Subscribe for notification

नाम बदलने से न रोजी-रोटी मिलेगी और न ही हल होंगी जनता की दूसरी समस्याएं

कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैज़ाबाद जनपद का नाम अयोध्या करने का ऐलान कर दिया। इससे पहले योगी सरकार इलाहबाद का नाम प्रयाग कर चुकी है। बीजेपी सरकारों के लिए नाम बदलने की ये बीमारी छूत का रूप धारण करती जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को गुजरात के उपमुख्य मंत्री नितिन पटेल ने कहा कि “गुजरात के लोग चाहते हैं कि अहमदाबाद का नाम बदल कर कर्णावती रखा जाए। यदि कानूनी दिक्कतें पार हो गईं तो जल्द ही अहमदाबाद का नाम कर्णावती होगा।”

आप को बता दें 1074 ई में करण सिंह सोलंकी ने अशावल पर कब्ज़ा किया था। इससे पहले अशावल पर आदिवासी राजा आशा भील की हुकूमत थी। आशा भील की रियासत कैलिको मील से जमालपुर दरवाज़ा तक फैली थी। करण सिंह सोलंकी ने आदिवासियों को पराजित कर अशावल पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन करणसिंह की सत्ता का कोई लंबा इतिहास नहीं है।

चौदवीं सदी में अहमद शाह बागियों से जंग कर लौट रहे थे तो अशावल रुके थे। उस समय इस जगह की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए अशावल में शहर बसा कर उसे राजधानी बनाने का निर्णय लिया। 1411 ई में अहमद शाह ने चार कोनों पर पत्थर रख अहमदाबाद शहर की बुनियाद रखी। शहर को सुरक्षित बनाने के वास्ते चारों तरफ से दीवार खड़ी कर दी गई। आज भी पुराने शहर को walled city ही कहा जाता है। शहर में 12 दरवाज़े हैं जो आज भी उसी तरह से बरकरार हैं।

गुजरात सरकार के नाम बदलने का विरोध सिविल सोसाइटी, इतिहासकार, मुस्लिमों के अलावा आदिवासी ग्रुप कर सकते हैं। यदि बीजेपी राजनैतिक लाभ के लिए अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती रखने की सक्रियता दिखाती है तो आदिवासी समाज भी अहमदाबाद के लिए अशावल नाम की मांग कर सकता है। गुजरात में आदिवासी 15% हैं जिनके लिए चार लोकसभा और 27 विधानसभा सीटें सुरक्षित हैं। जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल जैसे आंदोलनकारियों की उपस्थिति में सरकार के लिए जनमत तैयार कर पाना आसान नहीं होगा।

इस मसले पर जनचौक ने जब कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने अपने-अपने तरीके से इसका विरोध किया। प्रोफेसर हेमंत शाह का कहना है कि “नाम बदलने से कुछ नहीं होता। कुछ करना है तो पहले अहमदाबाद के गरीबों के लिए कुछ किया जाना चाहिए। नाम बदलेने के काम को इतिहासकारों पर छोड़ देना चाहिए। वैसे भी कर्णावती नाम का कोई इतिहास नहीं रहा है। नाम बदलने हैं तो अशावल नाम रख दो जो पुराना नाम रहा है। अशावल में अहमदाबाद को अहमद शाह ने बसाया था यही इतिहास है। अहमदाबाद को छ सौ वर्ष पूरे होने पर इसी सरकार ने 600वीं वर्षगांठ मनाई थी।”

दलित नेता एवं वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी ने जनचौक को बताया कि नाम बदलने से न तो रोटी, कपड़ा, और मकान मिलेगा न राफेल में हुआ भ्रष्टाचार रुकेगा। न ही युवाओं को रोज़गार और किसानों की आत्महत्या रुकेगी। न ही नीरव मोदी, चोकसी और माल्या द्वारा लेकर भागे गए पैसे वापस आएंगे। नाम बदलना केवल जुमले बाज़ी और मूल मुद्दे से जनता को भटकाने के सिवाय कुछ नहीं है।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on December 3, 2018 8:15 am

Share