Saturday, October 23, 2021

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5 दिन अपने गांव में ही रहा मनीष गुप्ता की हत्या का आरोपी इंस्पेक्टर, पुलिस कहती रही मिल ही नहीं रहा

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कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता का हत्यारा इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह पांच दिन अमेठी जिले में अपने गांव में छिपा रहा। जबकि दूसरी ओर गोरखपुर पुलिस दलील देती रही कि वो मिल ही नहीं रहा, जबकि गोरखपुर पुलिस उसे खोजने कभी उसके गांव गई ही नहीं।
दरअसल आज जब कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की टीम आरोपी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह के गांव पहुंची और गांव वालों से पूछताछ की तब सरकर पुलिस और हत्या आरोपी की मिलीभगत, बेशर्मी और असंवेदनशीलता की इस पर्देदारी से सच का मुंह दिखा।
दरअसल मामले की जांच के लिये विशेष जांच दल गठित होने के बाद जब जांच टीम गोरखपुर पहुंची तो वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर उपनिरीक्षक राहुल दुबे, मुख्य आरक्षी कमलेश यादव और आरक्षी प्रशांत कुमार को भी आरोपित बनाया गया।

इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ व एसआइटी के नेतृत्व में छापेमारी की गई, लेकिन कोई सफलता मिलते नहीं देख गुरुवार को पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने आरोपी पुलिस कर्मियों की तलाश में छह टीमों को भेजा था। इनमें से एक टीम आरोपी इंस्पेक्टर के अमेठी स्थित मुसाफिरखाना थानाक्षेत्र के गांव नारा पहुंची। स्वजनों ने पहले तो आरोपी इंस्पेक्टर के बारे में कोई भी जानकारी न होने की बात कही, लेकिन जब टीम ने गांव के लोगों से पूछताछ की तो सामने आया कि 29 सितंबर से 3 अक्टूबर तक जगत नारायण सिंह गांव में ही रहा।

इस बीच उसकी तलाश में कोई भी पुलिस टीम गांव नहीं आई। उसके गांव से फरार होने के बाद पुलिस की दबिश पड़ी। इससे इस बात की आशंका ज्यादा है कि दबिश डालने वाली गोरखपुर की पुलिस भी आरोपी इंस्पेक्टर से मिली हुई थी और सूचना लीक करके दबिश के पहले आरोपी को भगा दिया गया।
बता दें कि गोरखपुर पुलिस की बर्बर पिटाई से कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की मृत्यु हो गई थी। मनीष की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता ने इस मामले में गोरखपुर के रामगढ़ ताल के तत्कालीन थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ कराया था।

वहीं राज्य की योगी सरकार ने पीड़ित परिवार को 40 लाख रुपये मुआवज़ा और पीड़िता पत्नी को सरकारी नौकरी की गोली देकर मामले को रफ़ा दफ़ा हुआ मान लिया। उस पर बेशर्मी देखिये कि सरकार ने मरहूम मनीष गुप्ता के परिवार को 40 लाख रुपये और नौकरी देने का अपना विज्ञापन भी दे दिया। विज्ञापन के पोस्टर में योगी आदित्यनाथ आदमकद साइज में छपवाकर न्याय और संविधान को धता बता रहे हैं।

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