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Sunday, September 26, 2021

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झारखंड में प्राथमिक स्कूल के बच्चों का ऑनलाइन शिक्षा एक सपना है : 93.6% बच्चों के पास अपना मोबाइल ही नहीं है

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रांची विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर ज्यां द्रेज एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय सचिव काशीनाथ चटर्जी ने हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री झारखंड सरकार को एक पत्र भेजकर बताया है कि झारखंड में प्राथमिक स्कूल के बच्चों का ऑनलाइन शिक्षा एक सपना है क्योंकि 93.6 % बच्चों के पास अपना मोबाइल ही नहीं है, वे अपने पिता, भाई या परिवार के दूसरे सदस्यों के मोबाइल से क्लास लेते है और उन्हें अधिकतर मोबाइल मिलता ही नहीं और बहुत कम 5.3% ही ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि राज्य की शिक्षा बिल्कुल ठप है। एक सर्वे में सिर्फ 12.8% ने कहा कि उनको ऑनलाइन क्लास में अच्छे से समझ में आता है। सर्वे से पता चला कि अधिकतर बच्चे ज्यादा पढ़ भी नहीं पा रहे हैं और वे पहले का भी काफी कुछ भूल चुके हें।

सर्वे में 93.1 प्रतिशत लोगों ने कहना था शिक्षा के स्तर में इस बीच गिरावट आई है और 92% लोग स्कूल खोले जाने के पक्ष में हैं।

पत्र में झारखंड में स्कूली शिक्षा के संकट की भयावहता की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने और सभी स्कूलों को सावधानीपूर्वक बनाई गई योजना के साथ फिर से खोलने पर बल दिया गया है।

कहा गया है कि जैसा कि आप जानते हैं, झारखंड में प्राथमिक और उच्च विद्यालयों को 17 महीनों के लिए बंद कर दिया गया है, जिसमें कुछ प्रावधान किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा के अलावा भी पढ़ाई जारी रख सकें।

मुख्यमंत्री झारखंड सरकार को संबोधित पत्र में बताया गया है कि भारत ज्ञान-विज्ञान समिति के द्वारा अगस्त महीने की शुरुआत में 17 जिलों के 115 प्रखंडों, 620 पंचायतों और 877 गांवों में 662 वालंटियर के द्वारा एक व्यापक सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण के दायरे में 43.77% किसानी, 30.93% दैनिक मजदूर, 9.89% कृषि के साथ खुद का छोटा व्यवसाय, 4.28% ठेकेदार के पास काम करने वाले कामगार, 1.74% मात्र स्थाई कर्मचारी थे। उपर्युक्त तमाम बातें इस सर्वेक्षण में उभर कर सामने आई हैं।

पत्र में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए, जो की निम्नलिखित सुझावों तक ही सीमित नहीं है-

  • उचित सुरक्षा उपायों के साथ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को फिर से खोलना।
  • इसके लिए स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार, शिक्षकों का टीकाकरण, मास्क व सैनिटाइजर की आपूर्ति सहित इसके लिए सक्रिय तैयारी आदि।
  • घर-घर सर्वेक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाए कि सभी बच्चे फिर से खुलने पर स्कूल लौटें।
  • “परिवर्तन की इस विस्तारित अवधि” के लिए और पिछले 17 महीनों में बच्चों में हुई सीखने में भारी कमी की भरपाई के लिए उन्हें सक्षम करने के लिए पाठ्यक्रम और पेडागोगी में संशोधन।

