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आम बजट: पंजाब में चौतरफा नाखुशी

केंद्रीय बजट में पंजाब को निराशा के सिवा कुछ नहीं मिला। समाज का हर वर्ग 2020 के आम बजट से सख्त नाखुश है। राज्य सरकार को भी उम्मीद थी कि बजट में ऐसे प्रावधान रखे जाएंगे जो गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे इस सरहदी सूबे को फौरी राहत देंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि यह बजट पंजाब का आर्थिक संकट और ज्यादा गहरा करेगा।

इंडस्ट्री लिस्टों, व्यापारियों और किसानों, सबकी उम्मीदें केंद्रीय बजट ने तोड़ दी हैं। राज्य के नामी अर्थशास्त्री भी मानते हैं कि बजट पंजाब के लिए नागवार साबित होगा, क्योंकि केंद्र प्रायोजित कुछ योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए मुफीद नहीं हैं।

केंद्रीय बजट से पंजाब का जीएसटी शेयर 1200 रुपये तो घटेगा ही, केंद्रीय योजनाओं में भी 5000 करोड़ रुपये की कटौती होगी। आर्थिक मामलों के माहिर डॉक्टर पीएल गर्ग के मुताबिक, “केंद्र प्रायोजित योजनाओं में मिलने वाली रकम में भी केंद्र ने 10 फ़ीसदी कटौती की घोषणा की है। यदि यह कटौती पंजाब को मिलने वाली योजनाओं पर भी लागू हुई तो राज्य सरकार को केंद्र से 5000 करोड़ रुपये कम मिलेंगे।

पिछले बजट में राज्य को जीएसटी से 4031 रुपये, कार्पोरेशन टैक्स से 4313 करोड़, आयकर के रूप में 3624 करोड़, कस्टम टैक्स के रूप में 836 करोड़ और यूनियन एक्साइज टैक्स के रूप में 514 करोड़ रुपये हासिल हुए थे। नए बजट से इनमें गिरावट आएगी।”

पंजाब सरकार के पूर्व वित्तीय सलाहकार और प्रख्यात अर्थ विशेषज्ञ डॉक्टर सरदारा सिंह जौहल कहते हैं, “केंद्रीय वित्त मंत्री ने देश को एकाउंटिंग डिटेल में उलझाया है। केंद्र पहले ही पंजाब को जीएसटी का पूरा हक अथवा हिस्सा नहीं दे रहा। अब राज्य का आर्थिक संकट और ज्यादा बढ़ेगा।”

पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। किसान इस बजट से निराश और नाखुश हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल के अनुसार, “बजट में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया है, जबकि सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक देश के किसान परिवारों की औसत आमदनी 1666 रुपये प्रति किसान परिवार है। यदि सरकार इतनी कम आमदनी को दोगुना कर भी दे तो एक किसान परिवार की आमदन केवल 3332 रुपये बनती है।

आमदनी दोगुनी करने के दावे महज गुमराह करने वाले हैं।” सरदारा सिंह जौहल भी ऐसा मानते हैं। वह कहते हैं, “केंद्रीय बजट में कृषि को लेकर रोडमैप की कमी दिख रही है। कृषि के लिहाज से बजट कुल मिलाकर निराशाजनक है। सरकार ने दो साल में कृषि आय दोगुनी करने की बात की है। यह एक जुमला ही है। व्यवहारिक नहीं। भंडारण की क्षमता बढ़ाने तथा भंडारण सुविधाएं देने की जरूरत है। भंडारण की कमी के चलते फसलें खराब हो रही हैं।

इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा। किसान रेल चलाने से लोगों को डिलीवरी तेज मिलेगी, लेकिन फल, सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थों की संभाल के लिए कोल्ड चेन समेत केंद्रीय स्तर पर अन्य ढांचागत विकास अपरिहार्य है। कृषि उड़ान सेवा से उत्पादों की कीमत बढ़ जाएगी। विदेशों में प्रोसेस्ड फूड सस्ता है और ताजा महंगा, लेकिन देश में यह उलटा है। यहां ताजा खाद्य पदार्थ सस्ता और प्रोसेस्ड महंगे हैं। कुल मिलाकर बजट में कृषि को गति देने के लिए कोई बड़ा या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।”

गौरतलब है कि राज्य सरकार बजट से कृषि संकट और किसानों को बदहाली से बाहर निकालने के लिए किसी बड़ी घोषणा का इंतजार कर रही थी, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पराली से निपटने के लिए किसानों को दिए जाने वाले 100 रुपये प्रति क्विंटल पर केंद्र सरकार ने मौजूदा बजट में कुछ नहीं किया।

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल कहते हैं, “2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया है, लेकिन प्रस्तुत बजट किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में जाता हुआ नहीं दिखाई पढ़ रहा। किसानों की आय का एक बड़ा हिस्सा उन पर चढ़े कर्ज के बोझ को उतारने में ही निकल जाता है। ऐसे में बचे हुए पैसे से उन्हें संकट से कैसे निकाला जा सकेगा, इसका जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं।”

