जाडेजा से मुलाक़ात कर सहायता मांगी। जाडेजा ने कुरैशी की बात को गंभीरता से न लेकर अपना फोन नंबर देते हुए कहा अब सितारा या उसके परिवार के लोग कुछ बोले तो मुझे फोन करना मैं अपना पर्सनल स्टाफ भेजूंगा। कुरैशी को समझ में आ गया कि यहां से कुछ नहीं होने वाला। वह परिवार के साथ शाहीबाग सिटी पुलिस कमिश्नर से मुलाक़ात कर सहायता मांगी तो कमिश्नर साहब ने बापूनगर पी आई जाडेजा से टेलीफोनिक बात कर योग्य कार्यवाही करने का आदेश दिया।कुरैशी वापस बापूनगर पुलिस स्टेशन पहुंचे तो जाडेजा ने सलाह दिया कि आप का घरेलू सामान निकलवा देता हूं आप कुछ समय के लिए हट जाओ यह बहुत खतरनाक लोग हैं।

कुरैशी ने वकील के मारफत लिखित अर्जी डाक के माध्यम से बापू नगर पुलिस इंस्पेक्टर, पुलिस कमिश्नर सहित कई संबंधित विभाग को दी परन्तु कोई कार्रवाई न हो सकी।अर्जी के आधार पर कुरैशी को अजित चौकी पर निवेदन के लिए बुलाया गया। जब वह पहुंचे तो उससे पहले सितारा का भाई आबिद वहां पहले से उपस्थित था। पुलिस की उपस्थिति में आबिद ने कुरैशी को गालियां दी, धमकाया और कहा तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे खिलाफ अर्जी करने की।अब कुरैशी को समझ में आ गया कि चाली और घर भूलने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। वह पुलिस प्रोटेक्शन में घर से रोज़ ब रोज़ उपयोग वाली चीज़ों को अपने ही घर से निकाल कर जुहापुरा चले गए। पुलिस की इस लापरवाही को हम जंगल राज नहीं बल्कि गुजरात मॉडल कह सकते हैं।

बुट्लेगरों ने कुरैशी के बाद अंसारी के मकान पर किया क़ब्ज़ा 

इसी प्रकार कुरैशी के पड़ोसी समीउल्लाह अंसारी के मकान का एक हिस्सा किराये पर लेकर सितारा दारू का गोडाउन बनाना चाहती थी। लेकिन उसने भी देने से मना कर दिया तो सितारा और उसके भाई अंसारी को धमकाने लगे “तेरी पिटाई पुलिस से कराएंगे ज़िन्दगी भर याद रखेगा।” अंसारी की पत्नी को सितारा डराने लगी, झगड़ा करने का बहाना ढूंढने लगी। अंसारी की पत्नी गर्भवती थी जिस कारण अंसारी ने अपनी पत्नी और आने वाले बच्चे की सुरक्षा के लिए पत्नी और बच्चों को उत्तर प्रदेश अपने गांव पहुंचा कर खुद वटवा रहने चला गया। बुट्लेगर परिवार के डर और बाबूभाई कुरैशी के साथ हुए अन्याय के कारण अंसारी को भी पुलिस से कोई आशा न थी।

“हम तेरे पर नहीं तेरी लड़की पर करेंगे जुल्म” ऐसे धमकाती थी सितारा 

सितारा का परिवार मोहल्ले में भय बनाए रखना जनता था। इसीलिए चांदनी आपा को सितारा ने साफ़ कह दिया था –

“औकात में रहना नहीं तो हम तेरे पर जुल्म नहीं तेरे लड़की पर जुल्म करेंगे।”  ऐसा नहीं है कि दारू रखने की जगह देने से सभी लोगों ने मना कर दिया था मोहल्ले के लोग बताते हैं कि सितारा अपने पड़ोस में रहने वाली चप्पल वाले के घर में जबरदस्ती दारू की पेटियां रखती थी। शफीक भाई भंगार वाले डर के कारण अपना एक मकान सितारा को दे दिया था। शफीक भाई का बड़ा भंगार का गोडाउन था। सितारा के परिवार को शफीक भाई हफ्ता देते थे ताकि उनके गोडाउन से यह लोग चोरी न करें। शफीक भाई अपने गोडाउन पर सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा सकते थे क्योंकि सितारा के भाई सिकंदर ने मना कर दिया था। कई लोगों के साथ सितारा के भाइयों ने इसलिए मार-पिटाई की थी। क्योंकि वह अपनी दुकान के बाहर कैमरा लगाना चाहते थे जो वह नहीं चाहते थे। 

