पेट की भूख ने 13 साल की बच्ची को बनाया ‘बंधक’, रोटी के बदले मिलती थी पिटाई

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लाख कोशिश के बाद भी बाल श्रम और मानव तस्करी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हरियाणा के गुरुग्राम में झारखंड के सिमडेगा की एक 13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। बच्ची को बीती 7 फरवरी को छुड़ाया गया।

आरोप है कि वो जिस दंपत्ति के घर काम करती थी उन्होंने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया कि मानवता भी शर्मसार हो जाए। दरअसल सिमडेगा की इस बच्ची और उसकी बहन को काम दिलाने के बहाने से उनका खुद का मामा दिल्ली लेकर आया था। इस बच्ची के साथ जो कुछ गुरुग्राम में हुआ वो तो अब सब जानते हैं, लेकिन इसकी बड़ी बहन के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं है ।

बता दें कि बच्ची को ये दंपत्ति चिमटे से दागते थे, उसे खाना नहीं देते थे साथ ही पांच महीने से पैसे भी नहीं दिए थे। यही नहीं उसके शरीर को जगह-जगह ब्लेड से काटा गया था। पति-पत्नी दोनों नौकरी करते थे। पति वर्क फ्रॉम होम कर रहा था, जबकि पत्नी काम करने के लिए ऑफिस जाती थी।

सिमडेगा की यह छोटी-सी बच्ची दिन भर घर का सारा काम करती थी। काम में थोड़ी सी गलती हो जाती, तो उसकी पिटाई कर दी जाती थी। पति-पत्नी दोनों ही उस पर अत्याचार करते थे। बताया जा रहा है कि हरियाणा राज्य बाल कल्याण आयोग को इस बच्ची को बंधक बनाकर उसके बाल श्रम कराने और उस पर अत्याचार के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। सिमडेगा पुलिस अब उसके मामा की भी तलाश में जुट गयी है।

हालांकि इस घटना को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी राज्य पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वो इस मामले में सख्त कार्रवाई करे। घटना के बाद से एक बार फिर बच्चों की मानव तस्करी का मसला सतह पर आ गया है। बच्चों के लिए काम करने वाले कई स्वयं सेवी संगठनों का मानना है कि संसद में जल्द एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग बिल को पारित करवाया जाए।

बच्ची के शऱीर पर प्रताडना के निशान

अगर मानव तस्करी की बात करें तो झारखंड में इसकी फेहरिस्त लंबी है। बता दें कि नवंबर 2022 में ही दिल्ली से 18 बच्चों छुड़ाया गया था। वहीं साहिबगंज जिले के 14 नाबालिगों को भी दिल्ली से मुक्त करवाया गया। इन बच्चों से बातचीत में पता चला कि इनमें से एक 12 साल की लड़की को उसके गांव के ही एक शख्स ने अगवा किया था। एक साल पहले इसे दिल्ली लाकर करीब एक साल तक कई कंपनियों में घरेलू काम कराया गया। बच्ची की ओर से इसका विरोध करने पर उसे बाद में रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया।

हालांकि एक दिन मौका देखकर बच्ची वहां की खिड़की से कूदकर भाग निकली और एक ऑटो वाले की मदद से पुलिस स्टेशन पहुंची। बच्ची ने ये भी बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है और पिता ने दूसरी शादी कर ली है। घर की आर्थिक हालात खराब होने की वजह से गांव का एक आदमी उसे बहला कर गांव से दिल्ली ले आया।

साहिबगंज के 14 बच्चों में से 9 बच्चों को दिल्ली पुलिस के सहयोग से दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मुक्त कराया था। जबकि 5 बच्चों को दिल्ली से मुक्त कराया गया। इसी कड़ी में नवंबर 2022 में रांची जिले के 3 और गुमला के एक नाबालिग को मुक्त कराया गया। नई दिल्‍ली के एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र की नोडल ऑफिसर श्रीमती नचिकेता ने बताया कि चारों बच्चे मानव तस्करी के शिकार होकर अलग-अलग समय पर दिल्ली आए थे। रांची से दिल्ली आए तीन लड़कों को दिल्ली पुलिस ने रेलवे स्टेशन से रिहा कराया था।

ऐसी ही कहानी गुमला जिले से दिल्ली लाई गई लड़की की है। उसे एक कोठी में घरेलू काम करने के लिए बेचा गया था। वहां उस बच्ची से दिन रात काम कराया जाता था। उसके उसे पैसे भी नहीं दिए जाते थे। आखिरकार यातना से तंग आकर बच्ची वहां से भाग निकली। भागने के दौरान किसी की नजर उस बच्ची पर पड़ी, तब उसे रेस्क्यू किया गया।

बता दें कि दिल्ली से मुक्त कराए गए बच्चों को दलालों के माध्यम से लाया गया था। झारखंड में ऐसे दलाल बहुत सक्रिय हैं, जो छोटी बच्चियों को बहला-फुसलाकर अच्छी जिंदगी जीने का लालच देकर उन्हें दिल्ली लाते हैं। घरों में काम पर लगाने के बहाने से उन्हें बेच देते हैं। इससे उन्हें एक मोटी रकम मिलती है।

दलालों के चंगुल में बच्चों को भेजने में उनके माता-पिता की भी अहम भूमिका होती है। कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चे अपने माता पिता, अपने रिश्तेदारों की सहमति से ही दलालों के चंगुल में फंसकर मानव तस्करी के शिकार बन जाते हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट)

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