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुताबिक बजट में पंजाब के साथ साफतौर पर सौतेला व्यवहार किया गया है।

उधर, पंजाब के कारोबारी भी बजट से नाखुश हैं। इंडस्ट्रियल एंड ट्रेडर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्विनर गुरशरण सिंह कहते हैं, “बजट को इंडस्ट्री का बजट तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। महज इनकम टैक्स की छूट से उद्योग-धंधे नहीं बच सकते। बजट में किसी भी इंडस्ट्री के लिए कोई नया प्रावधान नहीं किया गया है। इंडस्ट्री के लिए 27 हजार करोड़ और एमएसएमई में शॉर्ट टर्म लेने का कोई नया प्रावधान नहीं किया गया, यह पुराना प्रावधान ही है। सिर्फ नाम बदल देने से कुछ नया नहीं हो सकता। बजट ने निराश किया है।”

एवन साइकिल लिमिटेड के चेयरमैन ओंकार सिंह पाहवा के मुताबिक, “इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ खास नहीं किया गया। रोजगार में इसी से इजाफा होना था।” ड्यूक फैशन लिमिटेड के कोमल जैन के अनुसार, “बजट ने कंफ्यूज कर दिया है। कार्पोरेट सेक्टर समझ नहीं पा रहा कि किसको क्या मिला।” हीरो साइकिल लिमिटेड के एमडी एसके राय भी कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस होना जरूरी था लेकिन नहीं हुआ।

बैंकों में जमा धनराशि के बीमे की बाबत फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन ऐसोसिएशन, जालंधर के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह सग्गू कहते हैं, “अब तक तो लोग यही समझ रहे थे कि बैंक में पड़ा हुआ सारा पैसा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार ने खुद ही बता दिया है कि पहले जिम्मेदारी एक लाख रुपये की थी और अब 5 लाख रुपये की है। दो लाख से ज्यादा घर पर नहीं रख सकते और पांच लाख से ज्यादा की गारंटी बैंक देगा नहीं। फिर तो पैसा दीवारों में ही छुपा कर रखना पड़ेगा!’

एशिया के मैनचेस्टर और राज्य की आर्थिक राजधानी लुधियाना के कारोबारी बजट से पूरी तरह निराश हैं। उनके हाथ कुछ नहीं लगा है। बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए कोई घोषणा नहीं होने से 60 हजार एमएसएमई इंडस्ट्री सकते में है। साइकिल, हैंडलूम, होजरी, फास्टनर सहित कई अहम उत्पादों का निर्माण करने वाले उद्योगों को इस बजट में आर्थिक हालात के मद्देनजर विशेष रियायतें मिलने की उम्मीद थी। विशेष तो क्या आमली आए थे भी नहीं दी गईं।

जीएसटी दरों में कटौती, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए इनोवेशन को लेकर टेक्नॉलॉजी अपग्रेडेशन फंड और स्किल डेवलपमेंट को लेकर विशेष योजनाओं की उम्मीद कारोबारियों ने लगा रखी थी, लेकिन इन सबको नजरअंदाज कर दिया गया। टैक्स में राहत को लेकर भी विकल्प का प्रावधान किए जाने से असमंजस की स्थिति बन गई है।

ऑल इंडस्ट्री ट्रेड फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल कहते हैं, “कई स्कीमों का फंड कम कर दिया गया है। ऐसे में एमएसएमई सेक्टर को बूस्ट नहीं मिलेगा। रियायतें कम करने से नुकसान होगा। लघु उद्योगों को विशेष राहत दिए जाने की उम्मीद थी, जो नहीं दी गई।”

पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ के मुताबिक, “केंद्रीय बजट में पंजाब की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। राजग सरकार ने अपने जितने भी बजट पेश किए हैं, उनमें पंजाब की घोर उपेक्षा की गई। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया है और न ही पंजाब की बीमार इंडस्ट्री के लिए जरूरी कदम उठाया गया।”

राज्य के प्रख्यात अर्थशास्त्री आरएस घुम्मण का कथन जिक्रेखास है, “पंजाब के किसान जिस आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं उसे देखते हुए केंद्र को विशेष कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया जबकि राज्य में कर्ज के चलते किसान आए दिन खुदकुशियां करने को मजबूर हैं। किसान कर्ज को लेकर केंद्र ने कोई घोषणा नहीं की।

फसल विविधता को लेकर पंजाब को जो राहत दी जानी चाहिए थी, उसको देखा ही नहीं गया। नाबार्ड की योजनाओं का भी पंजाब को कोई लाभ नहीं है। मंडी गोविंदगढ़ स्थित लोहे की इंडस्ट्री या लुधियाना होजरी इंडस्ट्री और जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को भी कोई लाभ नहीं मिला है।”

(लेेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और जालंधर में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 2, 2020 5:40 pm

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