राम मन्दिर भूमि घोटाले की सक्षम एवं विश्वसनीय निकाय करे समयबद्ध जांच : भाकपा

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लखनऊ। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के जांच की मांग तेज हो गयी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) एवं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (एआईपीएफ) ने एक बयान जारी कर पूरे मामले के जांच की मांग की है।

भाकपा, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए जमीन खरीदने में हुये घोटाले के आरोप यदि सही पाये जाते हैं तो ये एक ऐसा अपराध है जिसके लिए अपेक्षित दंड शायद दंड प्रक्रिया संहिता में भी दर्ज नहीं है। यह आस्थावानों द्वारा आस्था के वशीभूत हो अपनी खून पसीने की कमाई से दिये गये धन के बंदरबांट का मामला है जिसे आस्था और धार्मिक भावनाओं का दोहन कर सत्ता हथियाने वाला एक समूह कर रहा है। अतएवं मामले की पारदर्शिता के साथ जांच करा के दोषियों को ऐसी सजा दी जानी चाहिए कि दोबारा कोई भी लोगों द्वारा आस्थापूर्वक अर्पित धन का गोलमाल न कर सके।

भाकपा ने कहा कि यह मामला इसलिये और भी पेंचीदा हो गया है कि आरोपों का सीधा जवाब देने के बजाय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ढींठता के साथ कहा कि हम आरोपों की चिन्ता नहीं करते। हम अपना काम कर रहे हैं। पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद अपना पक्ष रखेंगे।

भाकपा ने सवाल उठाया है कि ट्रस्ट के 16 करोड़ रुपये के इस घोटाले पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय आखिर चंपत राय किस चीज के अध्ययन की बात कर रहे हैं।

आरोप है कि ट्रस्ट द्वारा 10 मिनट पहले खरीदी गयी दो करोड़ की जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट 18. 5 करोड़ रुपये से करा लिया गया। बैनामा व रजिस्ट्री एक ही दिन हुयी और दोनों में गवाह रहे ट्रस्टी डा. अनिल मिश्रा एवं अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय।

प्राप्त विवरण के अनुसार अयोध्या में गाटा संख्या 243, 244 तथा 246 की जमीन की मालियत 5 करोड़ 80 लाख रुपए है। इसका पहले दो करोड़ रुपये में बैनामा किया गया और पांच मिनट बाद ही ट्रस्ट ने इसे 18. 5 करोड़ में खरीद लिया। यानी जमीन की दर 5 लाख रुपये प्रति सेकेण्ड बढ़ गई।

आरोप है कि अयोध्या के बाग विजेश्वर में स्थित 12080 वर्ग मीटर जमीन का बैनामा इसी साल 18 मार्च, 2021 को शाम 07: 05 बजे बाबा हरिदास ने व्यापारी सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी को दो करोड़ रुपये में किया था। इसके 10 मिनट बाद 7: 15 बजे इसी भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 18. 5 करोड़ रुपये में करा लिया। ट्रस्ट ने 17 करोड़ रुपये सुल्तान व रवि के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किये हैं।

सवाल उठता है कि जब पहले से ही इस जमीन का रेट ट्रस्टी और महापौर को मालूम था तो ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गयी कि दो करोड़ में बैनामा करायी जमीन को 10 मिनट बाद ही 18. 5 करोड़ रुपये में खरीदना पड़ा। सवाल यह भी उठता है कि आस्थावानों से एकत्रित इस धन को कैसे मुट्ठीभर लोग बिना दानदाताओं को विश्वास में लिये मनमाने तरीके से इधर उधर कर सकते हैं।

भाकपा ने कहा कि यह आस्था और धर्म की आड़ में बड़े कदाचार/ भ्रष्टाचार का मामला है। भाकपा उत्तर प्रदेश माननीय सर्वोच्च न्यायालय व महामहिम राष्ट्रपति से अनुरोध करती है कि इस संगीन प्रकरण की जांच न्यूनतम समयावधि के भीतर किसी सक्षम और विश्वसनीय निकाय से करायी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट कराएं एसआईटी से राम मंदिर घोटाले की जांच : आइपीएफ

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय टीम ने राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा हुए भूमि घोटाले समेत ट्रस्ट द्वारा किए सभी आय-व्यय की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी एसआईटी से कराने की मांग की है। आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस. आर. दारापुरी के मुताबिक प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा-आरएसएस की सरकारें देश की जनता को यह बताने की जगह कि चंद मिनटों में 2 करोड़ की सम्पत्ति राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा 18.5 करोड़ में कैसे खरीदी गई और कौन इसके गुनाहगार हैं दोषियों को बचाने में लगी हुई है।

प्रस्ताव में कहा गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट ने राष्ट्रपति से लेकर आम आदमी तक चंदा लिया गया है और सरकारी धन का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में इस तरह का भूमि घोटाला आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद द्वारा जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ है। अभी तक जो रिपोर्ट मिल रही है अयोध्या में जमीन की खरीद-बिक्री में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है जिससे किसानों में बड़ा विक्षोभ है। इसलिए राम मंदिर निर्माण में हो रहे आय-व्यय को पारदर्शी बनाने व इस तरह के घोटाले पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी बनाना आवश्यक है।

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