Subscribe for notification
Categories: राज्य

राजस्थान किसान आंदोलन : आख़िर क्या खोया, क्या पाया?

राजस्थान के सीकर शहर में चल रहा किसान आंदोलन 14 सितंबर की सुबह सरकार के साथ हुए समझौते के साथ वापस ले लिया गया। किसान अगुआकारों और सरकार के बीच हुआ यह समझौता कई तरह के सवाल छोड़ गया है। सीकर के आंदोलन का वही हश्र हुआ जो इस व्यवस्था के भीतर किसी भी आंदोलन का होता है। किसानों और सरकार के बीच हुआ यह समझौता किस तरह से किसानों की आत्महत्याओं को रोक पाएगा, यह सवाल अभी हल होना बाकी है।

समझौते का हासिल?

1 सितंबर 2017 से राजस्थान के सीकर में चल रहा किसान आंदोलन अंततः कल आधी रात के बाद वापस ले लिया गया। अखिल भारतीय किसान सभा के अमरा राम के नेतृत्व में 11 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से वार्ता के बाद आंदोलन वापस ले लिया और किसानों से जाम खोलने की अपील की।

सीकर शहर में बीते 1 सितंबर से कर्ज माफी समेत 11 मांगों को लेकर किसान महापड़ाव चल रहा था। 30-40 हजार किसानों की भागीदारी वाला यह आंदोलन 13 सितंबर तक व्यापक रूप ले चुका था। 13 सितंबर तक इस आंदोलन में 18 जिलों के किसानों के अलावा, व्यापारी, शिक्षक संघ, ट्रेड यूनियन, डी.जे.यूनियन, ऑटो चालक यूनियन समेत समाज के विभिन्न तबके शामिल हो चुके थे। इस आंदोलन के महत्वपूर्ण पक्षों में से एक था इसमें महिलाओं की भागीदारी। भारी संख्या में महिलाओं ने इस आंदोलन में भागीदारी कर आंदोलन को व्यापक और जोशीला बनाया। 12 सितंबर को सरकार के साथ वार्ता विफल हो जाने के बाद किसान और ज्यादा आक्रोशित हो गए और उन्होंने सीकर से गंगानगर, जयपुर, बीकानेर, नागौर, झुंझनु की तरफ जाने वाली सड़कें जाम कर दी गईं।

अंततः 13 सितंबर के दिन में एक बजे से सरकार के साथ वार्ता शुरु हुई। चार चरणों में यह वार्ता आधी रात के बाद 14 सितंबर की सुबह 1 बजे तक चली। वार्ता खत्म होने बाद 14 सितंबर की सुबह आमरा राम ने वार्ता को सफल बताते हुए किसानों से महापड़ाव समाप्त करने तथा जाम खोल देने की अपील की।

किसानों की थीं 11 मांगें

अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने सरकार के सामने निम्न 11 मांगे रखी थीः

1. किसानों के सम्पूर्ण कर्जे माफ़ किए जाएं।

2. किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाये। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

3. पशुओं के बेचने पर लगाई गई पाबंदी का कानून, 2017 वापस लिया जाये। पशु व्यापारियों की सम्पूर्ण सुरक्षा की जाए।

4. आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए। बछड़ों की बिक्री पर लगी रोक हटाई जाए।

5. सहकारी समिति के कर्जों में कटौती बंद की जाए, सभी किसानों को फसली ऋण दिया जाए.

6. 60 वर्ष की उम्र के बाद किसानों को 5 हजार रूपए मासिक पेंशन दी जाए।

7. बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए.

8. सीकर जिले के वाहनों के जिले में टोल मुक्त किया जाए।

9. सीकर जिले को नहर से जोड़ा जाए।

10. किसानों को खेती के लिए बिजली मुफ्त दी जाए।

11. दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर रोक लगाई जाए। खाद्य सुरक्षा व मनरेगा को मजबूती से लागू किया जाये।

सरकार से समझौता

सरकार के साथ हुई वार्ता में दोनों पक्षों के बीच निम्न समझौता हुआः

क्र.सं.

मांग

विभागीय टिप्पणी

1.

किसानों के सम्पूर्ण कर्जे माफ़ किए जाए।

किसानों के 50,000 रु. तक कर्ज माफी की मांग के संदर्भ में लिए जाने वाले निर्णय के लिए विभिन्न राज्यों यथा उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र, केरल, पंजाब एवं अन्य राज्यों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया एवं इसके राजस्थान की परिस्थितियों के संदर्भ में प्रभाव के अध्ययन, परीक्षण एवं विश्लेषण हेतु, एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ एवं तकनीकि कमेटी गठित किया जाना प्रस्तावित है। जो इस संबंध में समस्त संबंधित पक्षकारों से विचार-विमर्श कर एक माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

2.

किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाये। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

कृषि मंत्री द्वारा स्पष्ट किया गया कि स्वामीनाथन कमेटी टास्क फोर्स की 80 प्रतिशत से ज्यादा सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं;कृषि विकास की समस्त योजनाएं डॉक्टर एम.एस स्वामीनाथन की टास्क फोर्स की सिफारिशों पर ही आधारित हैं। लागत मूल्य गन्ना एवं एम.एस.पी सिफारिशों में संशोधन हेतु भारत सरकार को पुनः निवेदन किया जाएगा। एम.एस.पी खरीद हेतू मंडी टैक्स में रियायत स्वीकार योग्य एवं शीघ्र निर्णय लेकर खरीद 2017 उत्पाद के लिए इसी हफ्ते खरीद केंद्र खोले जाएंगे।

3.

पशुओं के बेचने पर लगाई गई पाबंदी का कानून, 2017 वापस लिया जाये। पशु व्यापारियों की सम्पूर्ण सुरक्षा की जाए।

पशुओं के बेचने पर लगाई गई पाबंदी का कानून, 2017 के क्रियान्वयन पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाई जा चुकी है। पशु व्यापारियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी।

4.

आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए। बछड़ों की बिक्री पर लगी रोक हटाई जाए।

बछड़े की निर्यात हेतु आयु सीमा तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष किए जाने की प्रक्रिया कैबिनेट स्तरीय कमेटी द्वारा की जा रही है। रिपोर्ट शीघ्र आने के प्रयास हैं। गौशालाओं की सुदृढ़ीकरण सतत प्रक्रिया है। प्रायोगिक तौर पर तारबंदी पर अनुदान योजना जारी है। वन अधिनियम में संशोधन हेतू भारत सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी।

5.

सहकारी समिति के कर्जों में कटौती बंद की जाए, सभी किसानों को फसली ऋण दिया जाए.

सहकारिता मंत्री द्वारा स्पष्ट किया गया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 57 हजार करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण वितरित किए गए हैं जबकि विगत सरकार द्वारा समकक्ष अवधि में मात्र 24.87 हजार करोड़ ऋण ही वितरित किए गए थे। इस क्षेत्र में भारत में राज्य का प्रथम स्थान है। वर्ष 2017-18 में ब्याज मुक्त फसलीय ऋण के 15000 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 8803 करोड़ की राशि 21.16 लाख कृषकों को वितरित की गई है। शेष राशि रबी 2017-18 में वितरित की जाएगी।

6.

60 वर्ष की उम्र के बाद किसानों को 5 हजार रूपए मासिक पेंशन दी जाए।

वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत सभी पात्र व्यक्तियों को वृद्ध व्यवस्था पेंशन देय है। पात्रता में संशोधन हेतू उचित स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। मई 2017 से 75 वर्ष तक की आयु हेतु 500 रु. इससे अधिक आयु हेतु 750 रु. प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन देय है। आंदोलनकर्ताओं ने भी स्वीकारा कि 5000 रु. की राशि न भी हो तो सम्मानजनक राशि 2000 पर विचार किया जाना चाहिए।

7.

बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए।

वर्तमान में मनरेगा योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को 100 दिनों का रोजगार दिया जा रहा है।

8.

सीकर जिले के वाहनों के जिले में टोल मुक्त किया जाए।

वर्तमान में स्थानीय वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर दस से बीस किलोमीटर के दायरे में रियायती दर पर पास उपलब्ध कराने का प्रावधान है अन्य मांगों हेतू सक्षम स्तर पर विचार किया जाएगा।

9.

सीकर जिले को नहर से जोड़ा जाए।

सिंचाई मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नहरी तंत्र की क्षमता वृद्धि हेतू राज्य सरकार द्वारा पंजाब सरकार के साथ एम.ओ.यू के तहत कार्रवाई की जा रही है। एवं समय समय पर दिए गए सुझावों पर भी कार्रवाई की जाती है।

10.

किसानों को खेती के लिए बिजली मुफ्त दी जाए।

मीटर श्रेणी के कृषि उपभोक्ताओं को 90 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली दी जा रही है। अन्य जो शिकायतें किसानों की हैं वह स्थानीय स्तर पर वार्ता कर निपटाई जा सकती हैं।

11.

दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर रोक लगाई जाए। खाद्य सुरक्षा व मनरेगा को मजबूती से लागू किया जाये।

दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अत्याचार की संख्या/दर में निरंतर गिरावट आई है एवं राज्य सरकार इसे और कम करने को कृत संकल्प है। कोई प्रकरण विशेष/मुद्दा हो तो उस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।

क्या खोया, क्या पाया?

