Subscribe for notification
Categories: राज्य

सरदार पटेल के गरीबों का अस्पताल बंद करने की तैयारी में भाजपा

अहमदाबाद नगर निगम सरदार पटेल का बनाया वाडीलाल अस्पताल बंद करने की तैयारी में है। इस अस्पताल में गरीब लोगों का दस रुपये में इलाज होेता है। भाजपा सरदार पटेल के नाम पर सियासत तो करती है, लेकिन उनके कामों को मिटाने में लगी है। हॉस्पिटल को बचाने के लिए एक संगठन के लोग आंदोलन कर रहे हैं। वकील शमशाद पठान की अगुवाई में शहर के कुछ सामजिक कार्यकर्ताओं ने सभी 192 पार्षदों से मुलाकात कर हॉस्पिटल बचाने के लिए प्रयत्न करने और गरीब जनता के पक्ष में खड़े होने के लिए लिखित आवेदन दिया है। वाडीलाल जन आन्दोलन को कांग्रेस से सकारात्मक उत्तर मिला तो भाजपा के पार्षदों ने भी मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। पार्टी के निर्णय के खिलाफ असहमति तो जताई लेकिन पार्टी का विरोध का साहस नहीं दिखा।

अहमदाबाद का पुराना शहर, जिसे वॉल्ड सिटी कहते हैं। वॉल्ड सिटी में बड़ी संख्या में मुसलमान, दलित और देवी पूजक रहते हैं। अधिकतर लोग छोटे-मोटे कारोबार करते हैं। दलित समाज के लोग सरकारी नौकरी या ठेके की नौकरी करने के अलावा मज़दूरी करते हैं। सुखी संपन्न समाज जैसे जैन बनिए, पटेल, ब्राह्मण इत्यादि जाति के लोग वाल्ड सिटी छोड़ नए अहमदाबाद में प्रस्थान कर गए हैं। न्यू अहमदाबाद का नारणपुरा, न्यू रानिप, बोपल इत्यादि के रूप में विस्तार हुआ है। इसी न्यू अहमदाबाद में चमचमाती सड़कें हैं। सरहद बनाता हुआ साबरमती रीवर फ्रंट और जाईडस कैडिला, अपोलो और राजस्थान जैसे बड़े हॉस्पिटल भी हैं। इस विस्तार को शिक्षा, स्वास्थ, पानी, साफ हवा, ड्रेनज लाइन सब कुछ उपलब्ध है।

पुराने शहर के अधिकतर लोग कॉर्पोरेशन और सरकारी अस्पताल का उपयोग करते हैं। अहमदाबाद नगर निगम के एक फैसले ने पुराने शहर को चिंतित कर दिया। पिछले एक साल से नगर निगम आश्रम रोड स्थित वाडीलाल सारा भाई हॉस्पिटल को धीरे-धीरे बंद कर रहा है। इस अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टॉफ को सरदार बल्लभ भाई पटेल हॉस्पिटल में स्थानतरित कर दिया गया है। यह अस्पताल इतना महंगा है कि साधारण व्यक्ति जाने से डरता है।

पार्षद इक़बाल शेख बताते हैं, ‘वाडीलाल अस्पताल के आस-पास दलित, देवी पूजक और मुस्लिमों की बड़ी संख्या है। इस कारण इस हॉस्पिटल में सबसे अधिक निचले तबके के गरीब ही जाते हैं और दस रुपये में इलाज करा लिया करते थे। निगम के निर्णय के बाद यही लोग सबसे अधिक दिक्कतें झेल रहे हैं। भाजपा हिन्दू-मुस्लिम कर एसवीपी हॉस्पिटल को लाभ पहुंचाना चाहती है।’

