Tuesday, November 30, 2021

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इंकलाब

जन्मदिन पर विशेषः मजाज़ की शायरी में रबाब भी है और इंक़लाब भी

एक कैफ़ियत होती है प्यार। आगे बढ़कर मुहब्बत बनती है। ला-हद होकर इश्क़ हो जाती है। फिर जुनून और बेहद हो जाए तो दीवानगी कहलाती है। इसी दीवानगी को शायरी का लिबास पहना कर तरन्नुम से (गाकर) पढ़ा जाए...
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शरजील इमाम को देशद्रोह के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह की एकल पीठ ने 16 जनवरी, 2020 को परिसर में आयोजित...
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