Sunday, November 28, 2021

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मनुवादी

‘दलित साहित्य’ ही कहना क्यों जरूरी?

बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में दलित समाज की वेदना और उत्पीड़न को दलित साहित्य के माध्यम से दुनिया के समक्ष लाने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। पिछली सदी के सातवें दशक में ‘दलित साहित्य’ का हिंदी पट्टी में शुरुआती...

‘मनुस्मृति दहन दिवस’ पर मनुविधान समेत किसान कानूनों की जलाई गई होली

25 दिसंबर को 'मनुस्मृति दहन दिवस' पर देश के कई राज्यों सहित बिहार-यूपी में बहुजन संगठनों ने मनुस्मृति के साथ मनुवादी-पूंजीवादी गुलामी थोपने के कानूनों-प्रावधानों-नीतियों का दहन किया। इस मौके पर मनुस्मृति के साथ मनुविधान थोपने के एजेंडे, तीनों...

हाथरस कांडः ऐपवा का प्रदेश भर में प्रदर्शन, कहा- यूपी पुलिस पर हो लीगल एक्शन

हाथरस की घटना को लेकर महिला संगठनों का गुस्सा और विरोध सड़कों पर अब भी जारी है। आज शुक्रवार को ऐपवा ने यूपी के तमाम जिलों में प्रदर्शन किया। संगठन ने महिलाओं के साथ बर्बर यौन हिंसा और हत्या...
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बुंदेलखंडी खुद तय करें अपनी तकदीर, इसके लिए कांग्रेस बनाएगी बुंदेलखंड विकास बोर्ड: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आज महोबा में प्रतिज्ञा रैली को संबोधित किया। "बुंदेलखंड के भइया-बहिनन का राम-राम, मोड़ा-मोड़ियन...
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