शेख का कहना है कि 2002 में अहमदाबाद नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता थी फिर भी मुस्लिमों को शारदा बेन हॉस्पिटल, एलजी हॉस्पिटल और सिविल हॉस्पिटल में ले जाने में दिक्कतें हुई थीं, लेकिन वाडीलाल हॉस्पिटल में सभी समुदाय के लोगों को इलाज कराना आसान था। उनकी मांग है कि अहमदाबाद नगर निगम को वाडीलाल पर पुनः विचार कर सभी सुविधा और 1500 बेड के साथ चालू रखना चाहिए। ताकि गरीबों को सस्ते में इलाज मिल सके।

1931 में अहमदाबाद शहर के रईस परिवार (चिनाय और साराभाई) ने गरीबों को मुफ्त इलाज के उद्देश्य से वाडीलाल साराभाई हॉस्पिटल और चिनाय मैटरनिटी हॉस्पिटल की स्थापना की थी। उस समय शहर के मेयर सरदार बल्लभ भाई पटेल थे। अहमदाबाद नगर निगम और डोनर परिवार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के अनुसार हॉस्पिटल को ज़मीन निगम देगा। डोनर परिवार इंफ्रास्ट्रचर तैयार कराएगा। बोर्ड में चा ट्रस्टी डोनर परिवार (चिनाय और साराभाई परिवार) से होंगे और नगर निगम के पांच सदस्य जो हॉस्पिटल का संचालन करेंगे। 1960 में एक रेजोल्यूशन पास कर एक विपक्षी दल के पार्षद को सदस्य बनाने का प्रस्ताव परित हुआ था। इसके बाद सत्ता पक्ष के लिए मनमानी कर पाना आसान नहीं रहा।

2012 में भाजपा शासित अहमदाबाद नगर निगम ने 1960 का प्रस्ताव रद्द कर भाजपा पार्षद को बोर्ड का सदस्य बना दिया। इस कारण कोई भी प्रस्ताव पास कराना आसान हो गया। दिसंबर 2018 में वीएस हॉस्पिटल और चिनाय मैटरनिटी होम्स के बोर्ड से प्रस्ताव परित कर वीएस में मरीज़ों के बेड संख्या 1550 से घटा कर 120 कर दी गई। डोनर परिवार जो हॉस्पिटल के ट्रस्टी हैं, उनका आरोप है कि सत्ता पक्ष बोर्ड में बहुमत कर मन मानी कर रहा है। 1931 में जब अस्पताल बनाया गया तब भी 120 ही बेड पारित थे। विरोध के कारण 2013 में फिर से एक प्रस्ताव पारित कर बेड की संख्या 500 कर दी गई थी।

इसी कैंपस में एनएचएल मेडिकल कॉलेज भी है। एनएचएल सरकारी मेडिकल कॉलेज है। इसका संचालन एएमसी का मेडिकल एजुकेशन ट्रस्ट करता है। वीएस हॉस्पिटल में दस रुपये की मामूली फीस से कोई भी व्यक्ति इलाज करा सकता है। दूसरी बार आने पर कोई फीस नहीं देनी पड़ती है। अब इस अस्पताल के बंद करने की तैयारी चल रही है। वीएस अस्पताल की कीमत पर अब एमएमसी सरदार बल्लभ भाई पटेल हॉस्पिटल को चला रहा है। आधुनिक सुविधा वाला यह हॉस्पिटल गरीबों की पहुंच से दूर है।

चिनाय परिवार की रूपा चिनाय, जो वीएस हॉस्पिटल की ट्रस्टी हैं, ने बताया कि जिस पब्लिक हेल्थ मॉडल के अनुसार वाडीलाल हॉस्पिटल चल रहा था उसे हमारे पूर्वज और सरदार पटेल बल्लभ भाई पटेल ने गरीब एवं माध्यम वर्ग को मुफ्त चिकित्सा देने के उद्देश्य से अथॉरिटी और सिटीजन मॉडल खड़ा किया था। बीजेपी के लोग एक तरफ सरदार पटेल के नाम से राजनीति करते हैं वहीं दूसरी तरफ उनके द्वारा शुरू किए गए पब्लिक हेल्थ मॉडल समाप्त कर उन्हें ही अपमानित कर रहे हैं। यह हॉस्पिटल अस्सी बरस से सरदार पटेल के मॉडल से चल रहा था। रूपा का कहना है कि सरदार पटेल ने हॉस्पिटल बनाने के लिए ज़मीन दी थी हमारे परिवार ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था।

