Monday, October 25, 2021

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नीतीश बिहार के 56 हजार मजदूरों की नहीं बचा सके नागरिकताः दीपांकर

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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ बिहार विधानसभा से तत्काल प्रस्ताव पारित करने की मांग पर भाकपा-माले और इंसाफ मंच के बैनर से आयोजित आज के बिहार विधानसभा मार्च में राज्य के विभिन्न कोनों से हजारों आम लोग पटना पहुंचे। इसमें दलित-गरीबों, मजदूर-किसानों, अकलीयत समुदाय के लोगों, महिलाओं और संविधान पर हमले से आहत आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी दिखी।

राजधानी पटना में मौसम के प्रहार को झेलते हुए राज्य के विभिन्न इलाकों में चल रहे अनिश्चितकालीन धरनों से महिलाओं की व्यापक भागीदारी हुई। दरभंगा के लालबाग, किलाघाट, भोजपुर के गड़हनी, आर, पटना के समनपुरा, हारूननगर, मुजफ्फरपुर आदि जगहों से महिलाओं की व्यापक भागीदारी हुई।

देर शाम से ही प्रदर्शनकारियों का जत्था ट्रेनों और बसों से पटना पहुंचने लगा और फिर सुबह में गर्दनीबाग धरना स्थल की ओर मार्च किया। चितकोहरा गोलबंर से 12 बजे भाकपा-माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ नेता स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, धीरेंद्र झा, रामेश्वर प्रसाद, केडी यादव, राजाराम, मीना तिवारी, शशि यादव, इंसाफ मंच के नईमुद्दीन अंसारी, कयामुद्दन अंसारी, आफताब आलम, माले नेता मनोज मंजिल, राजू यादव आदि नेताओं के नेतृत्व में जुलूस निकला।

मार्च गर्दनी बाग धरना स्थल पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। बाद में माले विधायक महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और सत्येदव राम भी शामिल हुए। इसी सवाल पर बिहार विधानसभा के भीतर भी कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया गया। सभा की अध्यक्षता कॉ. धीरेन्द्र झा ने की।

सभा को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार की जनता नीतीश कुमार से कहने आई है कि उनके भ्रम जाल को हम सब अच्छे से समझते हैं। नीतीश जी कह रहे हैं कि बिहार में अभी एनआरसी लागू नहीं होगा। हम कहने आए हैं कि कभी भी एनआरसी लागू क्यों होगा? एनआरसी की भयावहता को हम सबने असम में देखा है। 19 लाख लोग नागरिकताविहीन हो गए। बिहार के 56 हजार मजदूरों की भी नागरिकता इसलिए चली गई, क्योंकि सरकार ने उनका साथ नहीं दिया। एनआरसी भाजपा का एजेंडा है और हम इसे संपूर्णता में खारिज करने की मांग करते हैं।

सीएए के बारे में कहा जा रहा है कि यह नागरिकता देने का कानून है। तो इसमें धार्मिक भेदभाव क्यों किया गया? शरणार्थियों को नागरिकता मिले, इसमें किसी को क्या दिक्कत होगी, लेकिन सरकार अपने नागरिकों को शरणार्थी क्यों बना रही है? एनआरसी और एनपीआर के जरिए नागरिकों को संदेहास्पद बताकर शरणार्थी बनाया जाएगा और फिर उन्हें डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा। यह केवल अकलीयत समुदाय पर नहीं बल्कि गरीबों पर हमला है। हमें उम्मीद है कि इस साजिश को बिहार की जनता नाकाम करेगी।

उन्होंने कहा कि यूपी को दहशतगर्दी के हवाले कर देने के बाद भाजपा-संघ गिरोह अब राजधानी दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने और शांतिपूर्ण आंदोलनों को खून में डूबो देने की साजिशें रच रहा है। 24 फरवरी को दिल्ली में हुई वीभत्स घटना, जिसमें अब तक चार लोगों की हत्या की खबरें हैं, बेहद निंदनीय है। हम भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हैं। भाजपा और संघ गिरोह द्वारा शाहीनबाग व अन्य शांतिपूर्ण आंदोलनों को खून में डूबा देने की साजिश नहीं चलेगी।

अन्य वक्ताओं ने कहा कि अपने नीतीष कुमार ने अपने हालिया बयान में कहा है कि यहां एनपीआर 2010 के ही आधार पर लागू किया जाएगा, लेकिन इससे समस्या हल नहीं होती। 2010 वाले आधार पर भी एनपीआर करने वाले स्थानीय अधिकारी को किसी भी नागरिक को ‘डाउटफुल’ कहने का अधिकार बना रहता है, जो बाद में एनआरसी के लिए आधार बनेगा। इसमें भारी भ्रष्टाचार भी होगा।

कोई भी व्यक्ति किसी भी नागरिक पर सवाल खड़ा कर सकता है। जाहिर है कि दलित-गरीबों और अकलियत समुदाय के ही लोग व्यापक पैमाने पर इसके निशाने पर आएंगे। दूसरी ओर, बिहार में एनपीआर लागू करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। हम इसे तत्काल वापस लेने की मांग करते हैं।

आज के मार्च से कई प्रस्ताव भी लिए गए। पहले प्रस्ताव में पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम सभाओं से सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव लेने, दिल्ली में जारी दहशतगर्दी पर रोक लगाने, भाजपा नेता कपिल मिश्रा को गिरफ्तार करने, जल-जीवन-हरियाली योजना के नाम पर गरीबों को उजाड़ने की नोटिस वापस लेने, सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने के सवाल पर संघर्ष जारी रखने, प्रोन्नति में आरक्षण की गारंटी करने, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर हमला करने वालों को दंडित करने आदि मांगें उठाई गईं।

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