Thursday, January 20, 2022

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नेहरू

जयंतीः जोश मलीहाबादी की रगों में दौड़ता था इंकलाब!

उर्दू अदब में जोश मलीहाबादी वह आला नाम है, जो अपने इंकलाबी कलाम से शायर-ए-इंकलाब कहलाए। जोश का सिर्फ यह एक अकेला शेर, काम है मेरा तगय्युर, नाम है मेरा शबाब/मेरा नाम ‘इंकलाबो, इंकलाबो, इंकिलाब, ही उनके तआरुफ और...

नेहरू की बनाई नींव पर खड़ी हुई भारतीय लोकतंत्र की बुलंद इमारत

एक बार नेहरू से किसी ने पूछा कि भारत के लिए उनकी विरासत क्या होगी, तो उन्होंने उत्तर दिया, “यकीनन स्वयं पर शासन करने में सक्षम चालीस करोड़ लोग।” ये लोकतंत्र पर नेहरू का दृढ़विश्वास ही था। महत्वपूर्ण मुद्दों...

जन्मदिन विशेषः मौलाना आज़ाद ने कहा था- धार्मिक जुनून से बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकती

आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री और मशहूर शिक्षाविद् मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवंबर सन् 1888 में अरब के मक्का में हुआ था। मौलाना आजाद की शख्सियत को शब्दों और वाक्यों में परिभाषित करना ऐसा है...

जयंतीः किसान आंदोलन से देश निर्माण की बड़ी भूमिका तक पहुंचे थे सरदार पटेल

आज हम जिस भारत को देखते हैं, उसका तसव्वुर शायद ही सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम के बिना पूरा हो। सरदार पटेल ही वे शख्सियत थे, जिन्होंने हमारे देश के छोटे-छोटे रजवाड़ों और राजघरानों को एक कर भारत...

भगत सिंह का सपना आज़ादी से कहीं आगे साम्राज्यवाद के नाश का था

2018 में, कर्नाटक के चुनाव में प्रधानमंत्री बीदर में अपनी चुनाव रैली कर रहे थे। उन्होंने कहा, "जब शहीद भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और स्वातन्त्र्यवीर सावरकर आज़ादी की लड़ाई में जेल में थे तो क्या कांग्रेस का कोई नेता...

विपक्ष के लिए प्रेरणादायी बन सकता है नेहरू सरकार के खिलाफ किया गया लोहिया का संघर्ष

किसी भी सरकार की नकेल कसने के लिए विपक्ष का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। लोकतंत्र में यह माना जाता है कि यदि विपक्ष कमजोर पड़ जाता है तो सरकार निरंकुश हो जाती है। आज की बात करें तो प्रचंड बहुमत...
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उत्तराखंड में भाजपा की नैया कैसे लगेगी पार? कोई पार्टी तो कोई मैदान छोड़ रहा

उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारक हरक सिंह रावत...
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