मनोहर लाल खट्टर के क्षेत्र में स्कूल प्रबंधक और तहसीलदार ने महिला की अस्मत से किया खिलवाड़

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सीएम सिटी करनाल में तहसीलदार के ख़िलाफ़ रेप की एफआईआर दर्ज़ है लेकिन जांच की निष्पक्षता का भ्रम तक बरक़रार रखने की कोशिश नज़र नहीं आ रही है। ऐसे मामलों में नैतिकता का मामूली तकाज़ा भी होता है और ज़रूरी भी कि प्रभावी पद वाले आरोपी को जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए या फिर जिले से बाहर भेज दिया जाए। यह केस करनाल के एक नामी प्राइवेट स्कूल से जुड़ा है। आरोप है कि प्रताप पब्लिक स्कूल के मालिक अजय भाटिया ने अपने स्कूल की एक महिला स्टाफ के साथ पहले ख़ुद रेप किया और फिर भाटिया की ही कोठी पर तहसीलदार राज़बख़्श ने भी इस महिला के साथ रेप किया। इस महिला का आरोप है कि स्कूल की एक उच्च अधिकारी ने भी उसकी मदद करने के बजाय स्कूल मालिक को ख़ुश करने के लिए ही कहा।

करनाल जिला मुख्यालय हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र का मुख्यालय होने की वजह से वीआईपी सिटी है। इस नाते मीडिया की भाषा में सीएम सिटी कहे जाने वाले करनाल की गैंगरैप की इस घटना पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया चौंकाने वाली है। जिले का एक प्रशासनिक अधिकारी इतने गंभीर मामले में आरोपी है तो निष्पक्ष जांच को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं स्वाभाविक हैं। आरोपियों के मुक़ाबले बेहद मामूली हैसियत रखने वाली शिकायतकर्ता ने एफआईआर में भी उल्लेख किया है कि उसे ऊपर तक पहुंच का हवाला देकर ही धमकाया जाता रहा और चुप रहने के लिए मज़बूर किया जाता रहा।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, पुलिस तक ने उसे समझौता कर चुप हो जाने की नसीहत दी थी। हैरानी की बात यह है कि एफआईआर दर्ज हुए एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद आरोपी तहसीलदार राज़बख़्श को जिले से ट्रांसफर तक नहीं किया गया है। महिला संगठनों के मुताबिक, आरोपी प्रभावशाली पद पर हो तो उसके सस्पेंशन या कम से कम ट्रांसफर की कार्रवाई ज़रूरी होती है ताकि शिकायतकर्ता महिला को भरोसा हो सके कि वह जांच को प्रभावित नहीं कर सकेगा। 

शिकायतकर्ता महिला के मुताबिक, उसने करनाल की जरनैली कॉलोनी स्थित प्रताप पब्लिक स्कूल में हिन्दी टीचर की पोस्ट के लिए 2018 में अप्लाई किया था। इस पद पर उसका चयन नहीं हो पाया तो स्कूल के मालिक अजय भाटिया ने उसे स्कूल में एक अन्य पद का प्रस्ताव दिया। उस पद पर पहले से काम कर रही महिला का स्कूल की जुंडला गांव में स्थित शाखा में ट्रांसफर कर दिया। शिकायतकर्ता महिला के मुताबिक, उस वक़्त वह अपनी इस नियुक्ति के प्रस्ताव के पीछे की साजिश को भांप नहीं पाई। उसे स्कूल की उच्च पद पर आसीन महिला अपने ऑफिस में बुलातीं और डॉक्यूमेंट्स साइन करने के लिए भाटिया के दफ्तर में भेजा करती थी।