भाजपा शासित म्यूनिस्पल कॉर्पोरेशन ने 2012 में प्रस्ताव पारित कर विपक्ष से एक सदस्य का नियम बदल दिया। इस कारण कॉर्पोरेशन अपनी मनमानी कर रहा है। चैरिटी कमिश्नर ने भी कुछ नहीं किया। हाईकोर्ट में केस पेंडिंग है। रूपा चिनाय का यह भी कहना है। उन्होंने कहा कि अनुभवी डॉक्टर और स्टाफ को उनकी इच्छा के खिलाफ एसवीपी में ट्रांसफर कर दिया गया। एसवीपी में नये मरीज के लिए दस रुपये के बजाय 100 रुपये फीस है। दाखिल मरीज़ से वीएस में कोई फीस नहीं ली जाती थी, जबकि एसवीपी में 300 रुपये रोज़ाना चार्ज किया जाता है। एसवीपी में सात या उस से कम दिन के दाखिले पर पांच हजार रुपये एडवांस लिया जाता है। भाजपा शासित म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन का दावा है कि सरकार से जारी सभी स्वास्थ योजनाएं एसवीपी अस्पताल में लागू हैं।

अहमदाबाद के वाडज से पार्षद जिग्नेश पटेल ने प्रतिनिधिमंडल से बात चीत में कहा कि वाडीलाल हॉस्पिटल को लेकर बहुत सारी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। मैं अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहता हूं लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार वीएस हॉस्पिटल में बेड संख्या कम कर जारी रहेगी। रही एसवीपी की बात तो गरीब व्यक्ति भी वहां आयुषमान, मां वात्सल्य योजना इत्यादि से मुफ्त इलाज करवा सकता है। यहां सभी योजनाएं मान्य हैं। जिनके पास कार्ड नहीं है वह मामूली फीस 300 रुपये भरकर अपना इलाज करा सकता 300 रुपये में दो लोगों को हॉस्पिटल खाना भी देता है। एसवीपी हॉस्पिटल किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल से सस्ता है।

This post was last modified on November 2, 2019 4:09 pm

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share

Recent Posts

उमर ख़ालिद ने अंडरग्राउंड होने से क्यों किया इनकार

दिल्ली जनसंहार 2020 में उमर खालिद की गिरफ्तारी इतनी देर से क्यों की गई, इस रहस्य…

2 hours ago

हवाओं में तैर रही हैं एम्स ऋषिकेश के भ्रष्टाचार की कहानियां, पेंटिंग संबंधी घूस के दो ऑडियो क्लिप वायरल

एम्स ऋषिकेश में किस तरह से भ्रष्टाचार परवान चढ़ता है। इसको लेकर दो ऑडियो क्लिप…

4 hours ago

प्रियंका गांधी का योगी को खत: हताश निराश युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के लिए मजबूर

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक और…

5 hours ago

क्या कोसी महासेतु बन पाएगा जनता और एनडीए के बीच वोट का पुल?

बिहार के लिए अभिशाप कही जाने वाली कोसी नदी पर तैयार सेतु कल देश के…

6 hours ago

भोजपुरी जो हिंदी नहीं है!

उदयनारायण तिवारी की पुस्तक है ‘भोजपुरी भाषा और साहित्य’। यह पुस्तक 1953 में छपकर आई…

6 hours ago

मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल के कैदियों की भूख हड़ताल के समर्थन में झारखंड में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन

महान क्रांतिकारी यतीन्द्र नाथ दास के शहादत दिवस यानि कि 13 सितम्बर से झारखंड के…

18 hours ago