किसने कहा देश में न्याय व्यवस्था धीमी है! शिंदे की रविवार शाम को याचिका लगी, सोमवार को सुनवाई

उच्चतम न्यायालय कहने को तो संविधान की संरक्षक है पर जब वह चीन्ह-चीन्ह के न्याय करने लगती है तो पूरा देश भौंचक होकर उच्चतम न्यायालय की ओर देखने लगता है। अब कहने को तो चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ़ रोस्टर हैं और वही निर्धारित करते हैं कि किस मामले की सुनवाई कब होगी और कौन सी पीठ उसकी सुनवाई करेगी।अब इसे क्या कहेंगे कि एक और एक से बढ़कर एक महत्वपूर्ण मुद्दे ठन्डे बसते में पड़े रहते हैं और दूसरी और ऐसे मुद्दों की त्वरित सुनवाई होती है जिनके तार किसी न किसी न रूप में सत्तारूढ़ दल और सरकार से जुड़े होते हैं।ऐसा ही मामला महाराष्ट्र संकट का है जिसमें  शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के खिलाफ याचिका लगाई, और उसे फौरन ही मंजूर कर लिया गया और 26 जून सोमवार को उसे सुनवाई के लिए लिस्ट भी कर दिया गया।

26/06/ शाम 6.30 पर, एकनाथ शिंदे की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई।

26/06/ को रविवार के बावजूद, शाम  7.30 बजे, रजिस्ट्री ने याचिका लिस्ट कर, 27/06/ की तिथि सुनवाई के लिए तय भी कर दी।

सामान्यतः एक याचिका जब दायर होती है तो, रजिस्ट्री उसका डिफेक्ट ढूंढती है और डिफेक्ट ठीक होने पर, लिस्टिंग के लिए रखी जाती है। सामान्य स्थिति में, कोर्ट से आवश्यक मामलों की सुनवाई के लिए अदालत से अनुरोध किया जाता है, जिसे मेंशनिंग कहते हैं। क्या शिंदे की याचिका में यह सब हुआ है?

क्या आपको याद नहीं एकनाथ शिंदे ने अपने पीछे एक महाशक्ति की बात की थी। बीजेपी ने तो कहा कि वे इस मामले में शामिल नहीं हैं। बीजेपी झूठ तो बोलती नहीं। फिर यह महाशक्ति कौन है ?

शिंदे ने कथित दलबदल को लेकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्यवाही के लिए बागी विधायकों को डिप्टी स्पीकर द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस को चुनौती दी है। डिप्टी स्पीकर ने सभी बागी विधायकों से सोमवार शाम तक नोटिस का जवाब लेकर सुनवाई के लिए आने को कहा गया है। लेकिन शिंदे मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गए।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन बेंच सोमवार को मामले की सुनवाई करेगी। लाइव लॉ के मुताबिक शिंदे की याचिका, 26 जून शाम लगभग 6.30 बजे दायर की गई, जिसमें डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की अस्वीकृति को चुनौती दी गई, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से संबंधित हैं। डिप्टी स्पीकर ने अयोग्यता नोटिस जारी किया क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा में अध्यक्ष का पद खाली है।

शिंदे की याचिका में तर्क दिया गया है कि डिप्टी स्पीकर द्वारा अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल (एसएसएलपी) के नेता के रूप में मान्यता देना अवैध है। शिंदे, जो शिवसेना के 2/3 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करते हैं, प्रार्थना की है कि जब तक डिप्टी स्पीकर को हटाने से संबंधित मुद्दे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक अयोग्यता नोटिस पर कार्यवाही रोक दी जानी चाहिए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को ही निर्णय सुना सकता है। अगर उसने कोई आदेश जारी नहीं किया तो डिप्टी स्पीकर शाम को अपनी कार्यवाही शुरू कर देंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट डिप्टी स्पीकर की कार्यवाही को स्टे कर देते हैं तो बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसा कर सकता है।

यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई पेंडिंग है, जिसमें चुनाव बॉन्ड का मामला प्रमुख है। लेकिन उसमें तारीख पर तारीख लग रही है।

शिंदे की याचिका, रविवार (26 जून) शाम लगभग 6.30 बजे दायर की गई, जिसमें डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की अस्वीकृति को चुनौती दी गई है। डिप्टी स्पीकर ने अयोग्यता नोटिस जारी किया क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा में स्पीकर का पद खाली है। याचिका में तर्क दिया गया है कि डिप्टी स्पीकर द्वारा अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल (एसएसएलपी) के नेता के रूप में मान्यता देना अवैध है। शिंदे ने शिवसेना के 2/3 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए प्रार्थना की कि जब तक डिप्टी स्पीकर को हटाने से संबंधित मुद्दे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक अयोग्यता नोटिस पर कार्यवाही रोक दी जानी चाहिए।

