25 करोड़ के सांपों के साथ दो सपेरे गिरफ्तार, वन विभाग के कब्जे में रेड सैंड बौआ सांप

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झारखंड। बोकारो में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रेड सैंड बौआ सांप का तमाशा दिखा रहे दो सपेरों को वन विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जाता है कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में इस सांप की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपए है। होली से ठीक एक दिन पहले दो सपेरे गली-मुहल्लों में घूम-घूमकर कर सांपों का तमाशा दिखा रहे थे। दोनों सपेरों का कहना है कि वे उस सांप की कीमत से अनजान थे।

इस सांप को क्षेत्रीय भाषा में दोमुंहा सांप भी कहा जाता है। बोकारो के जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) रजनीश कुमार के अनुसार गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने दोनों सपेरों को धर दबोचा। अति दुर्लभ दोनों रेड सैंड बौआ सांप को सुरक्षित रांची के जैविक उद्यान में भिजवा दिया गया है।

दोनों सपेरे इस दुर्लभ सांप को कहां से ले कर आए, इस काम में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इस तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है। कई सवालों के बीच एक सवाल ये भी है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि तमाशे के बहाने इन सपेरों को इस सांप के ग्राहक की तलाश थी?

रेड सैंड बोआ सांप अक्सर रेगिस्तानी इलाकों में पाये जाते हैं। इस दुर्लभ प्रजाति के सांपों का इस्तेमाल कई प्रकार की दवाइयां, पर्स, कॉस्मेटिक, कैंसर के इलाज के लिए, नशीली चीज़ें, महंगे परफ्यूम और सेक्स पावर बढ़ाने की दवाओं के लिए किया जाता है। ये सांप असानी से नहीं मिल पाते हैं जिसके कारण इनकी कीमत करोड़ों में है।
इससे पहले बोकारो में रेड सैंड बौआ सांप के कारोबार का मामला जून, 2019 में भी सामने आया था। शहर के सिटी सेन्टर स्थित होटल आनंदा के रूम नंबर- 306 से पुलिस ने रेड सैंड बोआ प्रजाति वाले एक सांप के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया था। अक्टूबर, 2022 में भी बिहार के बेगूसराय जिले के निंगा गांव में एक खेत से यह दुर्लभ प्रजाति का सांप मिला था।

सांप मिलने की खबर ज़िला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सतीश कुमार झा को दी गई थी। जिसके बाद उन्होंने तुरंत वन विभाग से सांप रेस्क्यू करने वाले रंजीत दास को बुलाया तब जाकर इस दुर्लभ सांप को बहुत एहतियात के साथ रेस्क्यू किया जा सका था। इस सांप को लेकर अगस्त, 2022 में भी महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण शहर में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

इन लोगों पर आरोप था कि ये 70 लाख रुपये की रेड सैंड बोआ सांप को बेच रहे थे। खड़कपाड़ा थाने की पुलिस ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कल्याण पुलिस ने जाल बिछाकर घंडारी पुल के पास से आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपी टिटवाला, वाडा, पालघर, मनोर और भिवंडी इलाकों के रहने वाले थे।

भारतीय दंड संहिता और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। बता दें कि रेड सैंड बोआ सांप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत शेड्यूल 5 में आता है। इसका मतलब है कि अगर किसी को दोमुंहा सांप मिलता है तो उसकी जानकारी वह वन विभाग को देगा। उसका डॉक्युमेंटेशन होता है। अगर कोई ऐसा नहीं करता तो यह कानूनन अपराध है।

रेड सैंड बौआ सांप

अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में इन सांपों की बहुत डिमांड है। इस सांप का इस्तेमाल करके सेक्स वर्धक सहित कई अन्य दवाएं बनाई जाती हैं। इतना ही नहीं रेड सैंड बौआ को लेकर कई लोगों में मिथक है। लोगों का मानना है कि रेड सैंड बौआ भाग्य के लिए बहुत अच्छा होता है। कई जगहों पर इसका इस्तेमाल काला जादू के लिए भी किया जाता है। मलेशियन मानते हैं कि जिसके पास दोमुंहा सांप होता है उसका भाग्योदय हो जाता है।

रेड सैंड बौआ सांप को लेकर जो भी मिथ फैले हैं, उनके शिकार कई पढ़े-लिखे लोग भी हैं। लोगों का मामना है कि अनुष्ठानों में इन सांपों का इस्तेमाल करने से रुपयों की बारिश होती है। इन सांपों की तस्करी के लिए कई लोग विदेशों से भारत आते हैं। इन सापों को तस्करों ने कोड दिया है डबल इंजन।

मध्य एशिया के देशों में माना जाता है कि रेड सैंड बौआ सांप का मांस खाने से कई तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। दावा यहां तक है कि इस सांप के मांस से एड्स के मरीज तक स्वस्थ्य हो जाते हैं। माना ये भी जाता है कि इन सांपों के मांस को खाने से पुरुषों में सेक्स पावर बुढ़ापे तक बनी रहती है। चीन में इस सांप के इस्तेमाल से सेक्स वर्धक दवाएं भी बनाई जाती हैं।

वहीं कई तांत्रिक अनुष्ठानों में भी इसका इस्तेमाल करते हैं। आदिम कबीलाई मानते हैं कि इन सांपों को लेकर अनुष्ठान करने से वह सर्वशक्तिमान ईश्वरीय ताकत को भी अपने कंट्रोल में कर सकते हैं। यह सांप बालू के नीचे छिपा रहता है और उसका सिर सिर्फ बालू के बाहर नजर आता है, और जैसे ही शिकार इसके करीब आता है, यह उस पर हमला कर देता है। इस वजह से इसका नाम सैंड बोआ पड़ा है।

इसकी आंखें अनाकोंडा की तरह इसके सिर पर होती हैं। इसको पालतू भी बनाकर रखा जा सकता है। एक छोटे से टैंक में बालू की एक परत बिछाकर उसके नीचे इसे रखा जा सकता है। इसको गर्म रखने के लिए पास में एक छोटा हीट पैड या छोटा हीट लैंप रखा जा सकता है।

ये सांप बहुत सुस्त होते हैं इसलिए इन्हें पकड़ना बहुत आसान होता है। ये सांप जहरीले नहीं होते हैं। इनका आकार मोटा होता है और बहुत धीमे रेंगते हैं। इनमें फुर्ती बिल्कुल नहीं होती है। जिस कारण ये जल्दी भाग नहीं पाते हैं। ठंड के दौरान रेड सैंड बौआ खुद को बचाने के लिए चूहे के बिल में छिप जाते हैं। कहते हैं कि ये अपना बिल तक नहीं बनाते हैं।

ये चूहों को उनके बिल में घुसकर खाते हैं और बिल पर कब्जा जमा लेते हैं। ये दूसरे सांप को भी खा लेते हैं लेकिन इसमें जहर नहीं होता है। मादा रेड सैंड बोआ 6 से 8 की तादाद में बच्चे देती हैं। इसकी पूंछ मुंह की तरह दिखती है, इसलिए इसे दोमुंहा सांप भी कहा जाता है। एक दोमुंहे सांप की उम्र लगभग 15 से 20 साल तक होती है।

(बोकारो से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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