भव्य-दिव्य कुंभ की तैयारी में लगे प्रयागराज विकास प्राधिकरण के बुलडोजर, मंदिर और मकान तोड़कर शहर का सौंदर्यीकरण

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मोदी-योगी शासन में भव्य और दिव्य, ये दो शब्द अब नेता ही नहीं बल्कि अधिकारी भी बोलते हुए दिखाई देने लगे हैं। सरकार के निर्देशों का अक्षरशः पालन को अपना नैतिक धर्म मानने वाले अधिकारी अब ये भी बोलने लगे हैं कि मोदी के शासन में मुआवजे की उम्मीद न रखो। बल्कि उल्टे आपको अगर अपना घर बार बचाना है तो प्राधिकरण की जेब भरो।

इलाहाबाद शहर में आगामी वर्ष होने जा रहे कुंभ को लेकर तैयारियां चल रही हैं। करोड़ों रुपयों का बजट इस शहर के लिए आवंटित कर दिया गया है। सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है जिसकी जद में सालों से रहते आ रहे लोगों का घर भी आ रहा है। विस्थापन के बाद ज्यादातर परिवारों के सामने पुनर्स्थापन का संकट है। कोर्ट कचहरी की दौड़ से भी कुछ संभव नहीं हो पा रहा है।

शहर में स्थित भारद्वाज आश्रम के चारों ओर का क्षेत्र इस बार तोड़फोड़ के चलते खंडहरनुमा हो चुका है। इस क्षेत्र को कब्जा मुक्त कराने के लिए कई सालों से शासन प्रशासन की ओर से निर्देश जारी होते रहे हैं मगर इस साल काम शुरू हो चुका है। आश्रम को भव्य बनाया जायेगा जिसके लिए कई मंदिरों, घरों और दुकानों को तोड़ दिया गया है।

कर्नलगंज क्षेत्र में पड़ने वाला यह आश्रम मुख्य सड़क से बमुश्किल सौ मीटर की दूरी पर है। मंदिर के आस पास दुकानें थीं और पुजारियों के घर। मुख्य द्वार से लेकर मंदिर परिसर तक जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है जिसमे सालों से रह रहे कई परिवार और उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई है। इतना ही नहीं उनके रहने और बसने का भी कोई भरोसा नहीं है कि आगे वो कहां जायेंगे। प्राधिकरण ने उनके मकानों को तोड़ दिया है और उनके घर के सामने ऊंची दीवारें खड़ी कर दी है।

धार्मिक किताबों की दुकान रखने वाले लवनाथ गोस्वामी की दुकान का कुछ हिस्सा टूट गया है और बाकी के सामने प्राधिकरण द्वारा ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई है। लवनाथ गोस्वामी का कहना है कि उनके पास सारे कागजात हैं मगर न तो कोर्ट में सुनवाई हो रही है और न ही नेता अधिकारी उनकी बात सुन रहे हैं। वे प्राधिकरण के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहते हैं – ‘ प्राधिकरण के जोनल अधिकारी मुझसे दस लाख रुपया मांग रहे हैं। उनका कहना है कि मोदी के राज में मुआवजा नहीं मिलता है। मोदी ही कोर्ट हैं और मोदी ही सब कुछ। कुछ लोगों का घर मंदिर परिसर से बिलकुल सटकर था मगर उनसे पैसा लेकर उनका घर छोड़ दिया गया। मेरी दुकान तो गेट के पास थी और मार्ग चौड़ीकरण के नाम पर उसको भी तोड़ दिया गया। अब प्राधिकरण जाओ तो लोग पैसा मांगते हैं। इतनी बड़ी रकम चुकाने में जो असमर्थ है उसके साथ यही हो रहा है।’

जोनल अधिकारी संजीव उपाध्याय का कहना है कि जमीनें नजूल की हैं और सरकार की जमीन हैं जिसे सरकार फिर से ले रही है।

