Tue. Feb 25th, 2020

सीएए के खिलाफ सर्वधर्म प्रदर्शनः डर बढ़ता है तो आज़ादी छिन जाती है

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रायपुर। देश भर में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी के खिलाफ चल रहे आंदोलनों में दिल्ली का शाहीन बाग बड़े केंद्र के तौर पर उभरा है। वहां लगातार धरना दे रही महिलाओं के समर्थन में रायपुर का एक चौराहा भी हर रात शाहीन बाग में बदल जाता है।

26 जनवरी को सुबह 6.30 बजे गणतंत्र दिवस के अवसर पर सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में महिलाओं ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस एकजुटता के लिए शीतल केडिया, जैबुन्निसा, चरण कौर तथा अर्चना एडगर के हाथों तिरंगा फहराया गया। वहां मौजूद जनसमुदाय ने राष्ट्रगान गाया। रात भर चले धरना प्रदर्शन के बाद यह आयोजन हुआ।  

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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ही रात 9.30 से ही लोग यहां बड़ी संख्या में जमा होने लगे थे। इसके बाद सारी रात जोशीले नारों, गीतों, नाटक और नाचा गम्मत की प्रस्तुतियां चलती रहीं। बीच-बीच में भाषणों का दौर भी चला। शुरुआत में जन गीतों की प्रस्तुतियों के बाद देश में NRC, CAA के विरोध के आंदोलनों पर विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखी।

दिल्ली विश्वविद्यालय से आईं युवा साथी स्वाति ने इस आंदोलन के अपने अनुभव भी शेयर किए। इप्टा रायपुर का नाटक तानाशाह की प्रताड़नाओं के बाद उसके जाल को तोड़ने का अंत, लोगों ने खूब पसंद किया। दिल्ली तथा मुम्बई से आए यूट्यूब तथा प्रतिरोध आंदोलनों में सक्रिय, युवाओं में लोकप्रिय गायक, कवियों की प्रस्तुतियां सारी रात चलती रहीं।

लोगों का मानना है कि CAA कानून संविधान की मूल भावना के विपरीत है और भेदभाव करने वाला है। जब तक ये कानून वापस नहीं हो जाता तब तक ये विरोध ऐसे ही जारी रहेगा। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि डर बढ़ता है तो आज़ादी छिनती है। ठीक इसी तरह अगर निडरता बढ़ती है तो लोग आज़ाद हो जाते हैं। इसलिए लोगों को निडर होकर लड़ना होगा। CAA के विरोध प्रदर्शन में महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ पहुंचती हैं। उन्हें अपने हक़ के लिए लड़ना आ गया है।

मध्यरात्रि को संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया। इसके साथ ही उपस्थित जनसमुदाय को संविधान की शपथ दिलाई गई। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों, एनआरसी, सीएए और एनपीआर के षड्यंत्रकारी मंसूबों के बारे में व्यापक जानकारियां वक्ताओं द्वारा दी गईं।

दस हजार से अधिक दर्शक समूह की उपस्थिति में शानदार कार्यक्रम विरोध के तेवर को अभिव्यक्त करते हुए चलता रहा। शेखर नाग के जोशीले गीत, निसार अली के नाचा थियेटर के कलाकारों ने आधी रात के बाद खूब रंग जमाया, सुबह प्रो. हेमलता माहेश्वर, अधिवक्ता रामकृष्ण जांगड़े के विचार व्यक्त करने के बाद वरिष्ठ गांधीवादी विचारक प्रो. बालचंद्र कछवाहा का सारगर्भित समापन व्याख्यान हुआ।

इसके बाद जुझारू महिलाओं की जागरूकता, एकजुटता और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रीय एकता को रेखांकित करते हुए ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। संचालन डॉक्टर राजेश अवस्थी ने किया। धर्मराज महापात्र, डॉ. विक्रम सिंघल, विनयशील, रुचिर गर्ग, डॉ. राकेश गुप्ता, पीसी रथ, गौतम बंधोपाध्याय, रिजवान , मिनहाज असद, अखिलेश एडगर जैसे अनेक सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

करीब 23 दिनों से यह धरना प्रदर्शन चल रहा है। शहर के मध्य में इस तरह का विशाल जनसमर्थन बिना किसी राजनीतिक पार्टी की भागीदारी के संभवतः पहली बार हुआ है।

(रायपुर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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