Monday, December 6, 2021

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उपेक्षित किसान

कभी आय में बीडीओ को मात देने वाले किसान की हैसियत अब चपरासी के बराबर भी नहीं

‘उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ट चाकरी भीख निदान’ की पुरानी उक्ति अब कृषि प्रधान देश में पूर्णरूप से उलट गई है। खेती-किसानी घाटे का सौदा हो गया है। देश अन्न के मामले में तो आत्मनिर्भर हो गया है; लेकिन...
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परिनिर्वाण दिवस: आंबेडकर ने लिया था जाति के समूल नाश का संकल्प

भारतीय राजनीतिक-सामाजिक परिप्रेक्ष्य में छह दिसंबर बहुत महत्त्वपूर्ण है। एक तो डॉ. आम्बेडकर की यह पुण्यतिथि है, दूसरे यह...
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