उसी चाल में रहने वाली रुखसाना बानो की मोटर साइकिल एक साल पहले चोरी हो गई थी।  पुलिस में रपट भी लिखी गई है, गाड़ी का बीमा भी नहीं था। चोरी के बाद सितारा ने रुखसाना को बताया तुमने हमारा माल पकड़वाया इसलिए हमने तुम्हारे लड़के की गाड़ी को ही गायब कर दी। जाओ पुलिस को बता दो। आज भी रुखसाना के दिल में कसक है, “काश पुलिस ईमानदार होती तो मेरे लड़के की गाड़ी मिल जाती।” रफीउल्लाह अंसारी के बेटे की अपाची मोटर साइकिल तो रात के अंधेरे में आग के हवाले कर लप गयी।  मोटर साइकिल ख़ाक हो गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने आरोपी सितारा के परिजनों से किसी प्रकार की कोई पूछताछ नहीं की।

दलित मुस्लिम एकता मंच के कलीम सिद्दीकी

दलित मुस्लिम एकता मंच ने पुलिस के साथ की जनता रेड तो जाडेजा साहब बनाना चाहते थे पीड़ित को ही आरोपी 

समीउल्लाह अंसारी बुट्लेगर परिवार के डर से  घर छोड़ कर अपने भाई के घर वटवा रहने चला गया। 24 जुलाई को मणिलाल माथुर की चाल में ही रहने वाली एक महिला ने समीउल्लाह अंसारी को फोन कर सितारा के परिवार द्वारा उसके घर का ताला तोड़ कर क़ब्ज़ा कर लेने की खबर दी। साथ ही बताया कि उसके घर में सितारा दारू की पेटियां रख रही है। अंसारी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अंसारी ने दलित मुस्लिम एकता मंच के सह संयोजक कलीम सिद्दीकी को जानकारी दी और मदद मांगी। सिद्दीकी ने तुरंत पुलिस कमिश्नर को लिखित में अर्जी देने को कहा उसके बाद एक और अर्जी बापूनगर पुलिस इंस्पेक्टर को देकर पुलिस के साथ दलित मुस्लिम एकता मंच के साथियों ने जनता रेड कर दारू की छ पेटियां पकड़ी।

अंसारी ने लिखित तौर पर सितारा और उसके परिवार का नाम दिया था। लेकिन इंस्पेक्टर जाडेजा ने अपने जूनियर को बुलाकर अंसारी को आरोपी बनाते हुए FIR दर्ज करने का आदेश दिया। जाडेजा ने कहा सिद्दीकी को पंच बनाओ इन्हें रेड करने और कराने का बहुत शौक़ है। सिद्दीकी के विरोध करने पर जाडेजा ने कहा जिसके घर से दारू पकड़ी गई है उस पर ही FIR दर्ज की जाएगी।

जाडेजा के इस बर्ताव के बाद सिद्दीकी ने वडगाम विधायक जिग्नेश मेवानी से टेलीफोनिक बात चीत की। फोन पर बात करता देख तथा मेवानी का नाम सुनते ही एक कांस्टेबल ने इंस्पेक्टर से जाकर कहा यह तो मेवाणी को बुला रहा है। यह सुनकर इंस्पेक्टर जाडेजा ने सिद्दीकी को केबिन में बुलाया और मेवानी से फ़ोन पर बात की और फिर निर्णय लिया अंसारी को आरोपी नहीं फरयादी बनाओ, लेकिन सितारा के परिवार से किसी का नाम आरोपी में मत डालना जांच में देखा जायेगा। आपको बता दें मेवानी ने पूछे जाने पर बताया कि उसने इंस्पेक्टर को कहा था “आप अंसारी को चाहे आरोपी बनाओ या फरियादी गलत नाम डालने पर हमारे पास B समरी का विकल्प है। मैं 1 तारीख को अहमदाबाद में हूं बापूनगर आऊंगा।” आप को बता दें पांच छ महीने पहले बापूनगर के पड़ोस में स्थित गोमतीपुर पुलिस स्टेशन को मेवानी ने तीन हज़ार लोगों के साथ दारू के मुद्दे पर घेरा था ।जिसके बाद सरकार ने दारूबंदी अमल में लाने के लिए नीतियों को कड़ा किया था।