पत्र में उल्लेखित अंतिम मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है। यदि बच्चों को पाठ्यक्रम और पेडागोगी में किसी भी परिवर्तन के बिना फिर से अगली कक्षा में पदोन्नत किया जाता है (उस कक्षा से दो साल आगे जिसमें वे लॉकडाउन से पहले थे) तो वे स्कूल से ड्राप आउट हो जायेंगे, भले ही वे नाममात्र के लिए नामांकित रहें। क्योंकि जो कुछ भी उन्होंने पहले सीखा था, उसे भी बहुत भूल गए और स्कूल बंद के दौरान भी उनकी ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाई है, इसलिए उन्हें स्कूल में टिकाये रखे जा सकने की संभवाना काफी कम है।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय सचिव काशीनाथ चटर्जी बताते हैं कि ज्ञान विज्ञान समिति के द्वारा 25 अप्रैल 2019 में कोविड-19 का सामना करने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्णय के अनुसार कोविड-19 के विरुद्ध जागरूकता के लिए स्रोत व्यक्तियों का प्रशिक्षण के बाद सभी जिलों में ट्रेनिंग का आयोजन किया गया, जिसमें अभी तक 23,600 स्वयं सेवकों का प्रशिक्षण किया गया है। जब गांव में जाकर जागरूकता का काम शुरू किया गया तो उनके सामने और दो बातें सामने आईं, बच्चों की शिक्षा और रोजगार के संबंध में।

इस बात को लेकर झारखंड के राज्य नेतृत्वकारी साथी निराकरण की बात सोचने लगे। इसी बीच ज्यां द्रेज ने सुझाव दिया कि झारखंड के प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को जानने के लिए एक अध्ययन किया जाए। उनके द्वारा एक सर्वेक्षण फॉर्म भी भेजा गया। कोरग्रुप के साथियों के द्वारा तुरंत उसे हिंदी में ट्रांसलेट किया गया एवं कुछ बिन्दुओं को सर्वेक्षण करने के लिए जोड़ा गया। इससे पूर्व हम लोगों ने चर्चा किया कि किस उद्देश्य के लिए सर्वेक्षण किया जाए। सर्वेक्षण का उद्देश्य कोविड 19 एवं उसके बाद स्कूल बंद होने से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ा है। साथ-साथ अभिभावक प्रबंधन समिति के सदस्य एवं पंचायती राज के प्रतिनिधि क्या सोचते हैं। इस पर संवाद करना भी एक उद्देश्य था।

इसके साथ ही सर्वेक्षण के बाद स्कूल बंद के प्रभाव पर एक रिपोर्ट बनाकर सरकार को सुपुर्द करना और सर्वेक्षण के आधार पर सरकार को परामर्श देने एवं सर्वेक्षण के निष्कर्ष का शिक्षक अभिभावक पंचायती राज के साथ संवाद स्थापित करना, बच्चों को पढ़ाई में मदद करने के लिए कुछ चुने हुए स्थानों में ज्ञान विज्ञान विद्यालय स्थापित करना है।

इस बावत जो प्रक्रिया अपनाई गई

– कोर ग्रुप का बैठक किया गया जिसमें सर्वेक्षण प्रपत्र को अंतिम रूप दिया गया।

– 24 जिलों के स्रोत व्यक्ति का ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

– क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

लक्ष्य:-17 जिलों में पांच हजार परिवारों का सर्वेक्षण प्रत्येक दो दिनों के बाद राज्य स्रोत व्यक्तियों की बैठक कर सर्वेक्षण कार्य का मूल्यांकन किया जा रहा था।

सर्वेक्षण किन टोलों एवं गांवों को चिन्हित कर किया गया-

– आदिवासी टोला

– दलित टोला

– मजदूर धौड़ा

– मुस्लिम टोला

– ओ.बी.सी गांव

सर्वेक्षण की तैयारी की बैठक 24 जुलाई 2021 को किया गया एवं सर्वेक्षण पूरा 10 अगस्त 2021 को पूरा किया गया।

