Thursday, October 21, 2021

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दास्तां

अलविदा शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी! दास्तानगोई को जिंदा कर खुद बन गए दास्तां

1995 के आस-पास का वक्त रहा होगा। किसी बातचीत में उनकी लाइब्रेरी का ज़िक्र सुना था। इलाहाबाद के घर में उनकी लाइब्रेरी के क़िस्से की छाप दिमाग़ में रह गई। हम अपनी निजी चर्चाओं में उन्हें लाइब्रेरी वाले फ़ारूक़ी...
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घर बह गए, कई जानें गयीं! नैनीताल में चौतरफा तबाही का मंजर

उत्तराखंड के नैनीताल जनपद की रामगढ़ और धारी विकासखंड में लगातार 3दिन से हुई बारिश से मुक्तेश्वर रामगढ़ क्षेत्र...
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