लवनाथ गोस्वामी की ही तरह शिवशक्ति गोस्वामी ने भी बताया कि उनके दुर्गा देवी मंदिर को उजाड़ दिया गया और मूर्ति को खुले में रख दिया गया है। अब प्रोजेक्ट मैनेजर जब भी आते हैं तो वे भी बस आश्वासन देते हैं कि उन्हें उनका मंदिर वापस मिल जायेगा।

आपको बता दें कि भारद्वाज आश्रम परिसर में देवी देवताओं के कई छोटे- छोटे मंदिर थे। मगर भव्य दिव्य परिसर बनाने में उन्हें भी तोड़ दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य मंदिर का अग्र भाग भी तोड़ने की तैयारी है। प्रशासन ने मंदिर के पीछे नया मंदिर खड़ा कर दिया है मगर वे लोग ऐसा नहीं होने देंगे।

पवन गोस्वामी का सहारा उनकी दुकान से होने वाली कमाई ही है। उन्हें भी नोटिस मिल चुका है कि वे अपनी दुकान को हटा लें। ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी का संकट दिखाई दे रहा है।

सरिता मिश्रा राधा रानी मंदिर की देखरेख करती हैं। उनके अनुसार पांच सौ साल पुराने मंदिर को भी तोड़ने के लिए चिन्हित कर दिया गया है। उनके शौचालय को भी तोड़ने की नोटिस मिली है। उनका कहना है कि अब शौचालय को तोड़ दिया गया तो क्या उनका परिवार मंदिर परिसर में शौचालय बनाएगा? सरिता मिश्रा योगी-मोदी की नीतियों से काफी नाराज हैं।

लवनाथ गोस्वामी का कहना है कि इन्हीं दमनकारी नीतियों के चलते भाजपा अयोध्या और प्रयागराज हार गई। अधिकारी करोड़ों रुपए के आवंटित बजट में बंदर बांट करने में लगे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव और जोनल अधिकारी पर खुला घूस मांगने का आरोप भी लगाया है। अगर इसमें सच्चाई है तो यह काफी चिंताजनक है। लवनाथ का कहना है कि इस बार मोहल्ले के करीब पांच सौ वोटर्स ने वोट ही नहीं डाला है। लोगों का गुस्सा इस बार के चुनाव में साफ साफ दिखा है और आने वाले विधानसभा चुनाव में योगी सरकार को जनता उखाड़कर फेंक देगी।

परिसर में चल रहे काम का दौरा करने आए एक प्रोजेक्ट मैनेजर से बात किया तो उन्होंने कुछ साफ नहीं बताया बस इतना कहा कि हम ऊपर से मिल रहे निर्देश का पालन कर रहे है। लोगों का कहना है कि ठेकेदार और मैनेजर शाम को आते हैं और पैसों के लेन देन की बात करते हैं।

मोहल्ले के रहने वाले बृजभान गोस्वामी का कहना है कि उनके पास मंदिरों के पुराने कागज हैं। अगर मंदिर पर हाथ लगाया गया तो वो कोर्ट जाएंगे।

स्थानीय दुकानदार इस बात से डरे हैं कि अन्य धार्मिक जगहों की तरह यहां भी बाहरी लोगों को दुकानें आवंटित कर दी गईं तो परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा। एक तो उनके घरों का मुआवजा नहीं मिल रहा है ऊपर से उन्हें जगह छोड़ देने के लिए विवश किया जा रहा है।

भारद्वाज आश्रम परिसर के आस-पास करीब पचास परिवार हैं। जिनमे से कई के घर पर बुलडोजर चलने की स्थिति बनी हुई है। भव्य और दिव्य कुंभ कराने को प्रतिबद्ध मोदी योगी सरकार और उनके मंत्री अफसर स्थानीय लोगों की किसी भी समस्या को सुनने को तैयार नहीं है।

(इलाहाबाद से विवेक रंजन सिंह की रिपोर्ट)

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