प्रशिक्षण की प्रक्रिया का अध्ययन कर तिथि बार इस प्रकार है:—

24/07/2021 राज्य ज्ञान विज्ञान समिति की कोर ग्रुप का बैठक।

25/07/2021 राज्य की तकनीकी समूह की बैठक।

26/07/2021 राज्य के 24 जिलों के प्रतिभागियों का प्रशिक्षण।

27/07/2021 24 जिलों को 4 भाग में बांटकर क्षेत्रीय स्तर का बैठक।

28/07/2021 राज्य के विभिन्न जिलों के सर्वेक्षण कार्य शुरू।

30/07/2021 झारखण्ड राज्य शिक्षा फोरम का बैठक।

31/07/2021 सर्वेक्षण को लेकर समीक्षा बैठक।

01/08/2021 राज्य कोरग्रुप की समीक्षा बैठक।

10/08/2021 को सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न हुआ।

कुल  जिले                                  17

कुल प्रखण्ड                                 115

कुल पंचायत                               620

कुल गांव                                    877

कुल स्वयं सेवक                            662

कुल घरों तक पहुंच                        5118

सर्वेक्षण का उद्देश्य था:-

-जमीनी हकीकत को समझने के लिए

-नीतिगत हस्तक्षेप की वकालत के लिए

-समुदाय शिक्षकों और स्कूल प्रबन्धन समिति के साथ संवाद करना

-सांगठनिक कार्ययोजना बनाना।

सर्वेक्षण के विश्लेषण के पूर्व झारखण्ड के प्राथमिक शिक्षा पर एक नजर डालना जरूरी होगा।

झारखण्ड राज्य के 95 प्रतिशत छात्र एवं छात्राएं सरकारी प्राथमिक विद्यालय में नामाकित हैं। राज्य में कुल 28,010 प्राथमिक स्कूल और 15,970 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 3,392 माध्यमिक विद्यालय हैं।

कोविड का शिक्षा पर प्रभाव के अध्ययन के लिए हमने 5,118 परिवारों को चुना।

परिवारों का प्रकार:-

69.21 प्रतिशत छोटे परिवार, 15.36 प्रतिशत आक्षित के साथ छोटा परिवार, 14.77 संयुक्त परिवार, 0.66 प्रतिशत अन्य परिवार थे।

परिवार के मुख्य व्यवसाय 43.77 प्रतिशत किसानी, 30.93 प्रतिशत दैनिक मजदूर, 9.89 प्रतिशत कृषि के साथ खुद का छोटा व्यवसाय, 4.28 प्रतिशत ठेकेदार के अंदर कामगार, 1.94 प्रतिशत मात्र स्थाई कर्मचारी थे।

जातिगत स्थिति:-

55.14 प्रतिशत ओ.बी.सी, 21.51 प्रतिशत आदिवासी, 18.21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 5.14 प्रतिशत सामान्य जाति के परिवार हैं।

इस पारिवारिक विश्लेषण से यह स्पष्ट हो जाता है कि हमने आर्थिक एवं सामाजिक रूप  से पिछड़े हुए परिवारों का सर्वेक्षण किया है।

सर्वेक्षण में बच्चों के संबंध में उभरे बिन्दुओं पर अध्ययन

लिंग आधारित:-

45.39 प्रतिशत बालिका, 54.55 प्रतिशत बालक, 0.06 प्रतिशत ट्रान्सजेन्डर।

स्कूलः- 84.27 प्रतिशत सरकारी स्कूल, 16.32 प्रतिशत प्राईवेट स्कूल।

कक्षा आधारितः- 17.24 प्रतिशत प्रथम कक्षा 13.76 प्रतिशत द्वितीय कक्षा, 13.64 प्रतिशत तृतीय कक्षा, 14.38 प्रतिशत चतुर्थ कक्षा, 14.54 प्रतिशत पांचवीं कक्षा, 8.77 प्रतिशत छठी कक्षा, 7.33 प्रतिशत सातवीं कक्षा 6.90 प्रतिशत आठवीं कक्षा, के छात्रों पर कोविड के दौरान शिक्षा पर असर का अध्ययन किया गया।

निम्न प्रश्नों को लेकर हमलोगों ने अभिभावकों एवं छात्रों के साथ संवाद किया-

बीते 30 दिनों में बच्चा कितनी बार अपनी शिक्षक से मिला है ?