विधवा का घर लूटा तो भी पुलिस ने नहीं दर्ज की थी FIR 

29 जुलाई को उसी मोहल्ले में रहने वाली जोहरा बानो के 17 वर्षीय बेटे वसीम को सितारा के भाइयों ने अपहरण कर जमुना नगर ले जाकर उसकी पिटाई की। उन्हें शक था कि जोहरा ने ही अंसारी को उसके घर में दारू की पेटी रखे जाने की खबर की थी। अपहरण की खबर फैलते ही जोहरा के रिश्तेदार उसके घर पहुंचे तो सितारा के भाइयों ने तलवार पाइप तथा अन्य घातक हथियारों से हमला कर दिया। जिसमें जोहरा का भांजा सलीम बुरी तरह से ज़ख़्मी हो गया। उसे वाडीलाल हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। शरीर के ऊपरी भाग में गंभीर चोटों के बावजूद 307 का मुक़दमा दर्ज नहीं हुआ। दो दिन बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं  के प्रयत्न से 307 का मुकदमा दर्ज किया गया। ज़ोहरा का परिवार डर के कारण मोहल्ला छोड़ कर चला गया। बुट्लेगर परिवार ने खुले आम ज़ोहरा के घर का दरवाज़ा तोड़ घर लूट लिया।

बापू नगर पुलिस

जब घर लूटा जा रहा था पीसीआर वेन उपस्थित थी। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि जब घर तोड़ रहे थे तो उस समय कांस्टेबल विक्रम मोढवाडिया सब कुछ देख रहा था। लूटने के बाद मोथवाडिया ने अपराधियों से बात की और कहा सामान इधर उधर कर घटना स्थल से आगे पीछे हो जाओ। सबसे बड़ी बात यह कि इसके बाद भी पुलिस ने FIR दर्ज न कर उलटे जोहरा के भतीजे सरवर खान उर्फ़ बच्चा खान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस स्टेशन ले जाकर ऐसी पिटाई की जिससे मानवता कांप जाये। सितारा के भाई एक दिन अंडरग्राउंड रहने के बाद दोबारा उसी मोहल्ला में आ गये जैसे कुछ हुआ ही नहीं। बाबू भाई, समीउल्लाह, जोहरा के अलावा कई परिवार डर से कुछ समय के लिए अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए।

बुट्लेगरों को लगी विधवा की बद्दुआ, मेवानी ने किया सेक्टर का घेराव

पुलिस कमिश्नर का घेराव करने जाते लोग

30 जुलाई को फिर से मोहल्ले वालों ने दलित मुस्लिम एकता मंच के कलीम सिद्दीकी से मिल जिग्नेश मेवानी को दखल देने की अपील की।  यह तय किया गया कि अब बापूनगर नहीं पुलिस कमिश्नर के दफ्तर का घेराव होगा। जिग्नेश मेवानी 1अगस्त को अहमदाबाद में हैं लेकिन वह तभी आयेंगे जब आप अपनी लड़ाई लड़ने के लिए खुद तैयार हो।

लोगों के दिलों से भय निकालने के लिए हसन शहीद दरगाह के इमाम अब्दुल कादिर पठान , फारुक लिफ्ट वाला सहित कई लोगों ने  पीड़ितों को समझाया। इसके बाद 1 अगस्त को 5 आईशर, टेम्पो, बाइक से 1 हज़ार लोग कमिश्नर ऑफिस पहुंचे वहां पर जिग्नेश मेवाणी, कौशर अली, कलीम सिद्दीकी, सुबोध परमार, भारत शाह , राकेश महेरिया, इमरान हल्लाबोल, बबलू राजपूत  सहित 500 दलित समाज के लोग भी शामिल हो गए। कमिश्नर के उपस्थित न होने के कारण मेवानी ने  कांकरिया अधिक कमिश्नर सेक्टर 2 इंचार्ज अशोक यादव की कचेहरी का घेराव किया। घेराव की खबर fb के माध्यम से पूरे शहर में फ़ैल गई। लोकल मीडिया सेक्टर के दफ्तर पहुंचने लगा। अशोक यादव ने तुरंत सभी की fir दर्ज करने और निष्पक्ष जांच का आदेश देकर सभी को बापूनगर पुलिस स्टेशन जाने को कहा। सभी लोग बापूनगर पहुंचे तो वहां पुलिस के कई अधिकारी उपस्थित थे। एक ही दिन में जोहरा सहित अन्य लोगों की भी FIR दर्ज की गई। पुलिस को जैसे ही पता चला कमिश्नर ऑफिस का घेराव हुआ है तो तुरंत बुट्लेगर सितारा को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन अन्य अपराधी फरार हो गए। पुलिस के बल पर गुंडागर्दी करने वाले घर बार छोड़ भाग गए। शायद यह एक विधवा की बद्दुआ का असर था।

……जारी

(ओवैस मलिक एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

(अगली खबर में जानिए किस पुलिस के साथ हुई सिकंदर की मुठभेड़, कैसे सामने आई 23 पुलिस वालों की सितारा के साथ मित्रता और साठगांठ की कहानी, कौन था दारू के कारोबार का असली मालिक, क्यों पुलिस ने उठाया था कलीम सिद्दीकी को, कैसे दी जा रही है वीडियो सन्देश के माध्यम से धमकियां।)

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