समझौते के दौरान ऋण माफी के नाम पर 50000 कर्जे की माफी काफी नहीं है। किसानों का एक वर्ग इससे संतुष्ट नहीं है। राजस्थान के नवलगढ़ के श्री चंद डूडी ने कहा कि यह समझौता समझ से परे है। शेखावटी क्षेत्र के किसानों पर ऋण 1 लाख से ज्यादा है। इस क्षेत्र का किसान अगर अपनी एक भैंस बेच दे तो उसे पचास हजार से ज्यादा राशि तुरंत मिल जाएगी।

स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के संबंध में मंत्री महोदय ने कहा कि टास्क फोर्स की 80 प्रतिशत से ज्यादा सिफारिशें लागू की जा चुकी है। यदि ऐसा है तो फिर किसानों की आत्महत्या का कारण समझ पाना मुश्किल है। दूसरा सवाल उठता है कि यदि 80 प्रतिशत सिफारिशें पहले ही लागू की जा चुकी हैं तो क्यों इस देश के किसान संगठन समय-समय पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग उठाते रहते हैं और क्यों सीकर के आंदोलनकर्ताओं ने यह मांग उठाई।

आवारा पशुओं तथा पशु मेलों पर रोक पर राजस्थान सरकार देश में गौ-रक्षा के नाम पर चल रहे आतंक से आगे कुछ नहीं बोल पाई। पशु मेलों पर लगी पाबंदी हटाई तो नहीं जा सकती लेकिन पशु विक्रेताओं की सुरक्षा के इतंजाम की पोल अलवर में हुई पहलू खान की हत्या ही खोल देती है जहां हत्या के आरोपियों को भगत सिंह के समकक्ष रखा गया और उन्हें बहुत आसानी से जमानत भी दे दी गई। आवारा पशुओं के लिए दिया गया समाधान हरियाणा में बन रहे नंदीशालाओं की तरफ लेकर जा रहे हैं। जहां पर किसान फसलों की बिक्री पर हुए नुकसान को झेल रहे हैं वहां सरकार संजीदगी से नंदीशालाओं का निर्माण कर रही है। और यही अब राजस्थान में होता दिख रहा है।

60 से ऊपर के वृद्ध किसानों को पेंशन देने के नाम पर सरकार साफ-साफ टालमटोल करती दिख रही है और हैरानी की बात यह है कि आंदोलनकर्ता इस टालमटोल को सहर्ष स्वीकार करते दिख रहे हैं।

बेरोजगारी की समस्या पर दिया गया सरकार का जवाब न सिर्फ हास्यास्पद है बल्कि सरकार का जनता के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के तरफ रुख को भी दर्शाता है। बेरोजगारी के नाम पर मनरेगा का उल्लेख किया गया जिसकी वास्तविकता से हम सब भली भांति परिचित है।

सीकर को नहर से जोड़े जाने की मांग के संदर्भ में सरकार द्वारा दिया गया जवाब पूरी तरह से भ्रमात्मक है। सरकार द्वारा सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम का कोई वायदा तक नहीं किया गया। पंजाब के साथ होने वाले एम.ओ.यू में कितना पानी मिलेगा और किसानों के हिस्से कितना जाएगा यह बाकी देश में हो रहे एम.यो.यू तथा पानी पर कारपोरेट के कब्जे से सहज समझ सकते हैं। नर्मदा बांध का पानी जो किसानों को मिलने वाला था आज कोका कोला तथा अडानी की कंपनियों को दिया जा रहा है।

किसानों को खेती के लिए मुफ्त बिजली की मांग पर तो सरकार ने पहले से ही दी जा रही रियायत का उल्लेख कर दिया। इससे भी किसान संतुष्ट नहीं हैं।

दलितों अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार में गिरावट के संदर्भ में हम एक बार फिर पहलू खान की हत्या का उदाहरण लेंगे जहां हत्यारों को जमानत तक मिल गई है।

उपरोक्त सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि सरकार ने एक बार फिर किसानों को ठगने की कोशिश की है और आंदोलनकर्ता भी उसके जाल में आ गए। यह समझौता यह दिखाता है कि राजस्थान के यह किसान एक बार फिर छल के शिकार हुए हैं। समझौते के दौरान सरकार ने किसी भी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

13 दिनों से लगातार अपना घर-बार छोड़कर सीकर में जमे इन किसानों ने अपने महापड़ाव के जरिए राजस्थान सरकार की चूलें हिला दीं। यदि किसानों का यह आंदोलन इस तेवर के साथ कुछ और दिनों तक चल जाता तो निश्चित ही सरकार कुछ ठोस कदम लेने पर मजबूर हो जाती। किंतु ऐसे नाजुक समय पर सरकार के साथ ऐसा समझौता फिलहाल समझ से परे है।

सीकर के किसान आंदोलन का वही हश्र हुआ जो इस व्यवस्था के भीतर अधिकारों के लिए चलाए जा रहे किसी भी आंदोलन का होता है। तमिलनाडु और मध्यप्रदेश के किसानों के आंदोलन का उदाहरण हमारे सामने है। एक बार फिर किसानों द्वारा इस आंदोलन में की गई मेहनत पूरी तरह काम नहीं आई। पूरी तरह से अहिंसात्मक और अनुशासनात्मक तरीके से चल रहा यह किसान आंदोलन सरकार को झुका देने का माद्दा रखता था लेकिन आंदोलन और सरकार के बीच हुआ यह समझौता कोई उम्मीद नहीं जगाता है कि अब किसान वापस अपने खेतों में जाकर आत्महत्या करने को मजबूर नहीं होंगे।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on May 9, 2019 11:17 am

Share