38 प्रतिशत एक बार भी नहीं मिला, 29.82 प्रतिशत एक दो बार, 20 प्रतिशत कुछ बार, मात्र 6.88 प्रतिशत ने बताया अनेक बार, 5.22 प्रतिशत बच्चों को पता नहीं है।

क्या बच्चे को स्कूल से इन्टरनेट की सुविधा है ?

85.13 प्रतिशत बच्चों का उत्तर नहीं था, 8.71 प्रतिशत बच्चों ने हां बताया, 5.28 प्रतिशत बच्चों को पता नहीं है।

क्या बच्चा हमेशा पढ़ता है ?

61.90 प्रतिशत ने कहा कभी-कभी, 13.48 प्रतिशत ने कहा कभी नहीं, 2.72  ने कहा पता नहीं, 21.90 प्रतिशत का उत्तर हां में था।

क्या बच्चा अभी निम्न से किस तरीके से पढ़ रहा है- ऑनलाइन या वीडियो से ?

75.79 प्रतिशत छात्रों का जबाब नहीं था, 16.31 प्रतिशत कभी-कभी, मात्र 6.23 प्रतिशत का जवाब हां में था।

क्या बच्चा अभी भी पढ़ रहा है ट्यूशन ?

50.49 प्रतिशत बच्चों का जवाब नहीं में था, 32.22 प्रतिशत बच्चों का जवाब हां में था, 16.39 प्रतिशत बच्चों ने घर पर कहा।

क्या बच्चा अभी किस तरीके से पढ़ रहा है- घर परिवार के सदस्यों की सहायता से ?

37.79 प्रतिशत का जवाब नहीं में था, 38.39 प्रतिशत ने कहां कभी-कभी, मात्र 22.67 प्रतिशत का जवाब हां में था।

बच्चा पिछले तीन महीनों के दौरान निम्नलिखित में से किस तरीके से पढ़ रहा है ?

ऑनलाइन कक्षाएं/वीडियो:-

55.37 प्रतिशत ने नहीं कहा, निजी टयूशन 29.60 प्रतिशत कभी कभी, परिवार या रिश्तेदारी की मदद से घर पर पढ़ाई, बिना मदद के 12.70 प्रतिशत छात्र बिल्कुल नहीं पढ़ रहे हैं।

क्या बच्चा इनमें से किस तरीके का कार्य बीते तीन महीनों में किया है (अपने घर के खेत में कार्य) ?

72.51 प्रतिशत का जवाब नहीं में था, 20.14 प्रतिशत कभी-कभी, 5.14 प्रतिशत का जबाब हां में था।

क्या बच्चा इनमें से किस तरीके का कार्य बीते तीन महीने में किया है (पैसा कमाने के लिए कोई दूसरा काम) ?

90.70 प्रतिशत का जवाब नहीं में था, 4.36 प्रतिशत ने कहा कभी-कभी, 2.31 प्रतिशत को कोई जानकारी नहीं थी।

क्या बच्चे के पास अपना मोबाईल फोन है ?

93.6 प्रतिशत बच्चों के पास मोबाईल फोन नहीं है, 6.4 प्रतिशत बच्चों के पास मोबाइल फोन है।

यदि नहीं है तो बच्चे किसके मोबाईल से क्लास करते हैं ?

35.1 प्रतिशत माता पिता के मोबाइल से, 4.6 प्रतिशत भाई से, 5.5 प्रतिशत रिश्तेदार के मोबाईल से 44.8 प्रतिशत को पता नहीं।

बच्चों ऑनलाइन क्लास करता है या केवल वीडियो के माध्यम से पढ़ता है ?

मात्र 5.30 प्रतिशत ऑनलाइन क्लास करते हैं, 9.42 प्रतिशत अन्य तरीके से, 7.50 प्रतिशत वीडियो के माध्यम से, 7.62 प्रतिशत दोनों माध्यम से, 18.95 प्रतिशत को पता नहीं है।

क्या क्लास करते वक्त नेटवर्क की समस्या होती है ?

