जस्टिस राकेश कुमार ने फिर संभाला न्यायिक कार्य

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न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों पर न्यायिक आदेश जारी करने से चर्चा में आए पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राकेश कुमार को फिर से न्यायिक कार्य सौंप दिया गया है। जस्टिस राकेश कुमार ने  सोमवार से मुकदमों की सुनवाई शुरू कर दिया है। इस आशय की अधिसूचना हाईकोर्ट की ओर से जारी कर दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, जस्टिस राकेश सोमवार को प्रथम पाली में अपने न्याय कक्ष संख्या-13 में एकलपीठ के मामलों की सुनवाई करेंगे। साथ ही भोजनावकाश के बाद दोपहर 2.15 बजे से जस्टिस अंजनी कुमार शरण के साथ बैठकर खंडपीठ में मामलों की सुनवाई करेंगे। हालांकि जस्टिस राकेश कुमार ने जो वाजिब सवाल उठाये थे उनका कोई जवाब या स्पष्टीकरण चीफ जस्टिस एपी शाही की ओर से अभी तक नहीं आया।

पटना हाईकोर्ट के गलियारों में चर्चा रही कि कि जस्टिस राकेश कुमार के मामले में उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस के हस्तक्षेप के बाद गतिरोध ख़त्म हुआ है और सोमवार से कोशिश यही रही  कि अन्य दिनों की तरह कोर्ट में सुनवाई हो। शनिवार को पटना के चीफ जस्टिस शाही और जस्टिस कुमार दिल्ली में थे। दोनों को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने विवाद सुलझाने के लिए बुलाया था। चर्चा इस बात की भी रही कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने जस्टिस राकेश कुमार एवं स्पेशल कोर्ट का फैसला मंगाया है।

बुधवार को पटना हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार ने न्यायपालिका पर तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि भ्रष्टाचारियों को न्यायपालिका से भी संरक्षण मिलता है। यह भी कहा था कि जब से न्यायाधीश पद की शपथ ली है, तब से देख रहा हूं कि सीनियर जज भी मुख्य न्यायाधीश के आगे पीछे घूमते हैं, ताकि उनसे ‘फेवर’ लिया जा सके। जस्टिस कुमार ने हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार का मामला उठाकर उसकी जांच का भी आदेश दिया। उन्होंने आदेश की कॉपी, देश के चीफ जस्टिस, सीबीआई और पीएमओ भेजने को कहा था।

उनकी इस टिप्पणी पर गुरुवार को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था कि ऐसा लगता है कि पूरे देश में वही सबसे ईमानदार जज हैं। संभव है कि वे व्यक्तिगत कारणों से क्षुब्ध हों, जिस कारण उन्होंने पूरी न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा कर दिया। इसके बाद पटना हाई कोर्ट की 11 न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ  ने जस्टिस कुमार के कृत्य की भर्त्सना करते हुए उनके आदेश को निलंबित कर दिया। इसके बाद से उन्हें किसी एकल या डबल बेंच में शामिल नहीं किया जा रहा था।

जस्टिस कुमार ने पटना हाईकोर्ट में पक रहा भ्रष्टाचार का फोड़ा फोड़ दिया। अब सवाल है कि जस्टिस राकेश रमैया की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर चुके थे। उच्चतम न्यायालय से भी रमैया को राहत नहीं मिली। अंततः  रमैया को  निचली अदालत से जमानत मिल गई। आखिर हाईकोर्ट और उच्चतम न्यायालय  की मनाही के बावजूद रमैया को निचली अदालत से बेल कैसे मिल गई? गौरतलब है कि रमैया बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बहुत नजदीकी नौकरशाह रहे हैं और जदयू के टिकट पर सासाराम से मीराकुमार के खिलफ संसदीय चुनाव लड़ चुके हैं।

जस्टिस कुमार ने एक पुराने मामले पर सवाल उठाया कि जिस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं, उसे मेरी अनुपस्थिति में फुल कोर्ट की मीटिंग में बर्खास्त करने की बजाय मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है। मेरे विरोध को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगता है कि भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण देना हाईकोर्ट की परिपाटी बनती जा रही है।

जस्टिस कुमार  ने जजों के सरकारी बंगले के रखरखाव पर होने वाले खर्च पर भी सवाल खड़े किए। पटना सिविल कोर्ट में एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ था वर्ष 2007 में। रिपब्लिक टीवी ने किया था। इसमें घूस मांगते कई कोर्ट कर्मचारी पकड़े गए थे। मगर मामले में अब तक किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसी मामले में हाईकोर्ट के एक वकील पीआईएल दायर कर पिछले डेढ़ साल से एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। जस्टिस कुमार ने इस मामले में अंतत: स्वतः संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी।

अब तो सब कुछ गुडी गुडी हो गया है फिर भी जस्टिस कुमार के उठाये गए सवालों का जवाब आना चाहिए या नहीं योर ऑनर !

(लेखक जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ कानूनी मामलों के जानकार हैं। आप आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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