सोनभद्र: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में सभी जिलों को शामिल न करने के विरोध में आईपीएफ का प्रदर्शन

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अधिकारी को ज्ञापन देते आईपीएफ के कार्यकर्ता।

लखनऊ। केंद्र की मोदी सरकार का रुख कितना दोहरा है यह बात प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को लागू करने के उसके फैसले में देखी जा सकती है। लॉकडाउन के बाद इस योजना को लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिहाज से सबसे कारगर जरिया माना जा रहा था। और सरकार ने  भी इसी लिहाज से इसका पूरे जोर-शोर से ऐलान किया था। लेकिन जमीन पर जब इस योजना को उतारने की बारी आयी तो पता चला कि सारे जिलों को उसमें शामिल ही नहीं किया गया है।

और दिलचस्प बात यह है कि इस कड़ी में उन सबसे ज्यादा पिछड़े और अविकसित जिलों को ही छोड़ दिया गया जिनकी इसको सबसे ज्यादा जरूरत थी। क्योंकि माना जा रहा है कि शहरों से प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद उनके पास आय का कोई साधन नहीं होगा। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह योजना उनके लिए मददगार साबित हो सकती है। लेकिन अब जिन जिलों में यह योजना ही नहीं होगी उनके मजदूर क्या करेंगे। यह एक बड़ा सवाल बन गया है। इसका नतीजा यह है कि जगह-जगह सरकार की इस आपराधिक साजिश के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। 

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इसी कड़ी में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने आज प्रदर्शन कर सरकार से इस पर जवाब मांगा। इस सिलसिले में फ्रंट और मजदूर किसान मंच ने पूरे प्रदेश में केन्द्र सरकार को पत्रक भेजकर सर्वाधिक पिछड़े, आदिवासी, दलित बाहुल्य सोनभद्र, चंदौली समेत प्रदेश के अन्य जनपदों को शामिल नहीं करने पर प्रतिरोध दर्ज किया। 

इस प्रतिवाद कार्यक्रम के बारे में प्रेस को जानकारी देते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एसआर दारापुरी व मजदूर किसान मंच के महासचिव डा. बृज बिहारी ने आरएसएस-भाजपा की सरकार से सवाल पूछा कि वह बताए कि प्रदेश के अन्य जनपदों के प्रवासी मजदूरों को इस योजना में शामिल न करके उन्हें क्यों बेसहारा छोड़ दिया गया। इस योजना में महज 116 जनपदों को ही शामिल करने पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव हैं और जहां भाजपा की सरकार है ऐसे छः राज्यों के प्रवासी मजदूरों को इसमें शामिल करना राजनीतिक लाभ के लिए नहीं तो और क्या है?

ऊपर से योजना के लिए आवंटित राशि ऊंट के मुंह में जीरा है। आवंटित पचास हजार करोड़ राशि के बारे में जानकारों का कहना है कि इससे एक शख्स को महज ज्यादा से ज्यादा दस दिन का रोजगार मिल सकेगा। तब मोदी जी को बताना चाहिए कि तत्काल रोजी-रोटी के आए इस संकट को दूर करने के लिए उसके पास क्या नया विकल्प है। 

पूरे प्रदेश में हुए कार्यक्रमों में मोदी सरकार से देश के हर जिले को इसमें शामिल करने, प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े सोनभद्र, चंदौली व बुंदेलखंड को शामिल करने, मनरेगा में सालभर काम, सहकारी खेती को बढ़ावा देने, मनरेगा में हाजरी चढ़ाने और बकाया मजदूरी का तत्काल भुगतान करने तथा मुफ्त राशन को तीन माह और बढ़ाने की मांग की गयी। 

इस प्रतिवाद कार्यक्रम को सोनभद्र जनपद के म्योरपुर ब्लाक में कृपा शंकर पनिका, राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, दुद्धी में मंगरू प्रसाद गोंड़, पूर्व बीडीसी रामदास गोंड़, बभनी में इंद्रदेव खरवार, चतरा में जितेन्द्र धांगर व जितेन्द्र गुप्ता, नगवां में कुंज बिहारी, घोरावल में कांता कोल, श्रीकांत सिंह व अमर सिंह गोंड़, राबर्ट्सगंज में महेन्द्र प्रताप सिंह और चोपन में जितेन्द्र चेरो, चंदौली जनपद के अतिपिछड़े क्षेत्र नौगढ़ में रामेश्वर प्रसाद व गंगा चेरो, चकिया में अजय राय, शहाबगंज में मार्कडेंय प्रसाद, सकलडीहा में आलोक राजभर, सीतापुर के मिश्रिख ब्लाक में मजदूर किसान मंच की नेता सुनीला रावत, मछरेटा में अर्चना गौतम, हरगांव में राधेश्याम राज, ऐलिया में राम सागर, महौली में आरसी गौतम, बिसंवा में रोशनी गुप्ता, सकरन में लल्लन वर्मा, परसेंडी में सत्य प्रकाश वर्मा, पिसावों में आशीष कुमार, सिंधौली में अनामिका सिंह, खैराबाद में विमला गौतम, गोंड़ा के कर्नलगंज में साबिर हुसैन, दयाराम वर्मा व आरिफ और परसपुर में कमलेश सिंह एडवोकेट व अमरनाथ सिंह, लखीमपुर खीरी के नकहा ब्लाक में मनीष वर्मा, बहराइच के महसी में राजकुमार सिंह, मऊ में बुनकर वाहनी नेता इकबाल अहमद, इलाहाबाद में युवा मंच के राजेश सचान, आगरा में ई दुर्गा प्रसाद व पूरन यादव, बाराबंकी में आईपीएफ नेता यादवेन्द्र सिंह यादव, लखनऊ में दिनकर कपूर ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। 

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