11.2 प्रतिशत ने हां में जबाव दिया, 40.5 प्रतिशत कभी कभी, 10.5 प्रतिशत का नहीं में जवाब था, 37.8 प्रतिशत के उसके बारे में कुछ पता नहीं था।

क्या बीते तीन महीने में कभी ऐसा हुआ कि बच्चा ऑनलाइन क्लास नहीं कर पाया, क्योंकि डाटा के लिए पैसा नहीं था।

11.6 प्रतिशत का उत्तर हां में था, 39.7 प्रतिशत कभी-कभी, 17 प्रतिशत नहीं, 31.7 प्रतिशत को पता नहीं।

क्या बीते तीन महीने में कभी ऐसा हुआ है कि बच्चा क्लास नहीं कर पाया क्योंकि वह स्मार्ट फोन को आपरेट नहीं कर पाता।

13.6 प्रतिशत हां हमेशा, 31.9 प्रतिशत हां कभी-कभी, 20 प्रतिशत नहीं, 34.5 प्रतिशत ने बताया पता नहीं।

क्या बच्चे को ऑनलाइन क्लास में अच्छे से समझ में आता है ?

सिर्फ 12.8 प्रतिशत ने हां कहा, 19.7 प्रतिशत ने कहा कभी-कभी, 39.2 प्रतिशत का जवाब नहीं था, 29.2 प्रतिशत को पता नहीं।

क्या आपको लगता है कि पिछले साल लॉकडाउन की शुरूआत के बाद से आपके बच्चे के सीखने का स्तर (जैसे उनके पढ़ने की क्षमता) में सुधार हुआ है या गिरावट आई है ?

93.1 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि गिरावट आई है, मजेदार बात है 2.91 प्रतिशत बेहतर बताया, 2.79 प्रतिशत अपरिवर्तित बताया।

क्या आप इस समय अपने बच्चे के स्कूल को फिर से खोलने के पक्ष में हैं या नहीं हैं ?

92.32 प्रतिशत अभिभावक स्कूल खोलने के पक्ष में हैं, 3.7 प्रतिशत स्कूल खोलने के खिलाफ हैं, 05 प्रतिशत का विचार अस्पष्ट था।

काशीनाथ चटर्जी ने बताया कि इस सर्वेक्षण से संगठन को क्या दिशा निर्देश मिलता है ? सरकार समाज और शिक्षक को भी आगे आना होगा। अत: संगठन समाज एवं सरकार के साथ संवाद बनाने का कोशिश करेगा।

* हम इस सर्वेक्षण के मुख्य बिंदुओं को लेकर झारखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री एवं शिक्षा सचिव के साथ चर्चा करेंगे। बड़ी मात्रा में जो बच्चे भूलने लगे हैं, उनके लिए विशेष कक्षा का आग्रह करेंगे।

* हमारा अगला कदम राज्य से लेकर जिला स्तर तक मीडिया के साथ संवाद आयोजित करना है।

* सर्वेक्षण से उभरे बिन्दुओं को लेकर समुदाय, अभिभावक, शिक्षक, छात्र एवं पंचायती राज प्रतिनिधि के साथ संवाद स्थापति करना है।

* सांगठनिक रूप से झारखण्ड के कुछ जिलों में छात्रों के बीच ज्ञान विज्ञान विद्यालय स्थापित करना है।

* हमारे स्वयं सेवक साथी जब अभिभावक के साथ शिक्षा को लेकर संवाद कर रहे थे उनके सामने जीविकोपार्जन की समस्या विकराल रूप से निकलकर आयी।

उन्होंने बताया कि संगठन दूसरे संगठन एवं कृषि विभाग से मिलकर दीर्घकालीन योजना बनाने का चिंतन कर रहा है।

(झारखण्ड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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