विधानसभा उपाध्यक्ष के शिवसेना के 16 बागी विधायकों को भेजे गए अयोग्यता नोटिस के खिलाफ मंत्री एकनाथ शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ सोमवार को शिंदे की याचिका पर सुनवाई करेगी।शिंदे गुट का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व पूर्व एसजी हरीश साल्वे करेंगे। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी के 16 विधायकों को महाराष्ट्र के डेप्युटी स्पीकर की ओर से जारी अयोग्यता नोटिस और अजय चौधरी की शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार बहुमत खो चुकी है। शिवसेना के 38 विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। हालांकि फिर भी महाविकास आघाड़ी सरकार का दुरुपयोग करना जारी है। हमारे परिवार और रिश्तेदारों की सिक्योरिटी हटाकर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। यह भी कहा गया है कि संजय राउत याचिकाकर्ताओं और दूसरे सदस्यों को धमकी दे रहे हैं कि जो विधायक महाराष्ट्र लौट रहे हैं उनके लिए वह मुश्किलें खड़ी कर देंगे।

कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन के विरोध में शिंदे और बागी विधायकों के राज्य छोड़ने के बाद महाराष्ट्र राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। बागी विधायक पिछले कुछ दिनों से असम के गुवाहाटी के एक होटल में डेरा डाले हुए हैं। ठाकरे की टीम की अयोग्यता याचिका पर डेप्युटी स्पीकर ने 16 बागी विधायकों को नोटिस जारी किया है।

शिंदे की याचिका में कहा गया है कि डेप्युटी स्पीकर की ओर से जारी अयोग्यता नोटिस संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(जी) का पूरी तरह से उल्लंघन है, साथ ही अजय चौधरी को शिवसेना के नेता के रूप में मान्यता देने में डेप्युटी स्पीकर की अवैध और असंवैधानिक कार्रवाई है।याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता 25 जून के नोटिस/ समन से व्यथित है जो पूरी तरह से अवैध, असंवैधानिक है और नबाम रेबिया और बामंग फेलिक्स वर्सेस डेप्युटी स्पीकर, अरुणाचल प्रदेश विधान सभा (2016) के मामले में इस अदालत के फैसले की पूरी तरह से अवहेलना करता है।

इसमें कहा गया है, फरवरी, 2021 में नाना पटोले के पद से इस्तीफा देने के बाद से अध्यक्ष की सीट खाली है। इस प्रकार, ऐसा कोई अधिकार नहीं है जो अयोग्यता याचिका पर फैसला कर सके जिसके तहत याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया गया है। याचिका में कहा गया है कि अजय चौधरी को डिप्टी स्पीकर द्वारा शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देना अवैध और असंवैधानिक है।डिप्टी स्पीकर के पास अयोग्यता याचिका पर फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है। यह सामान्य ज्ञान है कि राज्य में वर्तमान सरकार सदन में बहुमत खो चुकी है।शिवसेना विधायक दल के 38 सदस्यों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। यह सदन में बहुमत से नीचे है।

याचिका में कहा गया है कि उन्होंने शिवसेना की सदस्यता नहीं छोड़ी है। डिप्टी स्पीकर की कार्यवाही मनमानी अन्यायपूर्ण और अवैध है। डिप्टी स्पीकर सरकार के हाथों में खेलते हुए कार्यवाही कर रहे हैं।याचिका में विधान सभा में शिंदे की जगह विधायक अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल का नेता और सुनील प्रभु को नया चीफ व्हिप बनाने को भी चुनौती दी गई है।इसमें विधान सभा में शिवसेना विधायक दल के नेता और चीफ व्हिप की नियुक्तियों में बदलाव को चुनौती दी गई है।

इनकी दलील है कि जब तक डिप्टी स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता तब तक कोर्ट डिप्टी स्पीकर को उनके खिलाफ अयोग्य घोषित करने के मुद्दे पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने का निर्देश दे। एकनाथ शिंदे ने अपनी याचिका में कहा कि सभी 55 विधायकों ने उन्हें 2019 में शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव किया था, लेकिन जब ठाकरे खेमे द्वारा उन्हें शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया तो 35 फीसदी से भी कम शिवसेना के विधायक मौजूद थे।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय ने शनिवार को शिंदे सहित शिवसेना के 16 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली शिकायतों के मद्देनजर उन्हें समन जारी कर 27 जून की शाम तक लिखित जवाब मांगा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)