Subscribe for notification

करवट ले रही है देश की राजनीति, बता रहे हैं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजे

वाराणसी स्थित संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्र संघ के लिए हाल ही में हुए चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई का पैनल विजयी घोषित किया गया है। इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर शिवम शुक्ल, उपाध्यक्ष पर चंदन कुमार मिश्र, महामंत्री पद पर अवनीश मिश्रा और पुस्तकालय मंत्री के पद पर रजनीकांत दूबे निर्वाचित घोषित किए गए हैं। एनएसयूआई की चुनाव में हुई यह विजय कई मायनों में इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह विश्वविद्यालय मूलतः ब्राह्मणों का गढ़ माना जाता है और अब तक यही माना जाता रहा है कि ब्राह्मण मोदी और योगी सरकार के प्रत्येक फैसले के साथ खुल कर खड़े हुए हैं और भाजपा का बड़ा वोट बैंक हैं।

एक बात और है कि इस विश्वविद्यालय को ब्राह्मणवादी विचारधारा और उसके कर्मकांडी तरीकों को सीखने समझने का सबसे बड़ा स्थान माना जाता है। इस विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का बहुत मजबूत आधार रहा है। भाजपा अपने पूरे दर्शन में मनुस्मृति आधारित ब्राह्मणवादी तंत्र का जो खाका खींचती है उसे बिना कर्मकांड के पूरा नहीं किया जा सकता। यह विश्वविद्यालय ब्राह्मणवाद के लिए एक तरह से कैडर तैयार करने का काम करता रहा है। यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार के साथ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ भाजपा की सरकार चला रहे हैं जो एक उग्र हिन्दुत्व के बड़े चेहरे और ब्राह्मणवादी सत्ता-दर्शन के राजनैतिक प्रतिनिधि हैं।

हलांकि अब जबकि नतीजे आ गए हैं- प्रश्न है कि संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की इस हार के क्या मायने समझे जाएं? आखिर ऐसा क्यों हुआ कि ब्राह्मणों के मजबूत गढ़ में भाजपा की छात्र विंग तब चुनाव हार गयी जब कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार रामराज्य के अवतरित हो जाने का दावा करती है और केन्द्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रवाद के नाम पर पूरी संवैधानिक और इस देश की अब तक की लोकतांत्रिक यात्रा को ही निरर्थक घोषित कर दिया है।

जब सड़क पर संघ के कार्यकर्ताओं का ’हिन्दुत्व’ प्रेम हिलोरें मार रहा हो, और ब्राह्मणों को बीजेपी का कट्टर समर्थक कहा जा रहा हो तब इस नतीजे पर हमें और गंभीरता से विचार करना चाहिए। जब पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के नाम पर ’फासीवाद’ सड़क पर नंगा नाच रहा हो, जब असहमति के अधिकार को देशद्रोही होने में तब्दील कर दिया गया हो- तब यह नतीजे सत्ताधारी दल के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

गौरतलब है कि यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब केन्द्र की मोदी सरकार के सांप्रदायिक और संविधान की मूल भावना को खत्म करने वाले कई फैसलों से असहमत छात्र सड़क पर हैं। इन असहमत छात्रों से सरकार द्वारा संवाद में कोई रुचि नहीं ली जा रही है और उन पर पाकिस्तान के ऐजेंट होने, देशद्रोही होने का आरोप लगाकर गंभीर हिंसक हमले एबीवीपी द्वारा सुनियोजित तरीके से अंजाम दिए जा रहे हैं। जब इन असहमत लोगों को एबीवीपी द्वारा खुद और पुलिस और पेटि-क्रिमिनल्स से सत्ता संरक्षण में पिटवाया जा रहा है, जब योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसलों से असहमत नागरिकों से ’बदला’ ले रहे हैं, मुसलमानों पर टारगेट करके हमले किए जा रहे हैं- तब यह नतीजे कई बातों और कयासों को बेमानी कर देते हैं। सबसे पहला तो यही कि सड़क पर असहत छात्रों के साथ एबीवीपी और भाजपा के लोग जो कर रहे हैं उससे सवर्ण-ब्राह्मण छात्र भी खुश नहीं है।

