Saturday, May 28, 2022

रंजन गोगोई

अदालत की अवमानना की गाईडलाइंस क्यों नहीं बनाती सुप्रीम कोर्ट!

आजकल न्यायपालिका के फैसलों और न्यायाधीशों की कड़ी आलोचना सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर हो रही है। इनमें सामान्य जन के साथ विशिष्ट जन भी शामिल हैं। किसी को अनदेखा कर दिया जा रहा है तो किसी पर...

क्या लोवर ज्यूडिशियरी में ही फ्लर्ट करना गुनाह है?

उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस राम सुब्रमण्यन की पीठ ने मध्य प्रदेश में जिला अदालत के एक पूर्व जज की अपील पर कहा कि न्यायपालिका में किसी जज के अपने विभागीय जूनियर अधिकारी...

लाख सफाई के बाद भी गोगोई को नहीं मिल सकेगी ‘प्रेतबाधा’ से मुक्ति!

राज्य सभा की सीट के अनैतिक सौदे, बसे दुबके हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई के लिए ‘इंडिया टुडे’ का कोलकाता कनक्लेव किसी मुक्ति पर्व से कम नहीं था। इसके लिए उन्होंने प्रश्नकर्ता कौशिक डेका को...

‘कोर्ट में केवल परतें उधेड़ी जाती हैं, वहां आपको न्याय नहीं मिलता’: जस्टिस रंजन गोगोई

"अगर आप कोर्ट जाते हैं तो आपको पछतावा होता है। कोर्ट में केवल परतें उधेड़ी जाती हैं। वहां आपको न्याय नहीं मिलता है। उन्हें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अगर आप कॉरपोरेट हैं तो चांस लेने...

चुनाव जीत कर सरकार बनाने से मनमानी का लाइसेंस नहीं मिल जाता कानून मंत्री जी!

भारत में लोकतंत्र है और चुनाव में कोई जीते कोई हारे इससे जीतने वाली पार्टी को यह लाइसेंस नहीं मिल जाता कि वह संविधान और कानून के शासन का रोज उल्लंघन करे। मनमानियां करे और न्यायपालिका उसके निर्णयों को...

यौन उत्पीड़न के मामलों में जजों के लिए क्या संविधान से इतर है कोई व्यवस्था?

यौन शोषण के आरोप जब उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों या अधीनस्थ न्यायालय पर लगते हैं तो जांच की सामान्य प्रक्रिया अपनाने के बजाय  न्यायालयों के लिए पीड़िता को न्याय दिलाने से ज्यादा बड़ा मुद्दा आरोपितों को किसी...

संवैधानिक पुनर्समीक्षा की मांग करते हैं जस्टिस अरुण मिश्रा के फैसले

उच्चतम न्यायालय ने 2012 में कहा था कि एक जज को सीजर की पत्नी की तरह संदेह से ऊपर होना चाहिए। लोगों का न्याय व्यवस्था में भरोसा होना उन जजों पर निर्भर करता है, जो विभिन्न मामलों में फैसले...

नागरिक आजादी का अंतरिक्षः अवमानना का उपग्रह

1. प्रशांत भूषण के अवमानना प्रकरण के कारण जिरह में संविधान के इतिहास और उसकी भविष्यमूलकता को लेकर कई तरह के पेंच और द्वैध पैदा हो गए हैं। उनकी भ्रूण हत्या नहीं की जानी चाहिए।ये सवाल फिलहाल तो जस्टिसगण...

ट्वीट अवमानना मामले में प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से सुबूत पेश करने की स्वतंत्रता मांगी

प्रशांत भूषण ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी दायर की है। इसमें कहा गया है कि उनके दो कथित अपमानजनक ट्वीट से न्यायपालिका की अवमानना नहीं होने के बारे में दी गई उनकी दलीलों से उच्चतम न्यायालय...
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साम्प्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

जब सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण तत्परता से अनवरत सुनवाई कर राम मंदिर विवाद में बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं के...
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