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बिहार के वाम नेताओं ने सरकारों से मज़दूरों और ज़रूरतमंदों को सुविधाएँ देने की माँग की

पटना। बिहार के वापमंथी नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर केंद्र और सूबे की सरकारों से लॉक डाउन के चलते संकटग्रस्त दिहाड़ी, प्रवासी, मनरेगा समेत सभी मजदूरों, दलितों-गरीबों, अन्य कामकाजी हिस्सों, किसानों और जरूरतमंद छात्र-नौजवानों को राशन और अन्य सुविधाएँ देने की माँग की है। नेताओं में भाकपा-माले के राज्य सचिव कॉ. कुणाल, सीपीआई के राज्य सचिव कॉ. सत्यनारायण सिंह और सीपीआई (एम) के राज्य सचिव कॉ. अवधेश कुमार शामिल हैं।

वाम नेताओं ने कहा कि सरकार के प्रयास बेहद कमजोर हैं। बिना कार्ड वाले गरीबों तक तो अभी राशन का एक अंश भी नहीं पहुंचा है, जिसके कारण उनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। कामगार प्रवासियों के भी आधार कार्ड अद्यतन न होने के कारण 1000 रुपए की राशि नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार रूटीन वर्क की बजाय युद्ध स्तर पर काम करे और सबके भोजन की गारंटी करे।

सरकार ने कुछ जगहों पर सामुदायिक किचेन की शुरुआत की है, लेकिन उनकी मांग है कि शहरों में हर वार्ड और प्रत्येक गांव में इस प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नेताओं ने बयान में कहा है कि उन लोगों ने राज्य सरकार से इस महा विपदा की घड़ी में मिलजुल कर काम करने की अपील की है। लेकिन सरकार इसे अनसुनी कर रही है। वह न केवल अपनी मन मर्जी कर रही है बल्कि कोरोना और लॉक डाउन के नाम पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का दमन करने में लगी है। यह बहुत ही निंदनीय है। प्रशासन लगातार दमनात्मक व्यवहार अपनाये हुए है, और गरीबों को राहत देने की बजाय उन पर डंडे चला रहा है। उन लोगों ने इस दमन पर तत्काल रोक लगाने, राहत अभियान में अन्य राजनीतिक पार्टियों- सामाजिक संगठनों को शामिल करने और तत्काल एक सर्वदलीय बातचीत आयोजित करने की मांग की है।

वाम नेताओं ने कोरोना के नाम पर साम्प्रदयिक साजिश रचने, मुस्लिमों के खिलाफ दुष्प्रचार करने और गरीबों पर सामंती जुल्म ढाने की घटनाओं और प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान जहां उम्मीद थी कि सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ेंगे, भाजपा व संघ के लोग दिल्ली तबलीगी का बहाना बनाकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। बिहार के भोजपुर, पश्चिम चंपारण और कई अन्य जिलों से ऐसी खबर मिली है कि संघ के लोग यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि मुस्लिम लोग ही कोरोना फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के जरिये साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश बेहद निंदनीय है। उन्होंने ऐसी प्रवृत्तियों पर लगाम लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सरकार से माँग की है।

एक तरफ मुस्लिमों पर हमला है तो दूसरी ओर सामंती ताकतों ने गरीबों पर और खासकर मुसहर टोलियों पर हमला बोल दिया है। इसमें कई लोगों की हत्या भी हो चुकी है। भोजपुर के सारा मुसहर टोली से लेकर पटना के तिनेरी व अन्य मुसहर टोलियों, जहानाबाद, गोपालगंज आदि जिलों में प्रशासन के संरक्षण में दबंग लोग कोहराम मचाये हुए हैं, गरीबों पर हमले कर रहे हैं, धमकी दे रहे हैं कि कोरोना बीमारी की आड़ में जिंदा जलाकर मार देंगे। बिहार सरकार इन मामलों में तत्काल हस्तक्षेप करे और गरीबों की सुरक्षा की गारंटी करे। प्रशासन शराब के नाम पर गरीबों को लगातार परेशान करने में लगी हुई है।

उनका कहना था कि न केवल आम गरीबों को बल्कि आज देश में जगह-जगह डॉक्टरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। PPE की मांग कर रहे डॉक्टरों को तो सरकार ही निशाना बना रही है। यह बेहद अन्यायपूर्ण है। सुविधाओं के अभाव में बड़ी संख्या में डाॅक्टर संक्रमित हो रहे हैं। सरकार उनकी मांगों की लगातार उपेक्षा करके उनके मनोबल को गिराने का ही काम रही है। अपने राज्य में भी डॉक्टरों के पास कम ही साधन हैं। सभी डॉक्टरों के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की गारंटी करे, ताकि वे भयमुक्त होकर रोगी का इलाज कर सकें। बिहार में कोरोना के केस कम हैं, लेकिन यहां जांच भी बहुत कम है। इसलिये हमारी मांग है कि जांच की संख्या और केंद्र में अविलम्ब बढ़ोत्तरी की जाए।

वाम नेताओं ने कहा कि लॉक डाउन के कारण अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बन्द हो गई हैं। जिसके कारण कैंसर, हृदय और अन्य गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार विगत 2 सप्ताह में ब्रेन स्ट्रोक की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। ये बहुत चिंताजनक है। उन लोगों ने ओपीडी सेवाओं और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी तत्काल बहाल किए जाने की माँग की है।

उनका कहना था कि कटनी की प्रक्रिया में तेजी लाना होगा और इस काम को मशीन की बजाय मनरेगा व अन्य मजदूरों से कराना होगा। मौसमी फलों, सब्जी विक्रेताओं के सामने भी गम्भीर समस्याएं हैं।

वाम नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार हड़ताली शिक्षकों पर दमनात्मक कार्रवाई बन्द करे, उन्हें वेतन प्रदान करे और गतिरोध का हल निकाले।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

This post was last modified on April 10, 2020 7:15 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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