एक बात और कि इस नीतीजे के साथ गोदी मीडिया, सरकार के पालतू पीआर-चमचे और अफवाह मास्टर माफियाओं का यह तर्क खत्म हो जाता है कि ब्राह्मण मतदाता मोदी और योगी सरकार के साथ खड़ा है और वह इस तरह के नफरती-सांप्रदायिक और हिंसक हिन्दुत्व मार्का राष्ट्रवाद का समर्थक है। यह नतीजे बताते हैं कि केन्द्र सरकार की नीतियों से वह एकदम खुश नहीं है। उसे राष्ट्रवाद के इस घटिया खोल में हिंसा, महंगाई, नफरत, बेरोजगारी, घृणा, सरकारी संस्थानों को नष्ट करने वाली  पॉलिसी नहीं चाहिए। उसे नौकरी, रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाला ’समावेशी’ राष्ट्रवाद चाहिए।

Related Post

एक बात और है यह नतीजा योगी सरकार के इस दावे की भी कलई खोल देता है कि सरकार से ब्राहम्ण खुश हैं। उत्तर प्रदेश में जिस तरह से ब्राह्मणों के खिलाफ सुनियोजित हत्याएं हो रही हैं, पुलिस थानों में उनकी कोई सुनवायी नहीं हो रही है, प्रशासनिक भ्रष्टाचार अपने चरम पर है, गौ रक्षा के नाम पर उसकी खेती नष्ट की जा रही है- उससे ब्राहम्णों में योगी सरकार के खिलाफ बहुत गुस्सा है। नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ बेगुनाह मुसलमानों की जिस तरह से सत्ता प्रायोजित हत्याएं उत्तर प्रदेश में हुईं, उनकी प्रापर्टी में लूटपाट की गई उससे भी ब्राह्मणों में बहुत गुस्सा है।

यह नतीजे इसी गुस्से का एक छोटा सा प्रतिबिंब हैं। यह नतीजे बताते हैं कि ब्राह्मणों का योगी सरकार से मोहभंग हो चुका है और आने वाले समय में सरकार को यहां से विदा लेना पड़ेगा। आज उत्तर प्रदेश में फैले जंगल राज में उत्तर प्रदेश का मुसलमान जिस तरह से कांग्रेस को अपने साथ खड़ा देख रहा है उससे एक बात तो तय है कि ब्राह्मण समाज के साथ आने से प्रदेश में कांग्रेस बहुत मजबूती के साथ योगी सरकार की फासीवादी नीतियों से लड़ेगी और यह दोनों समाज इस सरकार के अत्याचारों का लोकतंत्र के दायरे में बदला भी लेगा। यह नतीजा संदेश दे रहा है कि उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण आने वाले समय में कांग्रेस के साथ खड़ा हो सकता है। ब्राह्मण और मुस्लिम का यह जोड़ इस योगी-मोदी की इस तानाशाही और फासिज्म को खत्म करेगा। यह नतीजा सिर्फ एक बानगी भर है।

(हरे राम मिश्र स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और आजकल रांची में रहते हैं।)

Share
Published by

Recent Posts

संदर्भ भारत छोड़ो आंदोलन: गोलवलकर और सावरकर का था स्वतंत्रता आंदोलन से 36 का रिश्ता

भारत के स्वाधीनता संग्राम की जो विशेषताएं उसे विलक्षण बनाती हैं, उनमें उसका सर्वसमावेशी स्वरूप…

56 mins ago

भगवा गैंग के नफ़रतगर्द की मौत पर लोगों की प्रतिक्रिया नफ़रत की राजनीति का नकार है

क्या विडबंना है कि हम पत्रकार इस मरनकाल में चुनिंदा मौतों पर बात कर रहे…

4 hours ago

मनोज सिन्हा की ताजपोशी: कश्मीर पर निगाहें, बिहार पर निशाना

जिस राजनेता का नाम कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए चला हो और अंतिम…

5 hours ago

स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत ठेका कर्मचारियों ने किया लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के बाहर प्रदर्शन

नई दिल्ली। जहां एक ओर कोरोना काल में भी संघ-बीजेपी से जुड़े लोगों को उन्मादी…

5 hours ago

मंडल कमीशन के आईने में असमानता के खिलाफ जंग और मौजूदा स्थिति

विश्व के किसी भी असमानता वाले देश में स्वघोषित आरक्षण होता है। ऐसे समाजों में…

6 hours ago

केरलः अब शॉपिंग माल से चलेगा संघ का ‘हिंदुत्व का व्यापार’

तिरुअनंतपुरम। केरल को देवताओं का देश कहा जाता है। पर्यटन विभाग ने भी इसे प्रचार…

9 hours ago

This website uses cookies.