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कोचांग के ग्राम प्रधान सुखराम मुंडा की गोली मारकर हत्या

रांची। झारखण्ड के पत्थलगड़ी मामले पर चर्चित खूंटी जिले के कोचांग के ग्राम प्रधान सुखराम मुंडा की 6 जुलाई को उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वे कोचांग बाजार में अपनी दुकान समेटने में जुटे हुए थे। उनके बारे में आदिवासी मामलों के जानकार ग्लैडशन डुंगडुंग का कहना है कि वे बहुत अच्छे और मिलानसार व्यक्ति थे। उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हां उनकी दुश्मनी खूंटी जिला प्रशासन से जरूर थी।

वे अपने गांव की 2.47 एकड़ जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे। डुंगडुंग बताते हैं कि मैंने www.adivasihunkar.com के लिए मार्च में उनका साक्षात्कार किया था, तब उन्होंने ये सब बातें बतायी थी। वे पत्थलगड़ी आंदोलन के एक मजबूत कार्यकर्ता थे लेकिन सरकारी योजनाओं का विरोध करने के खिलाफ थे। कोचांग स्कूल में सीआरपीएफ मौजूद है फिर भी वे गांव में स्थायी पुलिस कैंप बनाने के खिलाफ थे। इसी से आप समझ सकते हैं कि वे कितने निडर और अंदर से मजबूत थे।

खूंटी जिला प्रशासन ने कोचांग गांव की 2.47 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने के लिए फर्जी ग्रामसभा का दस्तावेज तैयार किया था, जिसके खिलाफ सुखराम मुंडा ने ग्रामसभा का आयोजन किया, जिसमें भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद ग्रामसभा के प्रस्ताव के साथ सुखराम मुंडा ने खूंटी के डीसी एवं एलआरडीसी को भूमि अधिग्रहण के विरोध में पत्र लिखा था। इतना ही नहीं उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही एवं फर्जी ग्रामसभा के प्रस्ताव की कॉपी मांगी थी।

सरकारी पदाधिकारी इसमें फंस गये थे। सुखराम मुंडा खूंटी जिला प्रशासन को ही बेनकाब कर रहे थे। यही वजह है कि उन्हें रास्ते से हटाया गया, जिसके लिए संभवतः एसपीओ या स्थानीय अपराधियों का उपयोग किया गया। जहां सीआरपीएफ मौजूद है तथा शनिवार को कोचांग बाजार के दिन सीआरपीएफ के जवान प्रत्येक व्यक्ति की जांच करते रहते हैं। वैसी स्थिति में सुखराम मुंडा को दिनदहाड़े गोली मारना संदेह पैदा करता है।

ग्लैडशन डुंगडुंग सवाल करते हैं कि सीआरपीएफ जवानों को गांव में किनके सुरक्षा के लिए लगाया गया है? जब सीआरपीएफ के जवान ग्रामप्रधान की सुरक्षा नहीं कर सकते हैं फिर वे किनकी सुरक्षा करेंगे? ऐसी स्थिति में कोचांग में सीआरपीएफ कैप की क्या जरूरत है? इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई एवं सुखराम मुंडा के परिवार को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

(रांची से जनचौक संवाददाता विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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