भाटिया का आवास स्कूल कैम्पस से ही जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक दिन वह फोन पर मिले निर्देश के मुताबिक, भाटिया से मिलने पहुंची तो वह निकर में लेटा हुआ था। भाटिया ने महिला को अपना घर जिले के क़स्बे से करनाल शहर में शिफ्ट करने के लिए कहा ताकि ज़रूरत ज़रूरत पड़ते ही उसे बुलाया जा सके। अपने पति की नौकरी का हवाला देकर उसने असमर्थता जताई तो भाटिया ने उसका हाथ पकड़ कर खींचा और छेड़खानी शुरू कर दी। महिला ने अपने पिता के हमउम्र भाटिया को इस लिहाज़ का हवाला देकर भी गुहार लगाई पर उसने कहा कि वह घर पर कोई नहीं होता है तो फीमेल स्टाफ को इसी तरह बुलाया करता है और उसे नौकरी इसी वजह से दी गई है। स्कूल मालिक ने महिला के साथ रेप किया और रोने पर उसको थप्पड़ मारकर धमकी दी कि उसके ख़िलाफ कोई एक्शन नहीं ले सकता क्योंकि वह पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी `सप्लाई` करता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे परिवार की सुरक्षा को लेकर भी डराया गया।

आरोप है कि पीड़ित महिला काफ़ी दिनों तक मानसिक उत्पीड़न, धमकियों और सेलरी रिलीज होने में बाधाओं की स्थितियों का सामना करती रही। आरोप है कि कुछ महिला कर्मचारियों ने भी उसे फंसाने में भूमिका अदा की। उसका नंबर तहसीलदार को दे दिया गया जो भाटिया का हवाला देकर उसे शहर के एक बड़े होटल में आने के लिए फोन करता रहा पर वह इनकार करती रही। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक दिन उसे सैलरी के सिलसिले में भाटिया से मिलने के लिए कहा गया तो वह वहां पहले से ही मौजूद तहसीलदार राजबख्श के साथ शराब पी रहा था। भाटिया ने उसे तहसीलादर के साथ होटल जाने के लिए कहा और परमोशन, पैसे व वेतनवृद्धि का लालच दिया। मना करने पर तहसीलदार राज़बख्श ने भाटिया की मदद से उसके साथ रेप किय़ा।

पीड़ित महिला का आरोप है कि स्कूल के सुपरिंटेंडेंट बीडी छाबड़ा ने भी उसे आरोपी के रसूख़ का हवाला देकर चुप रहने की सलाह दी थी। आरोप है कि स्कूल की उच्च पदाधिकारी महिला ने भी उसे स्कूल मालिक को ख़ुश करने की नसीहत दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे तरह-तरह से परेशान किया जाता रहा। महिला का आरोप है कि पिछले महीने 8 जून को उसने अपने साथ हो रहे अन्याय के विरोध में शोरशराबा किया तो पुलिस बुलाकर उसके खिलाफ़ ब्लैकमेल की शिकायत की गई। महिला के मुताबिक, पुलिस ने भी उसे आरोपी की ऊपर तक पहुंच का हवाला देकर चुप रहने और समझौते कर लेने के लिए कहा। इस बारे में महिला ने 20 जून को अपने पति को पूरी जानकारी दी तो एफाईआर के लिए पुलिस को दरख्वास्त दी गई। महिला ने अपनी और अपने परिवार की जान के लिए खतरे की आशंका जताई है।

प्रताप पब्लिक स्कूल का मालिक अजय भाटिया महिला के आरोपों को निराधार बता रहा है और उसके ख़िलाफ़ ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज़ करा चुका है। महिला के आरोपों को झूठा बताने वाले लोग शिकायत करने में क़रीब दो साल की देरी, पहली शिकायत में सिर्फ़ मानसिक शोषण और दूसरी में रेप का आरोप लगाए जाने जैसे तर्क दे रहे हैं। दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच के लिए दो अलग-अलग एसआईटटी बनाई गई हैं।

कुछ सममाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में त्वरित जांच की मांग करते हुए सोमवार को आईजी ऑफिस में ज्ञापन दिया ।प्रतिनिधिमंडल में शामिल निफा के चेयरपर्सन सरदार प्रीतपाल सिंह पन्नु ने कहा कि जिस त रह का हमारा सामाजिक ढांचा है और उसमें एक महिला की जिस तरह की घेरेबंदी है, एक महिला के लिए अपने उत्पीड़न के बारे में सार्वजनिक शिकायत करने में काफ़ी समय लग जाना हैरानी की बात नहीं कही जा सकती है। उन्होंने कहा कि आईजी भारती अरोड़ा को महिला होने के नाते ख़ुद इस केस की जांच की निगरानी करनी चाहिए।        

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