Friday, December 3, 2021

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आवारगी

जन्मदिन पर विशेषः मजाज़ की शायरी में रबाब भी है और इंक़लाब भी

एक कैफ़ियत होती है प्यार। आगे बढ़कर मुहब्बत बनती है। ला-हद होकर इश्क़ हो जाती है। फिर जुनून और बेहद हो जाए तो दीवानगी कहलाती है। इसी दीवानगी को शायरी का लिबास पहना कर तरन्नुम से (गाकर) पढ़ा जाए...
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झारखंड: मौत को मात देकर खदान से बाहर आए चार ग्रामीण

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि झारखंड के तमाम बंद पड़े कोल ब्लॉक में अवैध उत्खनन करके...
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